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रनिवास टीला, पूर्वी चंपारण को AMASR अधिनियम, 1958 के तहत राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया

7 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 9 / 79

प्रिलिम्स के लिए: प्राचीन स्मारक और पुरातत्वीय स्थल तथा अवशेष (AMASR) अधिनियम, 1958, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), राष्ट्रीय महत्व का स्मारक, स्थल का नाम, क्षेत्रफल, नोडल मंत्रालय, लागू अधिनियम, लागू करने वाली एजेंसी

मेन्स के लिए: धरोहर संरक्षण, AMASR अधिनियम के प्रावधान, ASI की भूमिका, पर्यटन की संभावना, बिहार का पुरातत्व

स्रोत:The HinduThe Hindu

चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार ने बिहार के केसरिया, पूर्वी चंपारण स्थित रनिवास टीले को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया है। AMASR अधिनियम, 1958 के तहत जारी इस अधिसूचना के साथ पटना सर्कल के अंतर्गत बिहार में ASI द्वारा संरक्षित स्थलों की संख्या 70 हो गई है।

सारांश

  • बिहार के केसरिया, पूर्वी चंपारण में स्थित रनिवास टीला (1.63 एकड़) को संस्कृति मंत्रालय के राजपत्र में 4 नवंबर, 2026 की अधिसूचना के जरिए राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया।
  • यह अधिसूचना प्राचीन स्मारक और पुरातत्वीय स्थल तथा अवशेष (AMASR) अधिनियम, 1958 (1958 का 24) की धारा 4 की उप-धारा (3) के तहत जारी हुई है।
  • यह स्थल बिहार सरकार के स्वामित्व में है। अधिसूचना पर ASI के महानिदेशक यदुबीर सिंह रावत ने हस्ताक्षर किए हैं।
  • 1996 में गया स्थित शिव मंदिर को अधिसूचित किए जाने के बाद से बिहार का कोई नया स्थल ASI के अधीन नहीं लाया गया था।
  • ASI का पटना सर्कल (पहले मध्य-पूर्वी/बौद्ध सर्कल) बिहार के 70 स्थलों की देखरेख करता है। पूरे देश में ASI के पास 3,686 स्थल हैं।

मुख्य बातें

  • रनिवास टीले को राष्ट्रीय संरक्षण मिला

    पूर्वी चंपारण, बिहार का यह प्राचीन टीला AMASR अधिनियम, 1958 के तहत राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित हुआ है, जिससे बिहार में ASI द्वारा संरक्षित स्मारकों की संख्या 70 हो गई है।

  • AMASR अधिनियम के तहत कानूनी प्रक्रिया

    धारा 4(1) के तहत प्रारंभिक अधिसूचना सार्वजनिक रूप से चिपकाई गई थी। कोई आपत्ति न आने के बाद धारा 4(3) के तहत अंतिम घोषणा 4 नवंबर, 2026 को राजपत्र में प्रकाशित हुई।

  • ASI का पटना सर्कल: एक ऐतिहासिक केंद्र

    ASI के सबसे पुराने सर्कलों में से एक पटना सर्कल को पहले बौद्ध सर्कल और मध्य-पूर्वी सर्कल कहा जाता था। यह नाम इस क्षेत्र की समृद्ध बौद्ध विरासत को दर्शाता है, जिसमें नालंदा और विक्रमशिला भी शामिल हैं।

पृष्ठभूमि

पूर्वी चंपारण के केसरिया में स्थित रनिवास टीला एक प्राचीन पुरातत्वीय स्थल है। यह अधिसूचना 1996 में गया के शिव मंदिर के बाद बिहार में ASI की संरक्षित सूची में पहला नया जोड़ है, जो राज्य में विरासत संरक्षण में लंबे अंतराल को दर्शाता है। यह स्थल बिहार सरकार के स्वामित्व में है।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

इस घोषणा से यह स्थल AMASR अधिनियम, 1958 के कानूनी ढांचे में आ गया है, जो संरक्षित क्षेत्र के भीतर निर्माण, खुदाई और क्षति पर रोक लगाता है। इससे इस क्षेत्र में संरक्षण और पर्यटन की संभावना बढ़ती है। अब बिहार में 70 और भारत में 3,686 ASI-संरक्षित स्थल हैं। पटना सर्कल, जो सबसे पुराने सर्कलों में से है, मूल रूप से झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश को कवर करता था, बाद में अलग सर्कल बनाए गए।

आगे की राह

ASI अब रनिवास टीले पर संरक्षण, रख-रखाव और संभवतः खुदाई का काम करेगा। यह स्थल पर्यटकों और शोधकर्ताओं को आकर्षित कर सकता है, जिससे स्थानीय विरासत पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इस जोड़ से बिहार की पुरातात्विक संपदा पर नया ध्यान केंद्रित होने का संकेत मिलता है, और भविष्य में और स्थलों को अधिसूचित किए जाने की संभावना है।

बिहार क्षेत्र को कवर करने वाले ASI सर्कल

सर्कलस्थापना वर्ष / पहले का नामकवर किया गया क्षेत्र
पटना सर्कलपहले बौद्ध सर्कल, मध्य-पूर्वी सर्कलबिहार
रांची सर्कल2003 में स्थापितझारखंड
सारनाथ सर्कल2013 में स्थापितपूर्वी उत्तर प्रदेश

बिहार से जुड़ाव

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पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

प्राचीन स्मारक और पुरातत्वीय स्थल तथा अवशेष (AMASR) अधिनियम, 1958
संसद द्वारा बनाया गया एक अधिनियम, जो राष्ट्रीय महत्व के प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारकों, पुरातत्वीय स्थलों और अवशेषों के संरक्षण का प्रावधान करता है। यह संरक्षित क्षेत्रों के भीतर निर्माण और गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)
संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत यह प्रमुख संस्था पुरातात्विक शोध तथा राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों और स्थलों के संरक्षण व रख-रखाव के लिए ज़िम्मेदार है। इसकी स्थापना 1861 में एलेक्ज़ेंडर कनिंघम ने की थी।
राष्ट्रीय महत्व का स्मारक
केंद्र सरकार द्वारा AMASR अधिनियम के तहत घोषित वह स्थल या स्मारक, जो राष्ट्रीय महत्व का माना गया हो और इस कारण ASI के संरक्षण व रख-रखाव में आ जाए।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: रनिवास टीला, केसरिया, पूर्वी चंपारण, बिहार; 1.63 एकड़; 4 नवंबर, 2026 को अधिसूचित
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: संस्कृति मंत्रालय / भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI)
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: AMASR अधिनियम, 1958 (1958 का 24) की धारा 4(3)

यह गलती न करें!

परीक्षक ASI की स्थापना का वर्ष (1861) या पहले महानिदेशक (एलेक्ज़ेंडर कनिंघम) का नाम पूछ सकते हैं, न कि वर्तमान महानिदेशक का। वे पटना सर्कल को सारनाथ या रांची सर्कल से भ्रमित कर सकते हैं, या भारत में ASI स्थलों (3,686) बनाम बिहार (70) की कुल संख्या पूछ सकते हैं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • धरोहर संरक्षण, AMASR अधिनियम के प्रावधान, ASI की भूमिका, पर्यटन की संभावना, बिहार का पुरातत्व

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1मध्यम

    AMASR अधिनियम, 1958 के तहत किसी स्थल को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने की ज़िम्मेदारी किस मंत्रालय की है?

  2. Q2मध्यम

    निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.केसरिया स्थित रनिवास टीला 1.63 एकड़ में फैला है और बिहार सरकार के स्वामित्व में है।
    2. 2.इसे राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने की अधिसूचना प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम, 1904 के तहत जारी हुई थी।
    3. 3.ASI के पटना सर्कल को पहले बौद्ध सर्कल के नाम से जाना जाता था।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    फरवरी 2026 में संसद को दी गई जानकारी के अनुसार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में भारत में कुल कितने स्थल हैं?

  4. Q4मध्यम

    AMASR अधिनियम, 1958 के तहत किसी स्थल को 'राष्ट्रीय महत्व का स्मारक' घोषित करने का मुख्य कानूनी परिणाम क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. रनिवास टीला क्या है और यह कहां स्थित है?

रनिवास टीला बिहार के पूर्वी चंपारण ज़िले में केसरिया स्थित एक प्राचीन पुरातत्वीय स्थल है। इसे राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया है।

2. रनिवास टीले को किस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया?

यह घोषणा प्राचीन स्मारक और पुरातत्वीय स्थल तथा अवशेष (AMASR) अधिनियम, 1958 (1958 का 24) की धारा 4 की उप-धारा (3) के तहत की गई।

3. बिहार में कितने स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित हैं?

बिहार में 70 स्थल ASI के संरक्षण में हैं, जिनकी देखरेख पटना सर्कल करता है। पूरे भारत में ASI 3,686 स्थलों की रक्षा करता है।

4. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वर्तमान महानिदेशक कौन हैं?

ASI के वर्तमान महानिदेशक यदुबीर सिंह रावत हैं, जिन्होंने रनिवास टीले की अधिसूचना पर हस्ताक्षर किए।

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