प्रिलिम्स के लिए: श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP), वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI), PM2.5 और PM10, AQI श्रेणी, लागू GRAP चरण, GRAP के लिए नोडल निकाय, प्रभावित केंद्र, वर्तमान संदर्भ
मेन्स के लिए: प्रदूषण निगरानी में डेटा की विश्वसनीयता, CAQM की भूमिका, GRAP की प्रभावशीलता, दिल्ली का सर्दियों का प्रदूषण संकट
स्रोत:Indian Express
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- 7 नवंबर 2026 को दिल्ली का AQI 382 ('अति खराब') था।
- दिल्ली-NCR में CAQM ने GRAP का तीसरा चरण लागू किया।
- दिल्ली के 59 में से 11 निगरानी केंद्रों में डेटा की कमी थी।
- AQI स्तर के आधार पर GRAP के चार चरण हैं।
- दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए CAQM एक वैधानिक निकाय है।
चर्चा में क्यों?
दिवाली से ठीक पहले दिल्ली की हवा की गुणवत्ता लगातार पांचवें दिन 'अति खराब' (AQI 382) बनी रही। इसे देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) का तीसरा चरण लागू किया। इसी बीच दिल्ली के 59 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से कम से कम 11 ने डेटा दर्ज नहीं किया। इससे PM2.5 और PM10 की निगरानी में खामियां रह गईं और इस अहम समय में प्रदूषण का सही आकलन होने पर सवाल उठ गए हैं।
सारांश
- दिल्ली का 24 घंटे का औसत AQI लगातार पांचवें दिन 382 ('अति खराब') रहा। अनुमान है कि सप्ताहांत तक यह 'गंभीर' स्तर तक पहुंच सकता है।
- प्रदूषण और बढ़ने से रोकने के लिए CAQM ने दिल्ली-NCR में GRAP के तहत तीसरे चरण के आपातकालीन उपाय लागू किए।
- कम से कम 11 निगरानी केंद्रों में डेटा की कमी रही, जिनमें PM2.5 के 22 और PM10 के 27 घंटेवार रीडिंग नहीं मिले। IIT दिल्ली, नांगलोई और NSIT द्वारका जैसे केंद्र पूरी तरह बंद रहे।
मुख्य बातें
दिल्ली का AQI 382 (अति खराब)
हवा की गुणवत्ता लगातार पांचवें दिन 'अति खराब' श्रेणी में रही, और दिवाली सप्ताहांत तक इसके 'गंभीर' स्तर तक पहुंचने का अनुमान है।
GRAP तीसरे चरण के आपातकालीन उपाय
दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता की और गिरावट रोकने के लिए CAQM ने श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना का तीसरा चरण लागू किया।
निगरानी में डेटा की कमी
कम से कम 11 केंद्रों में PM2.5 और PM10 की रीडिंग नहीं मिली, जिससे इस अहम समय में प्रदूषण की निगरानी में खामियां रह गईं।
पृष्ठभूमि
दिल्ली-NCR में हर सर्दी पराली जलाने, वाहनों के उत्सर्जन और कम हवा की गति व तापमान व्युत्क्रमण जैसी मौसमी परिस्थितियों के कारण गंभीर वायु प्रदूषण होता है। श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) AQI स्तर के आधार पर चार चरणों में बंटी आपातकालीन उपायों की व्यवस्था है: पहला चरण (301-400, 'अति खराब'), दूसरा चरण (401-450, 'गंभीर'), तीसरा चरण (451-500, 'गंभीर+') और चौथा चरण (500 से ऊपर, 'आपातकाल')। तीसरा चरण 451-500 की AQI सीमा से मेल खाता है।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
11 निगरानी केंद्रों में डेटा की कमी, जिनमें IIT दिल्ली, नांगलोई और NSIT द्वारका में पूरी तरह बंद रहना शामिल है, रियल-टाइम AQI रिपोर्टिंग की सटीकता को कमज़ोर करती है। CPCB की पद्धति के अनुसार, दैनिक AQI निकालने के लिए किसी केंद्र को तीन प्रदूषकों (PM2.5 या PM10 सहित) की कम से कम 16 घंटेवार रीडिंग चाहिए। डेटा न होने पर 'अपर्याप्त डेटा' का टैग लग सकता है, जिससे स्थानीय प्रदूषण हॉटस्पॉट दर्ज ही नहीं हो पाते। दिवाली के समय पटाखों से कणों का स्तर अचानक बढ़ता है, इसलिए यह स्थिति और चिंताजनक है।
आगे की राह
DPCC के मानक प्रोटोकॉल के अनुसार डेटा विफलता के तीन घंटे बाद स्वचालित चेतावनी जानी चाहिए, और नोडल अधिकारी कारण का पता लगाते हैं, जैसे सर्वर की खराबी, बिजली कटौती या सेंसर में रुकावट। सतत परिवेश वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों (CAAQMS) के रखरखाव प्रोटोकॉल को मज़बूत करना और उनके लिए बैकअप बिजली व्यवस्था करना ज़रूरी है। निगरानी नेटवर्क का विस्तार और डेटा की वैकल्पिक व्यवस्था करने से उच्च प्रदूषण के दौर में निगरानी की खामियां रोकी जा सकती हैं।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP)
- AQI स्तर के आधार पर दिल्ली-NCR में लागू आपातकालीन उपायों का एक समूह। पहला चरण (AQI 301-400, 'अति खराब'), दूसरा चरण (AQI 401-450, 'गंभीर'), तीसरा चरण (AQI 451-500, 'गंभीर+'), चौथा चरण (AQI 500 से ऊपर, 'आपातकाल')। इन उपायों में निर्माण कार्य पर रोक, डीज़ल जनरेटर के इस्तेमाल पर रोक और ट्रकों के प्रवेश पर रोक शामिल हैं।
- वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI)
- वायु प्रदूषण का स्तर बताने वाला एक संख्यात्मक सूचकांक (0-500)। श्रेणियां: अच्छा (0-50), संतोषजनक (51-100), मध्यम (101-200), खराब (201-300), अति खराब (301-400), गंभीर (401-500)। यह आठ प्रदूषकों के आधार पर निकाला जाता है, और सबसे अधिक उप-सूचकांक ही कुल AQI तय करता है।
- PM2.5 और PM10
- 2.5 माइक्रोमीटर (PM2.5) और 10 माइक्रोमीटर (PM10) से कम व्यास वाले कण। PM2.5 फेफड़ों में गहराई तक पहुंचकर रक्तप्रवाह में जा सकते हैं, जिससे श्वसन और हृदय संबंधी रोग होते हैं। PM10 सांस के साथ शरीर में जाते हैं और जलन पैदा कर सकते हैं।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: 7 नवंबर 2026 को दिल्ली का AQI 382 ('अति खराब') था, जो लगातार पांचवां दिन था
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: NCR और उससे लगे क्षेत्रों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM)
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) का तीसरा चरण
यह गलती न करें!
परीक्षा में AQI श्रेणियों की अदला-बदली की जाती है: 'अति खराब' (301-400) को अक्सर 'गंभीर' (401-500) समझ लिया जाता है। साथ ही, GRAP का तीसरा चरण 'गंभीर+' (AQI 451-500) के लिए है, 'अति खराब' (पहला चरण) के लिए नहीं। याद रखें कि तीसरा चरण तब लागू होता है जब AQI 451-500 की सीमा तक पहुंचने का अनुमान हो या वह पहले से उस सीमा में हो।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- प्रदूषण निगरानी में डेटा की विश्वसनीयता, CAQM की भूमिका, GRAP की प्रभावशीलता, दिल्ली का सर्दियों का प्रदूषण संकट
कहीं अटके? एक टैप में समझें
दिवाली से पहले लगातार पांच दिन दिल्ली की हवा 'अति खराब' (AQI 382) रही। हालात और बिगड़ने से रोकने के लिए CAQM ने GRAP की आपातकालीन योजना का तीसरा चरण लागू किया। उसी समय 11 प्रदूषण निगरानी केंद्र कुछ घंटों के लिए डेटा नहीं भेज सके, जिससे असली प्रदूषण स्तर का सही पता लगाना मुश्किल हो गया।
- 7 नवंबर 2026 को दिल्ली का AQI 382 ('अति खराब') था।
- दिल्ली-NCR में CAQM ने GRAP का तीसरा चरण लागू किया।
- दिल्ली के 59 में से 11 निगरानी केंद्रों में डेटा की कमी थी।
- AQI स्तर के आधार पर GRAP के चार चरण हैं।
- दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए CAQM एक वैधानिक निकाय है।
- पर्यावरण: वायु प्रदूषण और उसका नियंत्रण
- शासन: पर्यावरण शासन और नियामक निकाय
जुड़ी अवधारणाएँ: श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP), वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI), PM2.5 और PM10
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
दिल्ली-NCR में श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्य योजना (GRAP) लागू करने के लिए कौन-सा निकाय ज़िम्मेदार है?
व्याख्या: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उससे लगे क्षेत्रों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) वह वैधानिक निकाय है जो GRAP उपाय लागू करता है। CPCB देशभर में प्रदूषण की निगरानी करता है, DPCC दिल्ली का राज्य स्तरीय निकाय है और MoEFCC व्यापक मंत्रालय है, लेकिन GRAP के क्रियान्वयन की विशेष ज़िम्मेदारी CAQM की है।
- Q2कठिन
समाचार में बताई गई दिल्ली की वायु गुणवत्ता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.दिल्ली का 24 घंटे का औसत AQI 382 था, जिसे 'गंभीर' श्रेणी में रखा गया।
- 2.और बिगड़ने से रोकने के लिए CAQM ने GRAP का तीसरा चरण लागू किया।
- 3.कम से कम 11 निगरानी केंद्रों में कण प्रदूषण के डेटा में कमी दर्ज हुई।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 गलत है: AQI 382 'अति खराब' श्रेणी (301-400) में आता है, 'गंभीर' (401-500) में नहीं। कथन 2 सही है: CAQM ने GRAP के तहत तीसरे चरण के आपातकालीन उपाय लागू किए। कथन 3 सही है: 11 केंद्रों में डेटा की कमी थी, जिनमें PM2.5 और PM10 की रीडिंग नहीं मिली।
- Q3मध्यम
समाचार के अनुसार, रिपोर्ट से पहले दिल्ली की वायु गुणवत्ता लगातार कितने दिनों तक 'अति खराब' श्रेणी में रही थी?
व्याख्या: वायु गुणवत्ता लगातार पांचवें दिन 'अति खराब' श्रेणी में रही।
- Q4मध्यम
समाचार में बताई गई दिल्ली के वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में डेटा की कमी से मुख्य चिंता क्या उठी है?
व्याख्या: CPCB की AQI पद्धति के अनुसार कम से कम तीन प्रदूषकों (PM2.5 या PM10 सहित) की कम से कम 16 घंटेवार रीडिंग चाहिए। डेटा न होने पर 'अपर्याप्त डेटा' का टैग लगता है और स्थानीय प्रदूषण दर्ज नहीं हो पाता। लागत, केंद्रों की कमी और GRAP में देरी समाचार में बताई गई मुख्य चिंताएं नहीं हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. 7 नवंबर 2026 को दिल्ली का AQI कितना था?
दिल्ली का 24 घंटे का औसत AQI 382 था, जिसे 'अति खराब' श्रेणी में रखा गया, और यह लगातार पांच दिनों से उसी श्रेणी में था।
2. दिल्ली-NCR में GRAP का तीसरा चरण किस प्राधिकरण ने लागू किया?
NCR और उससे लगे क्षेत्रों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने GRAP के तहत तीसरे चरण के आपातकालीन उपाय लागू किए।
3. दिल्ली के कितने निगरानी केंद्रों ने डेटा की कमी दर्ज की?
दिल्ली के 59 वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों में से कम से कम 11 ने PM2.5 और PM10 की रीडिंग में कमी दर्ज की, जिनमें IIT दिल्ली, नांगलोई और NSIT द्वारका पूरी तरह बंद रहे।
4. AQI की गणना के लिए घंटेवार रीडिंग न होना चिंता का विषय क्यों है?
CPCB की AQI पद्धति के अनुसार किसी केंद्र का दैनिक AQI निकालने के लिए कम से कम तीन प्रदूषकों (PM2.5 या PM10 सहित) की कम से कम 16 घंटेवार रीडिंग चाहिए। डेटा न होने पर 'अपर्याप्त डेटा' का टैग लग सकता है, जिससे स्थानीय प्रदूषण दर्ज नहीं हो पाता।
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मूल खबर7 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें

