पर्यावरण

सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण में वाहनों के धुएं को सबसे बड़ा कारण बताया, AQI 400 के करीब

6 नवंबर 20262 मिनट2 स्रोत4 प्रश्नखबर 29 / 77

प्रिलिम्स के लिए: स्वतः संज्ञान, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP), 6 नवंबर 2026 को AQI, पराली जलाने का योगदान (5 नवंबर), दिल्ली में सबसे खराब AQI वाला स्थान, अगली सुनवाई की तारीख, सर्वोच्च न्यायालय की पीठ, नोडल निकाय

मेन्स के लिए: वाहनों का उत्सर्जन, पराली जलाना, AQI, नियामक ढांचा, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), गरीबों पर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

स्रोत:The HinduThe HinduHindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने वाहनों के उत्सर्जन को प्रमुख कारण माना है और अल्पकालिक, मध्यकालिक तथा दीर्घकालिक उपायों की मांग की है। AQI 400 के करीब पहुंचने और पराली जलाने से 14% प्रदूषण होने की बात सामने आने पर अदालत ने बम्पर-टू-बम्पर ट्रैफिक से निपटने और किसानों को खेत में आग लगाने के विकल्पों के बारे में शिक्षित करने पर ज़ोर दिया।

सारांश

  • भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने नियामक ढांचे से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले में वाहनों के उत्सर्जन को दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया।
  • अदालत ने दिल्ली को गाज़ियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम और फरीदाबाद से जोड़ने वाली सड़कों पर बम्पर-टू-बम्पर ट्रैफिक को एक मुख्य समस्या के रूप में रेखांकित किया।
  • 6 नवंबर 2026 को दिल्ली का समग्र AQI 391 (बहुत खराब) दर्ज किया गया। 59 में से 30 निगरानी केंद्रों पर स्तर 'गंभीर' रहा। रोहिणी में सबसे खराब AQI 475 दर्ज हुआ।

मुख्य बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने वाहनों के उत्सर्जन को प्रमुख प्रदूषक बताया

    स्वतः संज्ञान मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने वाहनों के उत्सर्जन को दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण का मुख्य कारण बताया और जोड़ने वाली सड़कों पर बम्पर-टू-बम्पर ट्रैफिक का हवाला दिया।

  • AQI 'गंभीर' श्रेणी के करीब

    6 नवंबर 2026 को दिल्ली का समग्र AQI 391 रहा, जबकि रोहिणी में सबसे खराब 475 दर्ज हुआ। 59 में से 30 केंद्रों पर वायु गुणवत्ता 'गंभीर' बताई गई।

  • पराली जलाने से 14% प्रदूषण

    अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने अदालत को बताया कि 5 नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का हिस्सा 14% था, जिसके बाद पीठ ने किसानों को मशीनी विकल्पों के बारे में शिक्षित करने पर ज़ोर दिया।

पृष्ठभूमि

सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे की जांच करने वाले स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा है। वाहनों का उत्सर्जन, पराली जलाना, निर्माण की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन मिलकर इस क्षेत्र में हर साल सर्दियों में संकट पैदा करते हैं। अदालत पहले भी GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के लागू होने और अन्य उपायों पर हस्तक्षेप कर चुकी है।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

वाहनों के उत्सर्जन को 'बड़ी समस्या' मानकर अदालत का ध्यान अब पराली जलाने से हटकर इस ओर गया है। AQI 400 के करीब पहुंचने पर पीठ ने उन गरीबों की दुर्दशा की ओर ध्यान दिलाया, जो इस प्रदूषण से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। ASG ने PUC प्रमाणपत्रों की जियो-टैगिंग और स्पष्ट रूप से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई सहित उपाय गिनाए। अदालत की यह टिप्पणी कि त्योहार का समय ही गरीबों की कमाई का एकमात्र समय है, प्रदूषण की बहस में सामाजिक-आर्थिक पहलू भी जोड़ती है।

आगे की राह

अदालत 16 नवंबर 2026 को आदेश देगी और याचिका पर सुनवाई करेगी। तत्काल उपायों में वाहनों के प्रवेश प्रतिबंधों का सख्त पालन, AQI एक सीमा पार करने पर बच्चों के लिए हाइब्रिड स्कूलिंग को बढ़ावा और पराली प्रबंधन के लिए किसानों तक व्यापक पहुंच शामिल हो सकती है। दीर्घकालिक समाधान के लिए NCR में ट्रैफिक जाम घटाने हेतु एकीकृत शहरी नियोजन ज़रूरी है।

दिल्ली से जुड़ाव

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पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

स्वतः संज्ञान
किसी अदालत की वह शक्ति कि वह बिना किसी पक्ष की याचिका के, अपनी ओर से किसी मामले का संज्ञान ले।
ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP)
AQI स्तर के आधार पर दिल्ली-NCR के लिए आपातकालीन उपायों का एक ढांचा; इसे शुरुआत में पर्यावरण प्रदूषण (निवारण एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (EPCA) ने तैयार किया था और वर्तमान में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) इसे लागू करता है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस आंकड़े पर ध्यान दें: 6 नवंबर 2026 को दिल्ली का समग्र AQI 391 (बहुत खराब); सबसे खराब केंद्र: रोहिणी (475)
  • इस आंकड़े पर ध्यान दें: 5 नवंबर 2026 को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 14%
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: भारत का सर्वोच्च न्यायालय (वायु प्रदूषण के नियामक ढांचे पर स्वतः संज्ञान मामला)

यह गलती न करें!

परीक्षक सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पहचाने गए 'प्रमुख योगदानकर्ता' (वाहनों का उत्सर्जन) को पराली जलाने से भ्रमित कर सकते हैं, या अलग-अलग स्थानों के AQI मान (जैसे 391 बनाम 475) आपस में बदल सकते हैं। वे पीठ की संरचना या अगली सुनवाई की तारीख के बारे में भी पूछ सकते हैं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • वाहनों का उत्सर्जन, पराली जलाना, AQI, नियामक ढांचा, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), गरीबों पर सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1मध्यम

    दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को लागू करने की मुख्य ज़िम्मेदारी किस निकाय की है?

  2. Q2कठिन

    निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.सर्वोच्च न्यायालय ने वाहनों के उत्सर्जन को दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया।
    2. 2.ASG ने अदालत को बताया कि 5 नवंबर 2026 को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का हिस्सा 24% था।
    3. 3.पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    समाचार के अनुसार 6 नवंबर 2026 को दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) क्या था?

  4. Q4मध्यम

    वायु प्रदूषण का गरीबों पर प्रभाव को लेकर सर्वोच्च न्यायालय की मुख्य चिंता क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण का प्रमुख योगदानकर्ता किसे बताया?

सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण वाहनों के उत्सर्जन को बताया।

2. 6 नवंबर 2026 को दिल्ली का समग्र AQI क्या था?

6 नवंबर 2026 को दिल्ली का समग्र AQI 391 था, जिसे 'बहुत खराब' श्रेणी में रखा गया।

3. वायु प्रदूषण के मामले की सुनवाई किस सर्वोच्च न्यायालय पीठ ने की?

पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे।

4. इस मामले की अगली सुनवाई कब है?

अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को निर्धारित है।

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  • नोडल निकाय: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM)
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