पर्यावरण

उत्तराखंड में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 100 हेक्टेयर में बांस लगाने की योजना, मिट्टी कटाव रोकने और हरित क्रैश बैरियर के रूप में

6 नवंबर 20263 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 19 / 52

प्रिलिम्स के लिए: मृदा अपरदन, क्रैश बैरियर, राष्ट्रीय बांस मिशन (NBM), नोडल निकाय, सहयोगी एजेंसियां, लक्ष्य क्षेत्र (चरण 1), लक्ष्य मार्ग, उल्लेखित बांस प्रजाति

मेन्स के लिए: हरित बुनियादी ढांचा, प्रकृति-आधारित समाधान (NbS), पारिस्थितिकी इंजीनियरिंग, टिकाऊ सड़क सुरक्षा, आजीविका विविधीकरण

स्रोत:Dainik BhaskarDainik Bhaskar

चर्चा में क्यों?

उत्तराखंड चारधाम ऑलवेदर रोड समेत पहाड़ी राजमार्गों के किनारे 100 हेक्टेयर में बांस लगाने की योजना बना रहा है, ताकि मिट्टी का कटाव रुके और यह प्राकृतिक क्रैश बैरियर का काम करे। उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद यह परियोजना NHAI और PWD के साथ मिलकर चलाएगी। इससे स्थानीय आजीविका को भी बढ़ावा देने और सड़क चौड़ीकरण से खोई हरियाली लौटाने का लक्ष्य है।

सारांश

  • पहले चरण में उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद ने ऋषिकेश-बदरीनाथ मार्ग समेत राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 100 हेक्टेयर में बांस रोपण की योजना बनाई है।
  • बांस की रेशेदार जड़ें भूमिगत जाल बनाकर कटी ढलानों की मिट्टी बांधती हैं और भूस्खलन रोकती हैं; 2 से 4 वर्षों में नतीजे मिलने की उम्मीद है।
  • तीखे मोड़ों पर परिपक्व बांस के झुरमुट प्राकृतिक क्रैश बैरियर का काम कर सकते हैं, वाहनों की गति घटाकर उन्हें खाई में गिरने से रोक सकते हैं। FRI और IIT रुड़की के साथ प्रायोगिक परियोजना की योजना है।

मुख्य बातें

  • मिट्टी कटाव नियंत्रण

    खुली पहाड़ी ढलानों पर बांस की रेशेदार जड़ें मिट्टी बांधती हैं, जिससे बारिश में भूस्खलन और कटाव रुकता है।

  • प्राकृतिक क्रैश बैरियर

    तीखे मोड़ों पर परिपक्व बांस के झुरमुट अनियंत्रित वाहनों की गति घटाकर उन्हें रोक सकते हैं, यह इस्पात के बैरियर का पर्यावरण-अनुकूल विकल्प हो सकता है।

  • आजीविका का अवसर

    बांस की कटाई और उत्पाद निर्माण से स्थानीय रोजगार बढ़ सकता है और गांव के उद्योगों को सहारा मिल सकता है।

आगे की राह

बजट प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजे गए हैं; अगले वित्तीय वर्ष में नेशनल बांस मिशन से सहायता मिलने की उम्मीद है। दिसंबर-जनवरी से मिट्टी की तैयारी का काम शुरू हो सकता है। यदि 100 हेक्टेयर का पायलट सफल रहा, तो इस मॉडल को उत्तराखंड के राज्य राजमार्गों और अन्य पर्वतीय सड़कों तक बढ़ाया जा सकता है।

बांस बनाम इस्पात क्रैश बैरियर

विशेषताइस्पात बैरियरबांस बैरियर
सामग्रीइस्पातभीमा बांस (बेंबूसा बालकोआ)
पर्यावरण-अनुकूलताकम (निर्माण से उत्सर्जन)अधिक (प्राकृतिक, कार्बन अवशोषित करने वाला)
मृदा अपरदन नियंत्रणकोई नहींजड़ें मिट्टी बांधती हैं
टक्कर का झटका सोखनाकठोर, टूट सकता हैलचीला, ऊर्जा सोखता है

उत्तराखंड से जुड़ाव

उत्तराखंड की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:UKPSC 8/10UKSSSC 7/10

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

मृदा अपरदन
पानी और हवा जैसी प्राकृतिक शक्तियों से मिट्टी की ऊपरी परत का हटना, जो पहाड़ी इलाकों में वनों की कटाई और सड़क निर्माण से तेज़ हो जाता है।
क्रैश बैरियर
सड़क किनारे लगाया गया सुरक्षा अवरोध, जो मोड़ों, पुलों और गहरी ढलानों पर वाहनों को सड़क से बाहर जाने से रोकता है।
राष्ट्रीय बांस मिशन (NBM)
कृषि मंत्रालय के तहत केंद्र प्रायोजित योजना, जो आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ के लिए भारत में बांस की खेती और प्रसंस्करण को बढ़ावा देती है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस डेटा पर ध्यान दें: चरण 1 में 100 हेक्टेयर बांस रोपण
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद
  • इस डेटा पर ध्यान दें: क्रैश बैरियर के लिए भीमा बांस (बेंबूसा बालकोआ)

यह गलती न करें!

छात्र नोडल निकाय को राष्ट्रीय बांस मिशन (NBM) या वन विभाग से भ्रमित कर सकते हैं; मुख्य एजेंसी उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद है, जो NHAI और PWD के साथ समन्वय करती है।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • हरित बुनियादी ढांचा, प्रकृति-आधारित समाधान (NbS), पारिस्थितिकी इंजीनियरिंग, टिकाऊ सड़क सुरक्षा, आजीविका विविधीकरण

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    उत्तराखंड के पहाड़ी राजमार्गों पर बांस रोपण परियोजना का समन्वय करने वाली मुख्य एजेंसी कौन-सी है?

  2. Q2कठिन

    उत्तराखंड में बांस रोपण परियोजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.परियोजना का लक्ष्य पहले चरण में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे 100 हेक्टेयर भूमि पर बांस लगाना है।
    2. 2.बांस की जड़ें मूसला जड़ें हैं और मिट्टी बांधने में मदद नहीं करतीं।
    3. 3.भीमा बांस (बेंबूसा बालकोआ) का उल्लेख इसकी तन्यता क्षमता के कारण क्रैश बैरियर के लिए किया गया है।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    उत्तराखंड के पहाड़ी राजमार्ग परियोजना के पहले चरण में बांस रोपण का लक्ष्य क्षेत्र कितना है?

  4. Q4मध्यम

    उत्तराखंड में पहाड़ी सड़कों पर बांस लगाने का मुख्य पर्यावरणीय उद्देश्य क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. उत्तराखंड की पहाड़ी सड़कों पर बांस लगाने का उद्देश्य क्या है?

बांस रोपण का उद्देश्य रेशेदार जड़ों से मिट्टी बांधकर मृदा अपरदन और भूस्खलन रोकना है, और तीखे मोड़ों पर वाहनों के लिए प्राकृतिक क्रैश बैरियर का काम करना है।

2. उत्तराखंड के राजमार्गों पर बांस रोपण परियोजना का नेतृत्व कौन-सी एजेंसी कर रही है?

उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद मुख्य एजेंसी है, जो NHAI, PWD और वन विभाग के साथ समन्वय करती है।

3. पहले चरण में बांस रोपण के लिए कितने क्षेत्र का लक्ष्य रखा गया है?

पहले चरण में ऋषिकेश-बदरीनाथ मार्ग समेत राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे लगभग 100 हेक्टेयर भूमि का लक्ष्य है।

4. क्रैश बैरियर के लिए किस बांस प्रजाति का उल्लेख किया गया है?

भीमा बांस (बेंबूसा बालकोआ) अपनी उच्च तन्यता और लचीलेपन के लिए उल्लेखित है, जो वाहन के टकराव का झटका सोखने के लिए उपयुक्त है।

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