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बिहार के CM ने सिंचाई के लिए खेतों तक गंगा जल पहुंचाने की घोषणा की, मुंगेर-भागलपुर के बीच 85 किमी गंगा पथ का काम 2 महीने में शुरू होगा

7 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 8 / 79

प्रिलिम्स के लिए: मरीन ड्राइव (गंगा पथ), सिंचाई, बाहरी पलायन, बिहार के मुख्यमंत्री, प्रमुख बुनियादी ढांचा, शुरू होने की समय-सीमा, रोज़गार लक्ष्य, नौकरी और उद्यमिता लक्ष्य

मेन्स के लिए: गंगा पथ, सिंचाई ढांचा, रोज़गार सृजन, पलायन पलटना

स्रोत:HindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बांध और जल संरचनाओं के ज़रिए सिंचाई के लिए गंगा नदी का पानी पहुंचाने की योजना की घोषणा की, और पुष्टि की कि मुंगेर और भागलपुर के बीच 85 किमी लंबे गंगा पथ (मरीन ड्राइव) का निर्माण दो महीने के भीतर शुरू होगा। राज्य ने 2030 तक बिहार में ही रोज़गार सृजित करने, 1 करोड़ लोगों को नौकरी और 1 करोड़ परिवारों को उद्यमिता से जोड़ने का लक्ष्य भी रखा है।

सारांश

  • बिहार के CM सम्राट चौधरी ने सिंचाई के लिए बांध और जल संरचनाओं के ज़रिए खेतों तक गंगा नदी का पानी पहुंचाने की योजना घोषित की।
  • मुंगेर-भागलपुर के 85 किमी लंबे गंगा पथ (मरीन ड्राइव) का निर्माण दो महीने के भीतर शुरू होगा, जिसका मकसद संपर्क सुधारना और अर्थव्यवस्था को गति देना है।
  • राज्य सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक बिहार का कोई भी व्यक्ति रोज़गार के लिए राज्य से बाहर न जाए, और 1 करोड़ लोगों को सरकारी नौकरी/रोज़गार से जोड़ने तथा 1 करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाने का लक्ष्य है।

मुख्य बातें

  • सिंचाई के लिए गंगा जल

    बिहार के CM ने बांध और जल संरचनाओं के ज़रिए खेतों की सिंचाई के लिए गंगा नदी का पानी पहुंचाने की योजना घोषित की।

  • मुंगेर-भागलपुर गंगा पथ

    गंगा किनारे 85 किमी लंबे मरीन ड्राइव जैसे मार्ग का निर्माण दो महीने के भीतर शुरू होगा, ताकि संपर्क सुधरे और अर्थव्यवस्था को गति मिले।

  • 2030 का रोज़गार लक्ष्य

    राज्य का लक्ष्य 2030 तक रोज़गार के लिए होने वाले मजबूरन पलायन को खत्म करना और 1 करोड़ नौकरियां व 1 करोड़ उद्यमी परिवार बनाना है।

पृष्ठभूमि

गंगा और उसकी सहायक नदियों से घिरे होने के बावजूद बिहार को सिंचाई की चुनौतियों और मौसमी बाढ़ का सामना करना पड़ता है। बांध और जल संरचनाओं के ज़रिए गंगा जल के उपयोग की नई योजना सिंचाई और बाढ़ प्रबंधन, दोनों ज़रूरतों को पूरा करने का लक्ष्य रखती है। मुंगेर-भागलपुर गंगा पथ मुंबई (मरीन ड्राइव) और पटना में बने ऐसे ही प्रोजेक्ट्स से प्रेरित बताया गया है, जिसका मकसद नदी किनारे पर्यटन और आर्थिक गतिविधि बढ़ाना है।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

सिंचाई योजना बिहार के उपजाऊ गंगा मैदानों में कृषि उत्पादकता बढ़ा सकती है और अनियमित मानसून पर निर्भरता घटा सकती है। गंगा पथ मुंगेर और भागलपुर ज़िलों के बीच सड़क संपर्क बेहतर करेगा, जिससे व्यापार और पर्यटन को सहारा मिलेगा। 1 करोड़ नौकरियों और 1 करोड़ उद्यमी परिवारों का लक्ष्य पलायन पलटने का महत्वाकांक्षी ढांचागत लक्ष्य है, जो बिहार की लंबे समय से चली आ रही सामाजिक-आर्थिक समस्या रही है।

आगे की राह

इस क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार, खासकर 2 नवंबर 2026 के शुरुआती समझौते में शामिल सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, के साथ समन्वय ज़रूरी होगा। गंगा पथ के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण मंज़ूरी अहम होंगी। सिंचाई योजना के लिए व्यवहार्यता अध्ययन और बांधों का निर्माण 2030 के रोज़गार लक्ष्य तक पहुंचने के लिए तय समय-सीमा में पूरा करना होगा।

बिहार से जुड़ाव

बिहार की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:BPSC 8/10BSSC 7/10

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

मरीन ड्राइव (गंगा पथ)
नदी या समुद्र तट के किनारे बना एक दर्शनीय मार्ग, जो अक्सर टहलने की जगह और वाहनों के लिए सड़क दोनों का काम करता है और पर्यटन व स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।
सिंचाई
फसलों की वृद्धि में मदद के लिए खेतों तक कृत्रिम रूप से पानी पहुंचाना। अनिश्चित वर्षा वाले क्षेत्रों में खेती के लिए यह अहम आधार है।
बाहरी पलायन
रोज़गार या बेहतर जीवन के लिए लोगों का अपने मूल राज्य या क्षेत्र से किसी और जगह जाना। बिहार में ऐतिहासिक रूप से बाहरी पलायन अधिक रहा है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस डेटा पर ध्यान दें: मुंगेर-भागलपुर गंगा पथ की लंबाई: 85 किमी
  • इस डेटा पर ध्यान दें: निर्माण 2 महीने के भीतर शुरू होगा (नवंबर 2026 से)
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: बिहार सरकार
  • इस डेटा पर ध्यान दें: बाहरी पलायन खत्म होने का लक्ष्य वर्ष: 2030

यह गलती न करें!

परीक्षक मुंगेर-भागलपुर गंगा पथ को मौजूदा पटना गंगा पथ से भ्रमित कर सकते हैं, या 85 किमी लंबाई को किसी दूसरी परियोजना से बदल सकते हैं। वे CM के नाम (सम्राट चौधरी) बनाम पूर्व CM (नीतीश कुमार) के बारे में भी पूछ सकते हैं। 1 करोड़ नौकरियों और 1 करोड़ उद्यमी परिवारों के लक्ष्य को आपस में मिलाया जा सकता है।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • गंगा पथ, सिंचाई ढांचा, रोज़गार सृजन, पलायन पलटना

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    मुंगेर-भागलपुर गंगा पथ परियोजना को लागू करने की मुख्य ज़िम्मेदारी किस राज्य सरकार की है?

  2. Q2कठिन

    बिहार सरकार की हाल की घोषणाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.मुंगेर-भागलपुर गंगा पथ 85 किमी लंबा होगा।
    2. 2.सिंचाई योजना में केवल सोन नदी का पानी उपयोग करने की बात है, गंगा का नहीं।
    3. 3.राज्य का लक्ष्य है कि 2030 तक बिहार का कोई भी व्यक्ति रोज़गार के लिए राज्य से बाहर न जाए।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    बिहार के CM द्वारा घोषित प्रस्तावित मुंगेर-भागलपुर गंगा पथ की लंबाई कितनी है?

  4. Q4मध्यम

    गंगा नदी के जल से सिंचाई की बिहार सरकार की योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. बिहार के CM द्वारा घोषित मुंगेर-भागलपुर गंगा पथ की लंबाई कितनी है?

मुंगेर-भागलपुर गंगा पथ 85 किमी लंबा होगा।

2. मुंगेर-भागलपुर गंगा पथ का निर्माण कब शुरू होगा?

7 नवंबर 2026 की घोषणा के दो महीने के भीतर निर्माण शुरू होगा।

3. बाहरी पलायन खत्म करने के लिए बिहार सरकार का लक्ष्य वर्ष क्या है?

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक बिहार का कोई भी व्यक्ति रोज़गार के लिए राज्य से बाहर न जाए।

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