प्रिलिम्स के लिए: वन सलाहकार समिति (FAC), प्रारंभिक वन मंजूरी, रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजना, प्रतिपूरक वनीकरण, परियोजना का नाम, क्षमता, नदी, स्थान
मेन्स के लिए: जलविद्युत बनाम पारिस्थितिक संवेदनशीलता, वन (संरक्षण) अधिनियम के तहत मंजूरी की प्रक्रिया, राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा-पार नदियाँ (ब्रह्मपुत्र/चीन का पहलू), आदिवासी अधिकार और विस्थापन
स्रोत:Indian Express
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- नयिंग जलविद्युत परियोजना की क्षमता: 1,000 मेगावाट।
- परियोजना नदी: अरुणाचल प्रदेश में सियांग की सहायक नदी सियोम।
- परियोजना प्रस्तावक: नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NEEPCO)।
- अनुमानित परियोजना लागत: ₹10,369 करोड़।
- उपयोग बदली जाने वाली वन भूमि: 470.8 हेक्टेयर; प्रभावित पेड़: लगभग 1,04,036।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (FAC) ने अरुणाचल प्रदेश में सियांग की सहायक नदी सियोम पर 1,000 मेगावाट की नयिंग जलविद्युत परियोजना के लिए प्रारंभिक वन मंजूरी की सिफारिश की है। यह सिफारिश सियांग अपर के 11,200 मेगावाट के बड़े प्रोजेक्ट के विरोध के बीच आई है। यह पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील ब्रह्मपुत्र घाटी में भारत की ऊर्जा ज़रूरतों और पर्यावरण व सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच टकराव को सामने लाती है।
सारांश
- वन सलाहकार समिति (FAC) ने अरुणाचल प्रदेश में सियोम नदी पर NEEPCO द्वारा प्रस्तावित 1,000 मेगावाट की नयिंग जलविद्युत परियोजना के लिए प्रारंभिक वन मंजूरी की सिफारिश की है।
- इस परियोजना में 470.8 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग बदला जाएगा और अनुमानित 1,04,036 पेड़ प्रभावित होंगे। बदले में 942 हेक्टेयर में प्रतिपूरक वनीकरण अनिवार्य किया गया है।
- यह सियांग नदी घाटी में प्रस्तावित चार परियोजनाओं में से एक है, जबकि 11,200 मेगावाट की बड़ी अपर सियांग बहुउद्देशीय परियोजना को आदि समुदाय के सांस्कृतिक और आजीविका संबंधी कारणों से स्थानीय स्तर पर तीखे विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्य बातें
वन मंजूरी की सिफारिश
FAC ने 1,000 मेगावाट की नयिंग परियोजना के लिए प्रारंभिक वन मंजूरी की सिफारिश की है। इसमें 470.8 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग बदला जाएगा और 1 लाख से अधिक पेड़ प्रभावित होंगे।
ऊर्जा बनाम पारिस्थितिकी का टकराव
यह परियोजना सियांग घाटी में भारत के जलविद्युत विस्तार का हिस्सा है, लेकिन पारिस्थितिक प्रभाव को लेकर इस पर सवाल उठ रहे हैं। इसी समय बड़ी सियांग अपर परियोजना के खिलाफ स्थानीय स्तर पर मज़बूत विरोध भी चल रहा है।
सामरिक आयाम
राज्य सरकार सियांग अपर परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़रूरत बताती है, ताकि ब्रह्मपुत्र पर चीन के प्रस्तावित ऊपरी प्रवाह बांध का मुकाबला किया जा सके।
पृष्ठभूमि
नयिंग जलविद्युत परियोजना अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी घाटी में प्रस्तावित कई बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक है, जो ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली का हिस्सा है। यह क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से नाज़ुक और भूकंप-प्रवण है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन वैधानिक निकाय वन सलाहकार समिति (FAC) गैर-वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि के उपयोग में बदलाव के प्रस्तावों की जांच करती है। अंतिम मंजूरी से पहले उसकी प्रारंभिक मंजूरी एक अहम कदम है।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
FAC की सिफारिश भारत की जलविद्युत महत्वाकांक्षाओं और पर्यावरण संरक्षण के बीच चल रहे टकराव को दिखाती है। इस परियोजना में 'उच्च संरक्षण मूल्य' वाले क्षेत्र की 470.8 हेक्टेयर अवर्गीकृत वन भूमि का उपयोग बदला जाएगा और लगभग 1,04,036 पेड़ प्रभावित होंगे। इसके बदले दोगुने क्षेत्र में प्रतिपूरक वनीकरण अनिवार्य किया गया है। सियांग घाटी के संचयी प्रभाव आकलन ने डिज़ाइन में बदलाव की भी सिफारिश की है, जिसमें टाटो-II और नयिंग के बीच कम से कम 1 किलोमीटर का मुक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए पूर्ण जलाशय स्तर घटाना शामिल है। इसी बीच 11,200 मेगावाट की अपर सियांग परियोजना का स्थानीय विरोध तेज़ हो रहा है, और आदि समुदाय सांस्कृतिक व आजीविका के खतरे का हवाला दे रहा है।
सामरिक और सुरक्षा पहलू
राज्य सरकार ने बड़ी सियांग अपर परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकता बताया है, ताकि ब्रह्मपुत्र पर ऊपरी प्रवाह में चीन के बुनियादी ढांचा विकास का जवाब दिया जा सके। इससे पर्यावरणीय बहस में एक भू-राजनीतिक आयाम जुड़ गया है, क्योंकि भारत तिब्बत में चीनी बांध निर्माण के सामने अपनी ऊर्जा ज़रूरतों और जल सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहता है।
आगे की राह
प्रारंभिक मंजूरी अंतिम मंजूरी नहीं है। परियोजना प्रस्तावक (NEEPCO) को अब FAC द्वारा तय शर्तें पूरी करनी होंगी, जिनमें सटी हुई भूमि पर प्रतिपूरक वनीकरण और संभावित डिज़ाइन संशोधन शामिल हैं। अंतिम वन मंजूरी के लिए राज्य सरकार की स्वीकृति और आगे की जांच भी ज़रूरी होगी। सियांग घाटी की जलविद्युत क्षमता बनाम उसकी पारिस्थितिक और सामाजिक लागत पर बहस जारी रहेगी, खासकर स्थानीय विरोध को देखते हुए।
सियांग घाटी की जलविद्युत परियोजनाएँ
| परियोजना | क्षमता (मेगावाट) | नदी | स्थिति |
|---|---|---|---|
| अपर सियांग बहुउद्देशीय परियोजना | 11,200 | सियांग | पूर्व-व्यवहार्यता; विरोध का सामना |
| नयिंग जलविद्युत परियोजना | 1,000 | सियोम | प्रारंभिक वन मंजूरी |
| लोअर सियांग | 2,700 | सियांग | प्रस्तावित |
| टाटो-II | 700 | सियोम | CCEA द्वारा स्वीकृत (अगस्त 2025) |
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- वन सलाहकार समिति (FAC)
- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक समिति, जो वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के अनुसार गैर-वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि के उपयोग में बदलाव पर सरकार को सलाह देती है।
- प्रारंभिक वन मंजूरी
- वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत एक प्रारंभिक मंजूरी, जो संकेत देती है कि सरकार परियोजना प्रस्तावक द्वारा कुछ शर्तें पूरी करने की स्थिति में वन भूमि के उपयोग में बदलाव के लिए सहमत है।
- रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजना
- जलविद्युत परियोजना का एक प्रकार, जिसमें बड़े जलाशय की ज़रूरत नहीं होती। यह नदी के प्राकृतिक प्रवाह से बिजली बनाती है और इसमें पानी का भंडारण न्यूनतम होता है।
- प्रतिपूरक वनीकरण
- किसी विकास परियोजना से वन आवरण के नुकसान की भरपाई के लिए किसी वैकल्पिक भूमि पर पेड़ लगाने की प्रक्रिया, जो अक्सर वन (संरक्षण) अधिनियम के तहत अनिवार्य होती है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: 1,000 मेगावाट क्षमता; ₹10,369 करोड़ लागत; 470.8 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग बदला गया; 1,04,036 पेड़ प्रभावित।
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (वन सलाहकार समिति के माध्यम से)।
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 (इसी अधिनियम के तहत प्रारंभिक मंजूरी)।
यह गलती न करें!
परीक्षक नयिंग परियोजना (1,000 मेगावाट) को बड़ी अपर सियांग परियोजना (11,200 मेगावाट) या टाटो-II परियोजना (700 मेगावाट) के साथ भ्रमित कर सकते हैं। नदी के संबंध में भी प्रश्न आ सकता है: सियोम, सियांग की सहायक नदी है, और अरुणाचल प्रदेश में सियांग ही ब्रह्मपुत्र का नाम है। सियोम को सियांग या मुख्य ब्रह्मपुत्र से न मिलाएं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- जलविद्युत बनाम पारिस्थितिक संवेदनशीलता, वन (संरक्षण) अधिनियम के तहत मंजूरी की प्रक्रिया, राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा-पार नदियाँ (ब्रह्मपुत्र/चीन का पहलू), आदिवासी अधिकार और विस्थापन
कहीं अटके? एक टैप में समझें
वन सलाहकार समिति (FAC) ने अरुणाचल प्रदेश में सियोम नदी पर 1,000 मेगावाट की नयिंग जलविद्युत परियोजना को प्रारंभिक हरी झंडी दी है। इसका मतलब है कि परियोजना आगे बढ़ सकती है, लेकिन उसे कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी, जैसे उपयोग की गई वन भूमि के दोगुने क्षेत्र में पेड़ लगाना। यह परियोजना इस क्षेत्र में बांध बनाने की भारत की योजना का हिस्सा है, जिसका कुछ स्थानीय लोग सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चिंताओं के कारण विरोध कर रहे हैं।
- नयिंग जलविद्युत परियोजना की क्षमता: 1,000 मेगावाट।
- परियोजना नदी: अरुणाचल प्रदेश में सियांग की सहायक नदी सियोम।
- परियोजना प्रस्तावक: नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NEEPCO)।
- अनुमानित परियोजना लागत: ₹10,369 करोड़।
- उपयोग बदली जाने वाली वन भूमि: 470.8 हेक्टेयर; प्रभावित पेड़: लगभग 1,04,036।
- पर्यावरण: वन संरक्षण और पर्यावरणीय मंजूरी
- भूगोल: ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली और जलविद्युत
जुड़ी अवधारणाएँ: वन सलाहकार समिति (FAC), प्रारंभिक वन मंजूरी, रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजना, प्रतिपूरक वनीकरण
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की किस समिति ने नयिंग जलविद्युत परियोजना के लिए प्रारंभिक वन मंजूरी की सिफारिश की?
व्याख्या: वन सलाहकार समिति (FAC) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है, जो वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत गैर-वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि के उपयोग में बदलाव पर सलाह देती है। अन्य निकायों के पास यह विशिष्ट अधिकार नहीं है।
- Q2कठिन
नयिंग जलविद्युत परियोजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.यह अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी की सहायक नदी सियोम पर प्रस्तावित 1,000 मेगावाट की रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है।
- 2.परियोजना प्रस्तावक नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) है और अनुमानित लागत ₹15,000 करोड़ है।
- 3.वन सलाहकार समिति ने सिफारिश की है कि उपयोग बदली गई वन भूमि के दोगुने क्षेत्र में प्रतिपूरक वनीकरण किया जाए।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: परियोजना 1,000 मेगावाट की रन-ऑफ-द-रिवर है और सियोम नदी पर है। कथन 2 गलत है: परियोजना प्रस्तावक NEEPCO है, NHPC नहीं, और लागत ₹10,369 करोड़ है, ₹15,000 करोड़ नहीं। कथन 3 सही है: FAC ने 942 हेक्टेयर में प्रतिपूरक वनीकरण अनिवार्य किया है, जो उपयोग बदली गई 470.8 हेक्टेयर भूमि का दोगुना है। अतः विकल्प C सही है।
- Q3मध्यम
नयिंग जलविद्युत परियोजना से प्रभावित होने वाले पेड़ों की अनुमानित संख्या कितनी है?
व्याख्या: FAC ने कहा है कि परियोजना से लगभग 1,04,036 पेड़ प्रभावित होंगे। 50,000 और 75,000 कम अनुमान हैं, जबकि 1,50,000 अधिक अनुमान है। समाचार के अनुसार सही आंकड़ा लगभग 1,04,000 है।
- Q4मध्यम
स्थानीय विरोध के बावजूद अरुणाचल प्रदेश सरकार ने बड़ी सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना को आगे बढ़ाने का मुख्य कारण क्या बताया है?
व्याख्या: सरकार का कहना है कि सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना चीन के प्रस्तावित ऊपरी प्रवाह बांध का मुकाबला करने के लिए ज़रूरी है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है। विरोध के बावजूद राजस्व, सिंचाई और पर्यटन को परियोजना आगे बढ़ाने के घोषित मुख्य कारण नहीं बताए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. नयिंग जलविद्युत परियोजना की क्षमता कितनी है?
नयिंग जलविद्युत परियोजना की प्रस्तावित क्षमता 1,000 मेगावाट है।
2. नयिंग जलविद्युत परियोजना किस नदी पर प्रस्तावित है?
परियोजना अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी की प्रमुख सहायक नदी सियोम पर प्रस्तावित है।
3. नयिंग जलविद्युत परियोजना का परियोजना प्रस्तावक कौन है?
परियोजना प्रस्तावक नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NEEPCO) है।
4. नयिंग परियोजना के लिए कितनी वन भूमि का उपयोग बदला जाएगा?
परियोजना से 470.8 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग बदला जाएगा और लगभग 1,04,036 पेड़ प्रभावित होंगे।
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मूल खबर6 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें

