प्रिलिम्स के लिए: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 129, न्यायालय की अवमानना, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, अवमानना से जुड़ा संवैधानिक अनुच्छेद, पोस्ट की तारीख, मुख्य न्यायाधीश का नाम, प्रतिवादी निकाय, वर्तमान संदर्भ
मेन्स के लिए: न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायालय की अवमानना, अनुच्छेद 129, संवैधानिक गारंटी
स्रोत:The Hindu
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को अपनी अवमानना पर दंड देने की शक्ति देता है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने 6 नवंबर 2026 को KPCC पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया।
- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को निशाना बनाने वाली सोशल मीडिया पोस्ट 12 अक्टूबर 2026 को की गई थी।
- KPCC अध्यक्ष सनी जोसेफ ने पोस्ट के लिए माफी मांगी और इसे अनधिकृत बताया।
- संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत सर्वोच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय है।
चर्चा में क्यों?
सर्वोच्च न्यायालय ने केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के सभी पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को निशाना बनाने वाली एक सोशल मीडिया पोस्ट पर दायर अवमानना याचिका के आधार पर है। न्यायालय ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता एक संवैधानिक गारंटी है, और न्यायिक अधिकार को कमज़ोर करने की कोशिशों से संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत सख्ती से निपटा जाएगा।
सारांश
- सर्वोच्च न्यायालय ने KPCC पदाधिकारियों से पूछा है कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को निशाना बनाने वाली सोशल मीडिया पोस्ट के लिए संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू न की जाए।
- यह पोस्ट कांग्रेस की केरल इकाई के आधिकारिक X अकाउंट से की गई थी। बाद में इसे हटा दिया गया, और KPCC अध्यक्ष सनी जोसेफ ने माफी मांगी और इसे एक व्यक्ति का कृत्य बताया।
- न्यायालय ने टिप्पणी की कि न्यायिक संयम कमज़ोरी नहीं है, और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता न्याय प्रशासन को धमकाने या उसमें दखल देने की ढाल नहीं बन सकती।
मुख्य बातें
अनुच्छेद 129 के तहत अवमानना नोटिस
सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 129 के तहत KPCC पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया। यह अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय को अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति देता है।
मुख्य न्यायाधीश के विरुद्ध सोशल मीडिया पोस्ट
12 अक्टूबर को कांग्रेस की केरल इकाई के X अकाउंट की एक पोस्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर इस्तीफा देने को कहा गया था।
न्यायिक स्वतंत्रता पर न्यायालय की टिप्पणी
न्यायालय ने कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता एक संवैधानिक गारंटी है और इसे राजनीतिक बयानों से कमज़ोर नहीं किया जा सकता।
पृष्ठभूमि
12 अक्टूबर 2026 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की केरल इकाई के आधिकारिक X अकाउंट से मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को निशाना बनाते हुए पोस्ट की गई। उसमें लिखा था, 'प्रिय सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था आपका विषय नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दीजिए। हम ऐसा विकल्प ढूंढ लेंगे जो इसे संभाल सके।' बाद में पोस्ट हटा दी गई, और KPCC अध्यक्ष सनी जोसेफ ने माफी मांगते हुए इसे अनधिकृत बताया। अधिवक्ता विनीत जिंदल ने अवमानना याचिका दायर की, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने रिट याचिका दर्ज की।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
यह मामला न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा करने वाले संवैधानिक ढांचे को सामने लाता है। संविधान का अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय बनाता है और उसे अपनी अवमानना पर दंड देने का अधिकार देता है। न्यायालय की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि फैसलों की आलोचना हो सकती है, लेकिन न्यायाधीशों पर व्यक्तिगत हमले या न्यायिक कार्य को प्रभावित करने के लिए धमकी देना अवमानना का मामला बन सकता है। किसी राजनीतिक दल के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट की भूमिका से राजनीतिक अभिव्यक्ति की सीमाओं और पदाधिकारियों की ज़िम्मेदारी पर सवाल उठते हैं।
आगे की राह
न्यायालय ने KPCC पदाधिकारियों से पूछा है कि अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। उसने एमिकस क्यूरी नियुक्त करने और भारत के महान्यायवादी की सहायता लेने के संकेत दिए हैं। इस मामले का नतीजा इस बात की मिसाल बनेगा कि राजनीतिक दल अवमानना की सीमा पार किए बिना न्यायपालिका की आलोचना किस हद तक कर सकते हैं।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 129
- यह सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय घोषित करता है और उसे अपनी अवमानना पर दंड देने की शक्ति देता है, जिसमें दीवानी और फौजदारी दोनों तरह की अवमानना शामिल हैं।
- न्यायालय की अवमानना
- न्यायालय की अवमानना वह कोई भी कार्य है जो न्याय प्रशासन में बाधा डालता है या न्यायालय की प्रतिष्ठा को गिराता है। इसके दो प्रकार हैं: दीवानी अवमानना (न्यायालय के आदेश की जानबूझकर अवज्ञा) और फौजदारी अवमानना (न्यायालय की छवि बिगाड़ना या न्यायिक कार्यवाही में दखल देना)।
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता
- भारतीय संविधान की एक मूल विशेषता, जो सुनिश्चित करती है कि न्यायपालिका कार्यपालिका या विधायिका के दखल के बिना काम करे। इसमें कार्यकाल की सुरक्षा, निश्चित सेवा शर्तें और अवमानना पर दंड देने की शक्ति शामिल है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस तथ्य पर ध्यान दें: संविधान का अनुच्छेद 129, सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना पर दंड देने की शक्ति
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: भारत का सर्वोच्च न्यायालय
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: अनुच्छेद 129, न्यायालय की अवमानना
यह गलती न करें!
परीक्षक अनुच्छेद 129 (सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना शक्ति) को अनुच्छेद 215 (उच्च न्यायालय की अवमानना शक्ति) से भ्रमित कर सकते हैं, या दीवानी और फौजदारी अवमानना के अंतर पर प्रश्न पूछ सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायालय की अवमानना, अनुच्छेद 129, संवैधानिक गारंटी
कहीं अटके? एक टैप में समझें
सर्वोच्च न्यायालय को उस हर व्यक्ति को दंडित करने की शक्ति है जो न्याय प्रशासन में दखल देता है या उसका अधिकार गिराता है। यह शक्ति संविधान का अनुच्छेद 129 देता है। कांग्रेस की केरल इकाई की X पर पोस्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश से इस्तीफा मांगा गया था। न्यायालय ने अब पार्टी के पदाधिकारियों से पूछा है कि अवमानना के लिए उन्हें दंडित क्यों न किया जाए।
- अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को अपनी अवमानना पर दंड देने की शक्ति देता है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने 6 नवंबर 2026 को KPCC पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया।
- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को निशाना बनाने वाली सोशल मीडिया पोस्ट 12 अक्टूबर 2026 को की गई थी।
- KPCC अध्यक्ष सनी जोसेफ ने पोस्ट के लिए माफी मांगी और इसे अनधिकृत बताया।
- संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत सर्वोच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय है।
- राजव्यवस्था: सर्वोच्च न्यायालय और न्यायालय की अवमानना
- राजव्यवस्था: न्यायपालिका की स्वतंत्रता
जुड़ी अवधारणाएँ: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 129, न्यायालय की अवमानना, न्यायपालिका की स्वतंत्रता
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद सर्वोच्च न्यायालय को अपनी अवमानना पर दंड देने की शक्ति देता है?
व्याख्या: अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय घोषित करता है और उसे अपनी अवमानना पर दंड देने की शक्ति देता है। अनुच्छेद 124 सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना से, अनुच्छेद 142 उसके आदेशों के प्रवर्तन से और अनुच्छेद 215 उच्च न्यायालयों को अवमानना शक्ति से संबंधित है।
- Q2कठिन
न्यायालय की अवमानना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.सर्वोच्च न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत अपनी अवमानना पर दंड दे सकता है।
- 2.किसी राजनीतिक दल के आधिकारिक अकाउंट से मुख्य न्यायाधीश को निशाना बनाने वाली पोस्ट को बाद में हटा देने से वह अवमानना नहीं मानी जा सकती।
- 3.न्यायपालिका की स्वतंत्रता मूल संरचना सिद्धांत के तहत एक संवैधानिक गारंटी है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है, क्योंकि अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को अवमानना की शक्ति देता है। कथन 2 गलत है, क्योंकि पोस्ट हटा देने से किया गया कृत्य समाप्त नहीं हो जाता; अवमानना फिर भी बन सकती है। कथन 3 सही है, क्योंकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है।
- Q3मध्यम
कांग्रेस की केरल इकाई के अकाउंट से मुख्य न्यायाधीश को निशाना बनाने वाली सोशल मीडिया पोस्ट किस तारीख को की गई थी?
व्याख्या: हटाई गई पोस्ट 12 अक्टूबर 2026 को दिखाई दी थी।
- Q4मध्यम
सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना पर दंड देने की शक्ति के पीछे प्राथमिक संवैधानिक तर्क क्या है?
व्याख्या: अवमानना की शक्ति न्याय प्रशासन और न्यायालय के अधिकार की रक्षा के लिए है, न कि व्यक्तिगत न्यायाधीशों के लिए। यह सुनिश्चित करती है कि लोग न्यायिक कार्य में दखल न दें या उसे कमज़ोर न करें। न्यायाधीशों की गंभीर व्यक्तिगत आलोचना अवमानना बन सकती है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य व्यक्तिगत नहीं, संस्थागत है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 129 क्या है?
अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय घोषित करता है और उसे अपनी अवमानना पर दंड देने की शक्ति देता है, जिसमें दीवानी और फौजदारी दोनों अवमानना शामिल हैं।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने KPCC पदाधिकारियों को नोटिस क्यों जारी किया?
नोटिस कांग्रेस की केरल इकाई के X अकाउंट की उस सोशल मीडिया पोस्ट पर दायर अवमानना याचिका के आधार पर जारी हुआ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को इस्तीफा देने को कहा गया था।
3. वर्तमान में भारत के मुख्य न्यायाधीश कौन हैं?
वर्तमान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत हैं।
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मूल खबर6 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
