राजव्यवस्था

बिहार पुलिस पुनर्गठन: फॉरेंसिक विंग गृह विभाग के अधीन, 3 नए सिटी एसपी, 176 नए पद सृजित

7 नवंबर 20262 मिनट2 स्रोत4 प्रश्नखबर 5 / 23

प्रिलिम्स के लिए: फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला (FSL), पुलिस अधीक्षक (SP) / सिटी एसपी, आर्थिक अपराध इकाई (EOU), नोडल निकाय, सालाना वित्तीय भार, नए सिटी एसपी के स्थान, सृजित कुल नए पद, फॉरेंसिक विंग अब किसके अधीन

मेन्स के लिए: फॉरेंसिक स्वतंत्रता, पुलिस पुनर्गठन, शहरी पुलिसिंग, आर्थिक अपराध, निष्पक्ष जांच

स्रोत:Dainik BhaskarDainik Bhaskar

चर्चा में क्यों?

बिहार के गृह विभाग ने पुलिस प्रशासन का ढांचा बदला है। फॉरेंसिक विंग (विधि विज्ञान प्रयोगशाला, फिंगरप्रिंट और फोटो ब्यूरो) को पुलिस नियंत्रण से हटाकर निष्पक्ष जांच के लिए सीधे गृह विभाग के अधीन लाया गया है। आर्थिक अपराध इकाई समेत अलग-अलग कार्यालयों में 176 नए पद सृजित किए गए हैं और तीन नए सिटी एसपी (मोतिहारी, पूर्णिया, सारण) बनाए गए हैं। इस पर सालाना ₹17.50 करोड़ का खर्च आएगा।

सारांश

  • बिहार गृह विभाग ने पुलिस प्रशासन में बदलाव किया: निष्पक्ष जांच के लिए फॉरेंसिक विंग पुलिस से हटकर सीधे गृह विभाग के नियंत्रण में।
  • मोतिहारी (नेपाल सीमा), पूर्णिया (पश्चिम बंगाल सीमा) और सारण (पटना से सटा) में तीन नए नगर पुलिस अधीक्षक (सिटी एसपी) बनाए गए।
  • आर्थिक अपराध इकाई (143 पद), सिटी एसपी कार्यालय (12), प्रक्षेत्र पुनर्गठन (20) और फॉरेंसिक निदेशालय (1) में कुल 176 नए पद मंज़ूर हुए, जिन पर सालाना ₹17.50 करोड़ खर्च होगा।

मुख्य बातें

  • फॉरेंसिक विंग पुलिस से अलग

    बिहार की फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, फिंगरप्रिंट ब्यूरो और फोटो ब्यूरो को स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए पुलिस नियंत्रण से हटाकर गृह विभाग के अधीन लाया गया है।

  • तीन नए सिटी एसपी बनाए गए

    सीमावर्ती और अधिक आबादी वाले जिलों में कानून-व्यवस्था मज़बूत करने के लिए मोतिहारी, पूर्णिया और सारण में सिटी एसपी (पे-लेवल 13) के पद बनाए गए हैं।

  • आर्थिक अपराध इकाई का विस्तार

    आर्थिक अपराध इकाई को 143 नए पद मिले हैं, जिनमें 1 डीआईजी, 1 एसपी, 12 डीएसपी और 33 पुलिस निरीक्षक शामिल हैं। इन पर सालाना ₹12.14 करोड़ खर्च होगा।

पृष्ठभूमि

बिहार में फॉरेंसिक विंग पहले पुलिस के प्रशासनिक नियंत्रण में था, जिससे चर्चित मामलों में निष्पक्षता पर सवाल उठते थे। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) वित्तीय अपराधों से निपटती है और उसके विस्तार की ज़रूरत थी। तीन बढ़ते शहरी केंद्रों में अलग सिटी एसपी नहीं थे, जिससे स्थानीय कानून-व्यवस्था के प्रबंधन पर असर पड़ रहा था।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

फॉरेंसिक विंग को सीधे गृह विभाग के अधीन लाना न्यायिक निष्ठा के लिए किया गया ढांचागत सुधार है, ताकि आपराधिक मामलों की फॉरेंसिक रिपोर्ट पुलिस के दबाव से मुक्त रहे। सीमावर्ती जिलों (मोतिहारी-नेपाल, पूर्णिया-पश्चिम बंगाल, सारण-पटना से सटा) में तीन नए सिटी एसपी से लक्षित पुलिसिंग बेहतर होगी। EOU में 143 नए पद आर्थिक अपराधों पर सख्ती का संकेत हैं। फॉरेंसिक निदेशालय में स्थायी निदेशक प्रमुख (पे-लेवल 14) का पद बनाने से फॉरेंसिक व्यवस्था अधिक पेशेवर होगी।

आगे की राह

अधिसूचना के अनुसार पुनर्गठन लागू किया जाएगा। उम्मीद है कि फॉरेंसिक विंग की स्वतंत्रता से दोषसिद्धि दर बेहतर होगी और साक्ष्य से छेड़छाड़ के आरोप कम होंगे। नए सिटी एसपी कार्यालयों को पूरी तरह चालू करने के लिए बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की ज़रूरत होगी। सालाना ₹17.50 करोड़ का आवर्ती खर्च राज्य सरकार उठाएगी।

बिहार से जुड़ाव

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पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला (FSL)
सरकारी प्रयोगशाला जो आपराधिक जांच के लिए साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण करती है। भारत में FSL राज्य के गृह विभाग के अधीन होती हैं, जबकि केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला (CFSL) गृह मंत्रालय के अधीन आती है।
पुलिस अधीक्षक (SP) / सिटी एसपी
किसी राज्य में ज़िला स्तर पर पुलिस का प्रमुख। बड़े शहरों में ज़िला एसपी से अलग सिटी एसपी नियुक्त किया जा सकता है, जो शहरी पुलिसिंग संभालता है।
आर्थिक अपराध इकाई (EOU)
एक विशेष पुलिस इकाई जो धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक घोटाले जैसे वित्तीय अपराधों की जांच करती है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: 176 नए पद, सालाना ₹17.50 करोड़ खर्च, 3 नए सिटी एसपी (मोतिहारी, पूर्णिया, सारण)
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: बिहार गृह विभाग
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: सिटी एसपी के लिए पे-लेवल 13, निदेशक प्रमुख के लिए पे-लेवल 14

यह गलती न करें!

परीक्षक पूछ सकते हैं कि फॉरेंसिक विंग किस विभाग के अधीन लाया गया? विकल्पों में पुलिस विभाग, गृह विभाग या मुख्यमंत्री कार्यालय हो सकते हैं। सही उत्तर गृह विभाग है। एक और जाल: EOU के नए पदों (143) को कुल पदों (176) के साथ भ्रमित करना।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • फॉरेंसिक स्वतंत्रता, पुलिस पुनर्गठन, शहरी पुलिसिंग, आर्थिक अपराध, निष्पक्ष जांच

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    हाल के पुनर्गठन के अनुसार बिहार में कौन-सा विभाग फॉरेंसिक विंग (फॉरेंसिक लैब, फिंगरप्रिंट और फोटो ब्यूरो) को सीधे नियंत्रित कर रहा है?

  2. Q2कठिन

    बिहार पुलिस पुनर्गठन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.मोतिहारी, पूर्णिया और सारण में तीन नए नगर पुलिस अधीक्षक (सिटी एसपी) बनाए गए हैं।
    2. 2.इस पुनर्गठन के तहत आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को 176 नए पद मिले हैं।
    3. 3.फॉरेंसिक विंग को पुलिस मुख्यालय के सीधे नियंत्रण में रखा गया है।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    इस पुलिस पुनर्गठन से बिहार सरकार पर कुल सालाना वित्तीय भार कितना है?

  4. Q4मध्यम

    फॉरेंसिक विंग को पुलिस के बजाय सीधे गृह विभाग के अधीन रखने का मुख्य उद्देश्य क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. बिहार में कितने नए सिटी एसपी बनाए गए और किन ज़िलों में?

बिहार के मोतिहारी, पूर्णिया और सारण ज़िलों में तीन नए सिटी एसपी बनाए गए।

2. बिहार पुलिस पुनर्गठन का कुल सालाना खर्च कितना है?

बिहार सरकार पर कुल सालाना वित्तीय भार ₹17.50 करोड़ है।

3. बिहार में अब फॉरेंसिक विंग पर किस विभाग का नियंत्रण है?

फॉरेंसिक विंग (फॉरेंसिक लैब, फिंगरप्रिंट ब्यूरो और फोटो ब्यूरो) अब पुलिस के नहीं, सीधे बिहार गृह विभाग के अधीन है।

4. आर्थिक अपराध इकाई में कितने नए पद सृजित हुए?

आर्थिक अपराध इकाई को 143 नए पद मिले हैं, जिनमें 1 डीआईजी, 1 एसपी, 12 डीएसपी और 33 निरीक्षक शामिल हैं।

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