प्रिलिम्स के लिए: नोटबंदी, चलन में नकदी (CIC), एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (UPI), घटना, नकदी बंद की गई, प्रमुख परिणाम (अधूरा लक्ष्य), नकली नोटों का रुझान, डिजिटल भुगतान का रुझान
मेन्स के लिए: नोटबंदी के उद्देश्य बनाम परिणाम, नकदी-रहित अर्थव्यवस्था, नकली मुद्रा, UPI का विस्तार
स्रोत:The Hindu
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- नोटबंदी 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषित की थी।
- भारत की चलन में मौजूद नकदी का 86% हिस्सा नोटबंदी के तहत बंद किया गया।
- RBI के आंकड़े बताते हैं कि दस वर्ष बाद भी नकदी का उपयोग जस का तस है।
- नोटबंदी के बाद नकली ₹500 के नोटों की बरामदगी बढ़ी है।
- 2016 के बाद से GDP के हिस्से के रूप में UPI लेनदेन का मूल्य लगातार बढ़ा है।
चर्चा में क्यों?
2016 की नोटबंदी के दस वर्ष बाद RBI के आंकड़े बताते हैं कि इस कदम से न नकदी का उपयोग घटा और न नकली मुद्रा पर रोक लगी। नकली ₹500 के नोटों की बरामदगी बढ़ी है, जबकि GDP के हिस्से के रूप में UPI लेनदेन लगातार बढ़ा है।
सारांश
- 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चलन में मौजूद 86% नकदी को बंद करने की घोषणा की थी।
- RBI के आंकड़े बताते हैं कि चलन में नकदी कम नहीं हुई है, और नकली नोटों की पकड़, खासकर ₹500 के नोटों की, बढ़ी है।
- GDP के प्रतिशत के रूप में UPI लेनदेन का मूल्य लगातार बढ़ा है, जो डिजिटल भुगतान की ओर बदलाव का संकेत है।
मुख्य बातें
नोटबंदी का नकदी पर असर
RBI के आंकड़े बताते हैं कि 86% मुद्रा अमान्य होने के दस वर्ष बाद भी चलन में नकदी ऊंची बनी हुई है।
नकली मुद्रा की पकड़ में बढ़ोतरी
नकली नोटों की पकड़, खासकर ₹500 के नोटों की, बढ़ी है, जिससे नोटबंदी का एक घोषित लक्ष्य कमज़ोर पड़ता है।
UPI का विस्तार जारी
GDP में UPI लेनदेन का हिस्सा लगातार बढ़ा है, जो डिजिटल भुगतान की ओर दीर्घकालिक बदलाव दिखाता है।
पृष्ठभूमि
8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने ₹500 और ₹1,000 के सभी नोट बंद करने की घोषणा की, जिसका लक्ष्य चलन में मौजूद 86% नकदी थी। घोषित उद्देश्य काले धन और नकली मुद्रा पर रोक लगाना और नकदी-रहित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना था।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
दस साल बाद RBI के आंकड़े बताते हैं कि चलन में नकदी घटी नहीं है, और नकली नोटों की पकड़, विशेषकर ₹500 के नोटों की, बढ़ी है। इससे लगता है कि इस कवायद से नकली मुद्रा रोकने का मूल लक्ष्य पूरा नहीं हुआ। फिर भी GDP के हिस्से के रूप में UPI लेनदेन लगातार बढ़ा है, जो एक समानांतर डिजिटल बदलाव को दर्शाता है और हो सकता है इस कदम से उसे गति मिली हो।
आगे की राह
नीति-निर्माताओं को नकदी प्रबंधन की रणनीति पर फिर से विचार करने और मुद्रा की सुरक्षा विशेषताओं को मज़बूत करने की ज़रूरत पड़ सकती है। UPI का लगातार विस्तार आगे के डिजिटल भुगतान अपनाने का आधार देता है, लेकिन नकदी के उपयोग का बने रहना बताता है कि आगे भी मिश्रित अर्थव्यवस्था बनी रहेगी।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- नोटबंदी
- किसी मुद्रा इकाई से वैध मुद्रा (लीगल टेंडर) का दर्जा छीन लेने की प्रक्रिया, जो अक्सर काले धन और नकली मुद्रा से निपटने के लिए अपनाई जाती है।
- चलन में नकदी (CIC)
- जनता और बैंकों के पास मौजूद भौतिक मुद्रा (नोट और सिक्के) का कुल मूल्य, जिसमें केंद्रीय बैंक के पास रखा भंडार शामिल नहीं होता।
- एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (UPI)
- राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित एक वास्तविक-समय भुगतान प्रणाली, जो मोबाइल फ़ोन के ज़रिए बैंकों के बीच लेनदेन को संभव बनाती है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस आंकड़े पर ध्यान दें: 8 नवंबर 2016 को घोषित नोटबंदी, जिसमें 86% नकदी अमान्य की गई
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: निर्दिष्ट बैंक नोट (देयताओं की समाप्ति) अधिनियम, 2017
यह गलती न करें!
परीक्षक पूछ सकते हैं कि क्या नोटबंदी अपने घोषित लक्ष्य हासिल कर पाई। आम भूल यह मान लेना है कि इससे नकदी का उपयोग या नकली नोट घटे; RBI के आंकड़े बताते हैं कि दोनों ऊंचे बने हुए हैं, और नकली नोट बढ़े हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- नोटबंदी के उद्देश्य बनाम परिणाम, नकदी-रहित अर्थव्यवस्था, नकली मुद्रा, UPI का विस्तार
कहीं अटके? एक टैप में समझें
नोटबंदी 2016 में सरकार का वह कदम था, जिसने रातोंरात भारत की 86% मुद्रा को अमान्य कर दिया, ताकि काले धन और नकली नोटों पर रोक लगे। दस वर्ष बाद RBI के आंकड़े बताते हैं कि लोग अब भी पहले जितनी ही नकदी का उपयोग करते हैं, और अधिक नकली नोट पकड़े जा रहे हैं। हालांकि UPI के ज़रिए डिजिटल भुगतान काफ़ी बढ़ा है।
- नोटबंदी 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषित की थी।
- भारत की चलन में मौजूद नकदी का 86% हिस्सा नोटबंदी के तहत बंद किया गया।
- RBI के आंकड़े बताते हैं कि दस वर्ष बाद भी नकदी का उपयोग जस का तस है।
- नोटबंदी के बाद नकली ₹500 के नोटों की बरामदगी बढ़ी है।
- 2016 के बाद से GDP के हिस्से के रूप में UPI लेनदेन का मूल्य लगातार बढ़ा है।
- अर्थव्यवस्था: मौद्रिक नीति और बैंकिंग
- शासन: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप
जुड़ी अवधारणाएँ: नोटबंदी, चलन में नकदी (CIC), एकीकृत भुगतान इंटरफ़ेस (UPI)
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
भारत में चलन में नकदी और नकली नोटों की पकड़ से जुड़े आंकड़े कौन-सी संस्था जारी करती है?
व्याख्या: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) वह केंद्रीय बैंक है जो मुद्रा का प्रबंधन करता है और चलन में नकदी व नकली नोटों के आंकड़े प्रकाशित करता है। वित्त मंत्रालय राजकोषीय नीति देखता है, NPCI डिजिटल भुगतान संभालता है, और सेबी प्रतिभूति बाज़ार का नियमन करता है।
- Q2कठिन
नोटबंदी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.नोटबंदी 8 नवंबर 2016 को घोषित की गई थी, जिसमें चलन की 86% नकदी अमान्य की गई।
- 2.RBI के आंकड़े बताते हैं कि नोटबंदी के दस वर्ष बाद चलन में नकदी में उल्लेखनीय कमी आई है।
- 3.नोटबंदी के बाद नकली ₹500 के नोटों की बरामदगी बढ़ी है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा हुई, जिसमें 86% नकदी को लक्ष्य बनाया गया था। कथन 2 गलत है, क्योंकि RBI के आंकड़े बताते हैं कि चलन में नकदी घटी नहीं, बल्कि ऊंची बनी हुई है। कथन 3 सही है: नकली ₹500 के नोटों की बरामदगी बढ़ी है। अतः विकल्प C सही है।
- Q3मध्यम
नवंबर 2016 में भारत की चलन में मौजूद नकदी का कितना प्रतिशत बंद किया गया?
व्याख्या: नोटबंदी में चलन की 86% नकदी अमान्य की गई थी। 76% और 80% कम आंकड़े हैं, जबकि 96% अधिक आंकलन है।
- Q4मध्यम
नोटबंदी के बाद लगातार बढ़ी UPI भुगतान प्रणाली का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: UPI NPCI द्वारा विकसित एक वास्तविक-समय भुगतान प्रणाली है, जो मोबाइल फ़ोन से तुरंत बैंकों के बीच लेनदेन संभव बनाती है। यह डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देती है, पर इसका मुख्य उद्देश्य नकदी को पूरी तरह बदलना नहीं है, और न ही यह RBI के मौद्रिक नियंत्रण या सरकार के राजकोषीय घाटे को घटाने का साधन है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. भारत में नोटबंदी की घोषणा कब हुई थी?
नोटबंदी की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को की थी।
2. 2016 में कितने प्रतिशत नकदी बंद की गई थी?
₹500 और ₹1,000 के नोट अमान्य करके चलन में मौजूद 86% नकदी को नोटबंदी के तहत बंद किया गया।
3. क्या RBI के आंकड़ों के अनुसार नोटबंदी ने नकदी के उपयोग को घटाया है?
नहीं, दस वर्ष बाद के RBI आंकड़े बताते हैं कि चलन में नकदी ऊंची बनी हुई है, और नकली नोटों की बरामदगी बढ़ी है।
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मूल खबर8 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें

