पर्यावरण

हिमाचल के पारंपरिक कठ-कुनी घर बनाम कंक्रीट: भूकंपीय सुरक्षा, पर्यावरणीय प्रभाव और नीतिगत कमियां

6 नवंबर 20263 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 11 / 93

प्रिलिम्स के लिए: भारत के भूकंपीय क्षेत्र, कठ-कुनी वास्तुकला, धज्जी-देवारी, वन संरक्षण अधिनियम, 1980, प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY), हिमाचल में होटल वृद्धि (2016-2025), हिमाचल में होमस्टे वृद्धि (2016-2025), बिना खर्च वाला वृक्षारोपण कोष (2021-2026)

मेन्स के लिए: पारंपरिक वास्तुकला की भूकंपीय सहनशीलता; वन संरक्षण अधिनियम और लकड़ी के अधिकार; नाज़ुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में शहरीकरण; PMAY और आवास नीति का पूर्वाग्रह

स्रोत:Indian ExpressIndian Express

चर्चा में क्यों?

हिमाचल में कठ-कुनी, धज्जी-देवारी और मिट्टी के पारंपरिक घरों की जगह कंक्रीट की इमारतें बढ़ने से भूकंप का खतरा और भूस्खलन का जोखिम बढ़ा है। खबर बताती है कि राष्ट्रीय भवन संहिता, PWD के नियम, बैंक के मानदंड और PMAY के दिशानिर्देश कंक्रीट को तरजीह देते हैं, जबकि भूकंप-रोधी पारंपरिक वास्तुकला को न मान्यता मिलती है, न बीमा, और उसे 'कच्चा' कहकर कमतर आंका जाता है।

सारांश

  • पारंपरिक हिमाचली घर (कठ-कुनी, धज्जी-देवारी, मिट्टी की ईंट, रैम्ड अर्थ) स्वाभाविक रूप से भूकंप-रोधी और तापीय रूप से कुशल होते हैं। तीखी ढलानों पर बनी कंक्रीट की इमारतें भूस्खलन और ऊष्मा-द्वीप का जोखिम बढ़ाती हैं।
  • 2016-2025 के बीच हिमाचल में पंजीकृत होटल 90% और होमस्टे 670% बढ़े, और इसके लिए कोई वहन-क्षमता अध्ययन नहीं हुआ। 1,000 से अधिक जलविद्युत परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनसे 31.9% वन भूमि का उपयोग बदला जा रहा है।
  • 1905 के कांगड़ा भूकंप (परिमाण 7.8) में 1 लाख से अधिक इमारतें ध्वस्त हो गईं, लेकिन नग्गर कैसल (500 साल पुराना) और चेहनी कोठी टावर (12वीं सदी) जैसी कठ-कुनी संरचनाएं सही-सलामत बची रहीं।

मुख्य बातें

  • पारंपरिक बनाम कंक्रीट घर

    हिमाचल के स्वदेशी कठ-कुनी, धज्जी-देवारी और मिट्टी के घर भूकंप-रोधी और तापीय रूप से कुशल हैं, लेकिन कंक्रीट निर्माण से भूस्खलन और ऊष्मा-द्वीप का जोखिम बढ़ रहा है।

  • जलविद्युत परियोजनाएं और वन हानि

    हिमाचल में प्रस्तावित 1,000 से अधिक जलविद्युत परियोजनाएं डायवर्ट की गई कुल वन भूमि के 31.9% के लिए ज़िम्मेदार हैं, जिससे नदी घाटियों पर दबाव बढ़ रहा है।

  • पारंपरिक निर्माण के विरुद्ध नीतिगत पूर्वाग्रह

    राष्ट्रीय भवन संहिता, PWD की दर-सूचियां, बैंक ऋण मानदंड और PMAY के दिशानिर्देश केवल कंक्रीट और ईंट को मान्यता देते हैं, जिससे मिट्टी और पत्थर के घरों को मान्यता और बीमा नहीं मिलता।

पृष्ठभूमि

हिमाचल प्रदेश भारत के सर्वाधिक भूकंप-जोखिम वाले भूकंपीय क्षेत्र IV और V में आता है। 1905 के कांगड़ा भूकंप (परिमाण 7.8) ने 1 लाख से अधिक इमारतें नष्ट कर दीं, लेकिन नग्गर कैसल (500 साल पुराना) और चेहनी कोठी टावर (12वीं सदी) जैसी पारंपरिक कठ-कुनी संरचनाएं बच गईं, क्योंकि उनकी बिना गारे की, आपस में जुड़ी दीवारें बुनी हुई टोकरी की तरह लचीली रहती हैं।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

2016-2025 के बीच पंजीकृत होटल 90% और होमस्टे 670% बढ़े, और इसके लिए कोई वहन-क्षमता अध्ययन नहीं हुआ। तीखी ढलानों पर बनी कंक्रीट इमारतें भूमिगत जल-निकासी रोकती हैं, जिससे भूस्खलन होता है। 2023 की मानसून आपदाओं के बाद कुल्लू, मंडी और शिमला में GSI के सर्वेक्षणों ने इसकी पुष्टि की। इसके अलावा 1,000 से अधिक जलविद्युत परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनसे 31.9% वन भूमि का उपयोग बदला जा रहा है, जबकि 2021-2026 के बीच ₹865 करोड़ के वृक्षारोपण कोष में से ₹273 करोड़ (31%) खर्च नहीं हुए।

आगे की राह

चार सुधार प्रस्तावित हैं: (1) राष्ट्रीय भवन संहिता, PWD की अनुसूचियों, बैंक नियमों और PMAY दिशानिर्देशों में बदलाव करके इंजीनियर्ड मिट्टी, कठ-कुनी और धज्जी-देवारी को पक्का मानकर ऋण के योग्य बनाया जाए; (2) राज्य के ITI में युवाओं को मशीन से मिट्टी-ब्लॉक दबाने और पारंपरिक थवी कौशल का प्रशिक्षण दिया जाए; (3) पंचायत स्तर पर पूर्व-स्वीकृत मिट्टी और पत्थर के नक्शे उपलब्ध कराए जाएं; (4) कंक्रीट वाले होटलों पर कर लगाया जाए, प्राकृतिक होमस्टे को प्रोत्साहन मिले, और बिना खर्च हुए कोष से सामुदायिक देवदार और बांस के वन उगाए जाएं।

हिमाचल में पारंपरिक बनाम कंक्रीट निर्माण

विशेषतापारंपरिक (कठ-कुनी/धज्जी-देवारी)कंक्रीट
भूकंप सहनशीलतालचीली दीवारें; 1905 के कांगड़ा भूकंप में बचींकठोर; 1905 के भूकंप में ढह गईं
तापीय दक्षताप्राकृतिक तापीय बैटरी; गर्मी में ठंडा, सर्दी में गर्मसर्दी में ठिठुरता, गर्मी में तपता है
भूस्खलन का जोखिमपत्थर की नींव से पानी रिसता हैजल-निकासी रोकता है, भूस्खलन कराता है
नीतिगत मान्यतापक्का नहीं माना जाता; ऋण/बीमा नहींमान्यता प्राप्त; PMAY सब्सिडी के योग्य

हिमाचल प्रदेश से जुड़ाव

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पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

भारत के भूकंपीय क्षेत्र
भूकंप के जोखिम के आधार पर भारत को चार भूकंपीय क्षेत्रों (II, III, IV, V) में बांटा गया है। क्षेत्र V सबसे अधिक जोखिम वाला है और क्षेत्र IV उच्च जोखिम वाला। हिमाचल क्षेत्र IV और V में आता है।
कठ-कुनी वास्तुकला
हिमाचल की एक पारंपरिक निर्माण तकनीक, जिसमें बिना गारे के, आपस में जुड़ी देवदार की लकड़ी और सूखे पत्थर का उपयोग होता है। दीवारें लचीली होती हैं और भूकंप-रोधी मानी जाती हैं।
धज्जी-देवारी
हिमाचल के कांगड़ा और चंबा क्षेत्रों की लकड़ी और मिट्टी से बनने वाली निर्माण तकनीक, जो भूकंपीय सहनशीलता के लिए जानी जाती है।
वन संरक्षण अधिनियम, 1980
ऐसा अधिनियम जो वनों की कटाई रोकता है और गैर-वन उद्देश्यों के लिए वन भूमि के उपयोग को नियंत्रित करता है। ऐसे किसी भी उपयोग के लिए केंद्र सरकार की मंज़ूरी ज़रूरी है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY)
केंद्र सरकार की प्रमुख योजना, जिसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण गरीबों को सस्ते आवास उपलब्ध कराना है। वर्तमान में इसकी सब्सिडी सीमेंट-ईंट वाले निर्माण से जुड़ी है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: हिमाचल में होटल वृद्धि 90% और होमस्टे वृद्धि 670% (2016-2025); जलविद्युत परियोजनाओं के लिए 31.9% वन भूमि का डायवर्जन
  • इन संस्थाओं पर ध्यान दें: भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI); राष्ट्रीय भवन संहिता; पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: वन संरक्षण अधिनियम, 1980; 1996 के बाद पेड़ काटने पर रोक

यह गलती न करें!

परीक्षा में 'वहन-क्षमता अध्ययन' की अवधारणा के बारे में पूछा जा सकता है, या 1905 के कांगड़ा भूकंप के परिमाण (7.8) को अन्य हिमालयी भूकंपों से भ्रमित किया जा सकता है। साथ ही 'कठ-कुनी' और 'धज्जी-देवारी' को आपस में बदला जा सकता है, या पूछा जा सकता है कि कौन-सी शैली किस ज़िले की है।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • पारंपरिक वास्तुकला की भूकंपीय सहनशीलता
  • वन संरक्षण अधिनियम और लकड़ी के अधिकार
  • नाज़ुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में शहरीकरण
  • PMAY और आवास नीति का पूर्वाग्रह

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    कौन-सा भारतीय अधिनियम मुख्यतः गैर-वन उद्देश्यों, जैसे जलविद्युत परियोजनाओं, के लिए वन भूमि के डायवर्जन को नियंत्रित करता है?

  2. Q2कठिन

    हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक वास्तुकला के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.कठ-कुनी घरों में देवदार की लकड़ी और बिना गारे के सूखे पत्थर को आपस में जोड़कर लगाया जाता है, जिससे ये भूकंप-रोधी होते हैं।
    2. 2.धज्जी-देवारी निर्माण मुख्य रूप से हिमाचल के स्पीति क्षेत्र में पाया जाता है।
    3. 3.1905 के कांगड़ा भूकंप में एक लाख से अधिक इमारतें ध्वस्त हुईं, लेकिन नग्गर कैसल जैसी प्राचीन कठ-कुनी संरचनाएँ बच गईं।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    उल्लिखित CEC रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से 2025 के बीच हिमाचल प्रदेश में पंजीकृत होटलों में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई?

  4. Q4मध्यम

    हिमाचल प्रदेश में तीखी ढलानों पर बनी कंक्रीट इमारतों से भूस्खलन होने का मुख्य कारण क्या बताया गया है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कठ-कुनी वास्तुकला क्या है?

कठ-कुनी हिमाचल की पारंपरिक निर्माण तकनीक है, जिसमें बिना गारे के, आपस में जुड़ी देवदार की लकड़ी और सूखे पत्थर से दीवारें बनती हैं। इससे दीवारें लचीली रहती हैं और भूकंप-रोधी होती हैं।

2. हिमाचल में तीखी ढलानों पर बनी कंक्रीट इमारतें भूस्खलन क्यों पैदा कर रही हैं?

ठोस कंक्रीट के ब्लॉक भूमिगत बांध की तरह काम करते हैं, मानसून का रिसता पानी रोकते हैं, दबाव बढ़ता है और ढलान टूटकर भूस्खलन होता है। 2023 की आपदाओं के बाद GSI के सर्वेक्षणों ने इसकी पुष्टि की।

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