पर्यावरण

सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना: 27 गांवों की भूमि जलमग्न होने के विरोध में आदि समुदाय का प्रदर्शन

7 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 45 / 59

प्रिलिम्स के लिए: वन अधिकार अधिनियम, 2006, मुक्त, पूर्व और सूचित सहमति (FPIC), प्री-फ़ीज़िबिलिटी रिपोर्ट (PFR), परियोजना का नाम, विकासकर्ता, स्थान, प्रभावित गांव, विरोध कर रहा समुदाय

मेन्स के लिए: आदिवासी अधिकार बनाम विकास, वन अधिकार अधिनियम, FPIC, पूर्वोत्तर भारत में जलविद्युत, विस्थापन और पुनर्वास

स्रोत:The HinduThe Hindu

चर्चा में क्यों?

अरुणाचल प्रदेश का आदि समुदाय NHPC द्वारा विकसित की जा रही सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) का विरोध कर रहा है। समुदाय का कथन है कि इससे 27 गांव डूब जाएंगे और उनकी ज़मीन तथा आजीविका नष्ट हो जाएगी। राज्य बल के बढ़ते उपयोग से प्रदर्शन हिंसक हो गया है। समुदाय का आरोप है कि सरकार ने व्यवहार्यता अध्ययन के लिए सहमति लेने में धोखे और धमकी का सहारा लिया।

सारांश

  • सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (NHPC) द्वारा अरुणाचल प्रदेश में विकसित एक जलविद्युत परियोजना है।
  • आदि समुदाय का कहना है कि यह बांध कम से कम 40 गांवों को प्रभावित करेगा, जिनमें से 27 गांव डूब जाएंगे, और इससे उनकी ज़मीन, आजीविका और सभ्यता खतरे में पड़ेगी।
  • राज्य प्राधिकरणों द्वारा बल प्रयोग बढ़ने के जवाब में प्रदर्शन हिंसक हो गया है। आरोप है कि प्री-फ़ीज़िबिलिटी रिपोर्ट (PFR) के लिए सहमति लेने में धोखे और धमकी का सहारा लिया गया।

मुख्य बातें

  • सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP)

    अरुणाचल प्रदेश के सियांग ज़िले में NHPC द्वारा प्रस्तावित एक जलविद्युत परियोजना, जो अभी प्री-फ़ीज़िबिलिटी रिपोर्ट के चरण में है।

  • आदि समुदाय का प्रतिरोध

    आदि समुदाय इस बांध का विरोध कर रहा है। उसका दावा है कि इससे 27 गांव डूब जाएंगे और उनकी ज़मीन, आजीविका व सभ्यता नष्ट हो जाएगी।

  • संघर्ष का बढ़ना

    राज्य प्राधिकरणों ने बल प्रयोग बढ़ाया, जिसके बाद प्रदर्शन हिंसक हो गए। आरोप है कि व्यवहार्यता अध्ययन के लिए सहमति लेने में धोखे और धमकी का सहारा लिया गया।

पृष्ठभूमि

सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) अरुणाचल प्रदेश के सियांग ज़िले में NHPC द्वारा प्रस्तावित एक बड़ी जलविद्युत परियोजना है। राज्य सरकार ने यहां तीन प्रस्तावित स्थल चिह्नित किए हैं और परियोजना प्री-फ़ीज़िबिलिटी रिपोर्ट (PFR) के चरण में है। आदि समुदाय, जो एक स्वदेशी समूह है, इस परियोजना का विरोध कर रहा है। उसका आरोप है कि कम से कम 40 प्रभावित गांवों में से 27 डूब जाएंगे, जिससे उनकी ज़मीन, आजीविका और सभ्यता खतरे में पड़ेगी।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

यह संघर्ष भारत के पूर्वोत्तर में जलविद्युत विकास की ज़रूरत और स्वदेशी समुदायों के अधिकारों के बीच के तनाव को सामने लाता है। आदि समुदाय के आरोप, यानी धोखा, बल प्रयोग और PFR के लिए सहमति लेने में राज्य सरकार की धमकी, मुक्त, पूर्व और सूचित सहमति (FPIC) तथा वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत आदिवासी अधिकारों पर गंभीर सवाल उठाते हैं। प्रदर्शनों को दबाने के लिए राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों का उपयोग विकास परियोजनाओं के सुरक्षाकरण की ओर इशारा करता है।

आगे की राह

संघर्ष सुलझाने के लिए सरकार को आदि समुदाय के साथ वास्तविक संवाद करना होगा और पारदर्शी सहमति प्रक्रिया सुनिश्चित करनी होगी। आदिवासी अधिकारों और वन अधिकार अधिनियम का सम्मान करते हुए व्यापक पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव आकलन ज़रूरी है। विस्थापन और पारिस्थितिक नुकसान कम करने के लिए बड़े बांधों के विकल्प, जैसे छोटी रन-ऑफ़-द-रिवर परियोजनाएं, खंगाले जा सकते हैं।

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

वन अधिकार अधिनियम, 2006
एक भारतीय कानून जो वन में रहने वाली अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वनवासियों के वन अधिकारों और कब्ज़े को मान्यता देता है और उनकी आजीविका तथा वनों के संरक्षण को सुनिश्चित करता है।
मुक्त, पूर्व और सूचित सहमति (FPIC)
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून द्वारा संरक्षित एक सिद्धांत, जो स्वदेशी लोगों के इस अधिकार की पुष्टि करता है कि वे अपनी भूमि और संसाधनों को प्रभावित करने वाली परियोजनाओं को सहमति दे सकते हैं या उन्हें रोक सकते हैं।
प्री-फ़ीज़िबिलिटी रिपोर्ट (PFR)
एक प्रारंभिक चरण का अध्ययन, जिसमें पूर्ण व्यवहार्यता अध्ययन से पहले परियोजना की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन किया जाता है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस डेटा पर ध्यान दें: NHPC द्वारा विकसित अरुणाचल प्रदेश की सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP)
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: विद्युत मंत्रालय (NHPC के लिए) या पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (पर्यावरण मंज़ूरी के लिए)
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: वन अधिकार अधिनियम, 2006 (आदिवासी भूमि अधिकार)

यह गलती न करें!

परीक्षक परियोजना के नाम (सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना) को दिबांग या लोअर सुबनसिरी जैसे अन्य बांधों से बदल सकते हैं, या विकासकर्ता (NHPC) को SJVN या THDC जैसे अन्य सार्वजनिक उपक्रमों से भ्रमित कर सकते हैं। वे प्रभावित समुदाय (आदि) की तुलना अरुणाचल प्रदेश की अन्य जनजातियों से भी पूछ सकते हैं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • आदिवासी अधिकार बनाम विकास, वन अधिकार अधिनियम, FPIC, पूर्वोत्तर भारत में जलविद्युत, विस्थापन और पुनर्वास

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    अरुणाचल प्रदेश में सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) कौन-सा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम विकसित कर रहा है?

  2. Q2कठिन

    सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश के सियांग ज़िले में स्थित है।
    2. 2.आदि समुदाय इस परियोजना का विरोध कर रहा है, उसका दावा है कि इससे 27 गांव डूब जाएंगे।
    3. 3.परियोजना को पूर्ण पर्यावरणीय मंज़ूरी मिल चुकी है और निर्माण शुरू हो चुका है।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना से आदि समुदाय के कितने गांव डूबने का दावा किया गया है?

  4. Q4मध्यम

    सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर आदि समुदाय की मुख्य चिंता क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना क्या है?

यह राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (NHPC) द्वारा अरुणाचल प्रदेश के सियांग ज़िले में विकसित एक जलविद्युत परियोजना है, जो अभी प्री-फ़ीज़िबिलिटी रिपोर्ट के चरण में है।

2. सियांग बांध का विरोध कौन-सा समुदाय कर रहा है?

अरुणाचल प्रदेश का स्वदेशी समुदाय आदि इस बांध का विरोध कर रहा है। उसका आरोप है कि इससे 27 गांव डूब जाएंगे और उनकी ज़मीन तथा आजीविका नष्ट हो जाएगी।

3. सियांग बांध परियोजना से कितने गांव प्रभावित हैं?

आदि समुदाय का दावा है कि कम से कम 40 गांव प्रभावित होंगे, जिनमें से 27 गांव डूब जाएंगे।

4. विरोध प्रदर्शन हिंसक क्यों हो गए?

राज्य प्राधिकरणों द्वारा बल प्रयोग बढ़ने से प्रदर्शन हिंसक हो गए। समुदाय का आरोप है कि व्यवहार्यता अध्ययन के लिए सहमति लेने में धोखे, धमकी और बल का सहारा लिया गया।

सभी स्रोत

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4 प्रश्न · 3 मिनटDainik Bhaskar