पर्यावरण

दुनिया के सबसे प्रदूषित 50 शहरों में सभी भारत के, इनमें से 21 उत्तर प्रदेश के: दिवाली से पहले वायु गुणवत्ता का संकट

7 नवंबर 20263 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 11 / 23

प्रिलिम्स के लिए: वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI), कणिका पदार्थ (PM2.5), पराली जलाना, तापीय उलटाव (टेम्परेचर इनवर्शन), वर्तमान संदर्भ, 6 नवंबर 2026 को यूपी के शीर्ष 2 शहर, सरकारी निगरानी पर AQI सीमा, मेरठ का AQI (2022 बनाम 2026)

मेन्स के लिए: AQI सीमा, पराली जलाना, तापीय उलटाव, GRAP, सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल

स्रोत:Dainik BhaskarDainik Bhaskar

चर्चा में क्यों?

6 नवंबर 2026 को, AQI के आधार पर दुनिया के सबसे प्रदूषित 50 शहरों में सभी भारत के थे, जिनमें 21 उत्तर प्रदेश के थे। तापमान में गिरावट, हवा की कम रफ्तार, पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने और स्थानीय प्रदूषण के मेल से यह संकट पैदा हुआ है, और दिवाली के पटाखे अभी जले भी नहीं थे। सरकारी AQI निगरानी प्रणाली रीडिंग को 500 पर रोक देती है, जिससे संकट की असली गंभीरता छिप जाती है।

सारांश

  • 6 नवंबर 2026 को लाइव AQI ट्रैकिंग वेबसाइट aqi.in ने दिखाया कि दुनिया के सबसे प्रदूषित 50 शहरों में सभी भारत के थे, और इनमें से 21 उत्तर प्रदेश के थे।
  • उस दिन उत्तर प्रदेश में फिरोजाबाद (AQI 463) और आगरा (AQI 430) सबसे प्रदूषित दो शहर थे।
  • सरकारी AQI प्रणाली, जिसे 2014 में IIT कानपुर ने बनाया था, रीडिंग को 500 पर सीमित रखती है, जबकि IQAir और aqi.in जैसी निजी एजेंसियां 1,000 से ऊपर के मान दर्ज कर सकती हैं।
  • दिवाली से पहले प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण हैं: 8-9°C की अचानक गिरावट, हवा की कम रफ्तार, पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना (85% धान की कटाई पूरी), और स्थानीय ट्रैफिक व निर्माण की धूल।

मुख्य बातें

  • वैश्विक प्रदूषण हॉटस्पॉट: भारत

    वैश्विक प्रदूषण हॉटस्पॉट: भारत: 6 नवंबर 2026 को दुनिया के सबसे प्रदूषित 50 शहरों में सभी भारत के थे, और इनमें से 21 उत्तर प्रदेश के।

  • AQI सीमा असली गंभीरता छिपाती है

    सरकारी AQI निगरानी केंद्र रीडिंग को 500 पर सीमित रखते हैं, जबकि निजी निगरानी 1,000 से ऊपर के मान दर्ज करती है, जिससे असली स्वास्थ्य आपातकाल छिप जाता है।

  • पराली जलाना और मौसम का जाल

    अचानक 8-9°C की गिरावट, हवा की कम रफ्तार और पंजाब तथा हरियाणा में 85% धान की कटाई ने मिलकर प्रदूषकों को जमीन के पास फंसा दिया है।

पृष्ठभूमि

भारत की वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) प्रणाली 2014 में IIT कानपुर ने विकसित की थी, जिसकी सबसे ऊंची श्रेणी 500 पर खत्म होती है। इस सीमा से ऊपर के प्रदूषण स्तर को समेटने के लिए इस प्रणाली को कभी अपग्रेड नहीं किया गया। इसके उलट, IQAir और aqi.in जैसी निजी और अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियां ऐसे एल्गोरिदम इस्तेमाल करती हैं जो 500 से कहीं ऊपर AQI मान निकाल सकते हैं, और इससे खतरनाक स्थितियों की अधिक सटीक तस्वीर मिलती है।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

दुनिया के सबसे प्रदूषित 50 शहरों में सभी भारत के होना, जिनमें 21 उत्तर प्रदेश के हैं, एक गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा करता है। दिवाली से पहले प्रदूषण में आया उछाल कई कारणों से है: चक्रवात अर्नब और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण तापमान में तेज गिरावट (8-9°C), हवा की कम रफ्तार से प्रदूषकों का जमीन के पास फंसना, पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना (85% कटाई पूरी), और ट्रैफिक जाम, निर्माण की धूल तथा औद्योगिक उत्सर्जन जैसे स्थानीय स्रोत। सरकारी AQI सीमा 500 रीडिंग को कम दर्ज कराती है और झूठी सुरक्षा का भ्रम देती है। aqi.in के अनुसार 6 नवंबर की सुबह मेरठ का AQI 1,059 तक पहुंच गया था, जबकि सरकारी रीडिंग 500 पर ही रुक जाती।

आगे की राह

तत्काल कार्रवाई की ज़रूरत है: (1) विशेषज्ञों की सिफारिश के अनुसार AQI निगरानी प्रणाली से 500 की सीमा हटाकर असली समय के खतरनाक स्तर दिखाए जाएं। (2) NCR और आसपास के क्षेत्रों के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) को मज़बूत किया जाए। (3) पराली प्रबंधन के समाधान तेज़ किए जाएं, जिसमें इन-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन और बायोमास बिजली संयंत्रों में एक्स-सीटू उपयोग शामिल हो। (4) सर्दियों में, जब तापमान का उलटाव आम होता है, वाहनों और उद्योगों के लिए उत्सर्जन मानदंड सख़्त किए जाएं।

सरकारी बनाम निजी AQI निगरानी

विशेषतासरकारी प्रणालीनिजी निगरानी (IQAir, aqi.in)
अधिकतम दर्ज AQI500 (सीमित)1,000 से ऊपर जा सकता है
प्रणाली किसने बनाईIIT कानपुर (2014)विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां
उदाहरण: मेरठ (6 नवंबर 2026)500 (सीमित)1,059

उत्तर प्रदेश से जुड़ाव

उत्तर प्रदेश की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:UPPSC 8/10UPPSC RO/ARO 7/10

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI)
एक संख्यात्मक सूचकांक जिससे किसी क्षेत्र में वायु प्रदूषण का स्तर बताया जाता है। यह PM2.5, PM10, NO₂, SO₂, CO और O₃ जैसे प्रमुख प्रदूषकों की सांद्रता के आधार पर निकाला जाता है। भारत की AQI प्रणाली 2014 में IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने विकसित की थी; केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) इसे लागू करने और नेटवर्क चलाने वाली नोडल संस्था है।
कणिका पदार्थ (PM2.5)
2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटे व्यास के बारीक सांस में जाने वाले कण। ये फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और खून में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। PM2.5 वाहनों, उद्योगों और बायोमास जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण का बड़ा हिस्सा है।
पराली जलाना
कटाई के बाद बचे फसल अवशेष (नरवाई) में आग लगाने की प्रथा, मुख्यतः पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धान के भूसे की। अक्टूबर-नवंबर में उत्तर भारत के वायु प्रदूषण में यह बड़ा योगदान देती है।
तापीय उलटाव (टेम्परेचर इनवर्शन)
एक मौसम-संबंधी स्थिति जिसमें गर्म हवा की परत नीचे की ठंडी हवा को दबाकर रखती है, जिससे प्रदूषकों का फैलाव रुक जाता है। यह आमतौर पर सर्दियों में होती है और वायु प्रदूषण के दौर को और बढ़ा देती है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: 50 (6 नवंबर 2026 को दुनिया के सबसे प्रदूषित 50 शहरों में सभी भारत के थे), 21 (इनमें यूपी के शहरों की संख्या)
  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: फिरोजाबाद (AQI 463) और आगरा (AQI 430) 6 नवंबर 2026 को यूपी के सबसे प्रदूषित दो शहर थे
  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: सरकारी निगरानी पर AQI सीमा 500 है; 6 नवंबर 2026 को मेरठ का AQI 1,059 (निजी निगरानी) तक पहुंचा
  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: पंजाब और हरियाणा में 85% धान की कटाई पूरी (2026 के नवंबर की शुरुआत तक)

यह गलती न करें!

सरकारी AQI प्रणाली रीडिंग को 500 पर सीमित रखती है, जबकि निजी निगरानी उच्च मान दर्ज कर सकती है। परीक्षार्थियों से पूछा जा सकता है कि किस एजेंसी का डेटा अधिक सटीक है या अंतर क्यों है। यह सीमा 2014 की प्रणाली की बनावट से है, जान-बूझकर छिपाने से नहीं। साथ ही, दिवाली से पहले प्रदूषण का उछाल केवल पटाखों से नहीं, बल्कि कई कारणों (मौसम, पराली जलाना, स्थानीय स्रोत) से है।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • AQI सीमा, पराली जलाना, तापीय उलटाव, GRAP, सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    2014 में भारत की वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) प्रणाली किस संस्था ने विकसित की?

  2. Q2कठिन

    नवंबर 2026 में उत्तर प्रदेश के वायु गुणवत्ता संकट के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.6 नवंबर 2026 को दुनिया के सबसे प्रदूषित 50 शहरों में सभी भारत के थे, जिनमें 21 उत्तर प्रदेश के थे।
    2. 2.सरकारी AQI निगरानी प्रणाली 1,000 से ऊपर के मान दर्ज कर सकती है, जिससे प्रदूषण की पूरी तस्वीर मिलती है।
    3. 3.6 नवंबर 2026 को फिरोजाबाद और आगरा उत्तर प्रदेश के सबसे प्रदूषित दो शहर थे।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से 2026 तक (एक ही तारीख पर) मेरठ के AQI में कितने प्रतिशत की वृद्धि हुई?

  4. Q4मध्यम

    सरकारी AQI रीडिंग IQAir और aqi.in जैसी निजी निगरानी से कम क्यों आती हैं?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. 6 नवंबर 2026 को दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से कितने भारत के थे?

दुनिया के सबसे प्रदूषित 50 शहरों में सभी भारत के थे, जिनमें 21 उत्तर प्रदेश के थे।

2. सरकारी AQI रीडिंग IQAir जैसी निजी निगरानी से क्यों अलग होती हैं?

सरकारी AQI निगरानी रीडिंग को 500 पर सीमित रखती है, क्योंकि यह प्रणाली 2014 में IIT कानपुर ने 500 की सबसे ऊंची श्रेणी के साथ बनाई थी। निजी निगरानी ऐसे एल्गोरिदम इस्तेमाल करती है जो 1,000 से ऊपर के मान निकाल सकते हैं।

3. 6 नवंबर 2026 को उत्तर प्रदेश के सबसे प्रदूषित दो शहर कौन-से थे?

उस तारीख को फिरोजाबाद (AQI 463) और आगरा (AQI 430) उत्तर प्रदेश के सबसे प्रदूषित दो शहर थे।

4. 2026 में दिवाली से पहले प्रदूषण के उछाल के मुख्य कारण क्या हैं?

इस उछाल के पीछे अचानक 8-9°C की तापमान गिरावट, हवा की कम रफ्तार, पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना (85% कटाई पूरी) और ट्रैफिक, निर्माण व उद्योग से स्थानीय प्रदूषण का मेल है।

सभी स्रोत

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