प्रिलिम्स के लिए: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, रक्षा निर्यात, रक्षा निर्यात (2025-26), निर्यात में निजी सेक्टर की हिस्सेदारी, निजी सेक्टर के निर्यात में वृद्धि (5 साल), DRDO द्वारा हस्तांतरित प्रौद्योगिकियां, नोडल निकाय
मेन्स के लिए: रक्षा में आत्मनिर्भर भारत; DRDO से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण; निजी सेक्टर की भागीदारी; निर्यात-आयात के रुझान में बदलाव
स्रोत:Dainik Bhaskar
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ था।
- रक्षा निर्यात में निजी सेक्टर की हिस्सेदारी 45.2% थी।
- निजी सेक्टर का रक्षा निर्यात पांच साल में 138.7% बढ़कर ₹17,353 करोड़ हो गया।
- DRDO ने निजी उद्योग को 2,372 प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित कीं।
- रक्षा उत्पादन का लक्ष्य पांच साल में ₹3 लाख करोड़ है।
चर्चा में क्यों?
भारत का रक्षा निर्यात पांच साल में 4.5 गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹38,424 करोड़ हो गया है, जो पहली बार विदेशी पूंजीगत रक्षा खरीद पर खर्च किए गए ₹37,047 करोड़ से अधिक है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा निजी उद्योग को 2,372 प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण के कारण निजी सेक्टर ने निर्यात में 45.2% का योगदान दिया।
सारांश
- भारत का रक्षा निर्यात 2025-26 में ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया, जो ₹37,047 करोड़ की विदेशी पूंजीगत रक्षा खरीद से अधिक है।
- निजी सेक्टर का रक्षा निर्यात पांच साल में 138.7% बढ़कर ₹7,271 करोड़ से ₹17,353 करोड़ हो गया।
- DRDO ने निजी उद्योग को 2,372 प्रौद्योगिकियां (मिसाइल, रडार, ड्रोन, युद्ध उपकरण) हस्तांतरित कीं।
मुख्य बातें
निर्यात ने आयात को पीछे छोड़ा
वित्त वर्ष 2025-26 में पहली बार भारत का रक्षा निर्यात (₹38,424 करोड़) विदेशी पूंजीगत रक्षा खरीद (₹37,047 करोड़) से अधिक हो गया।
निजी सेक्टर में उछाल
निजी सेक्टर का रक्षा निर्यात पांच साल में 138.7% बढ़कर ₹17,353 करोड़ हो गया, जो कुल निर्यात का 45.2% है।
DRDO प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
DRDO ने निजी उद्योग को मिसाइल, रडार, ड्रोन और युद्ध उपकरण सहित 2,372 प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित कीं।
पृष्ठभूमि
भारत ऐतिहासिक रूप से विश्व के शीर्ष पांच हथियार आयातकों में शामिल था। आयात पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने और निजी सेक्टर को शामिल करने की नीतियां शुरू कीं। DRDO का प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम, जो कुछ साल पहले शुरू हुआ था, अब मापने योग्य परिणाम दे चुका है।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
4.5 गुना निर्यात वृद्धि और निजी सेक्टर की 45.2% हिस्सेदारी भारत के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत देती है। DRDO से निजी फर्मों को 2,372 प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण ने मिसाइलों और रडार जैसे उन्नत प्रणालियों के उत्पादन को सक्षम किया है। यह रणनीतिक कमजोरियों को कम करता है और वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करता है। निजी फर्मों द्वारा ₹42,000 करोड़ की घरेलू बिक्री (DRDO को रॉयल्टी के बिना) उद्योग की परिपक्वता को और दर्शाती है।
आगे की राह
सरकार का लक्ष्य स्वदेशी रक्षा उत्पादन को वर्तमान ₹1.78 लाख करोड़ से बढ़ाकर पांच साल में ₹3 लाख करोड़ करना है। रडार, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों के सॉफ्टवेयर सोर्स कोड उद्योग जगत के साथ साझा करने से एक प्रमुख बाधा दूर होगी। निर्यात में लगातार बढ़ोतरी के लिए अनुसंधान एवं विकास में निरंतर निवेश और निजी खिलाड़ियों द्वारा प्रौद्योगिकी को तेज़ी से अपनाना ज़रूरी है।
रक्षा निर्यात बनाम विदेशी पूंजीगत खरीद (2025-26)
| पैरामीटर | मूल्य |
|---|---|
| रक्षा निर्यात | ₹38,424 करोड़ |
| विदेशी पूंजीगत रक्षा खरीद | ₹37,047 करोड़ |
| निजी सेक्टर का निर्यात (5 साल पहले) | ₹7,271 करोड़ |
| निजी सेक्टर का निर्यात (2025-26) | ₹17,353 करोड़ |
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)
- रक्षा मंत्रालय के अधीन प्रमुख एजेंसी, जो भारतीय सशस्त्र बलों के लिए रक्षा प्रौद्योगिकियां विकसित करने की जिम्मेदार है।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
- वाणिज्यिक उपयोग के लिए एक संगठन (यहां DRDO) से दूसरे (निजी उद्योग) को कौशल, ज्ञान, प्रौद्योगिकी या विनिर्माण अधिकार हस्तांतरित करने की औपचारिक प्रक्रिया।
- रक्षा निर्यात
- कोई देश विदेशी खरीदारों को सैन्य उपकरण, प्रणालियां और सेवाएं बेचता है। यह विदेश व्यापार नीति और रक्षा मंत्रालय के निर्यात नियमों के तहत होता है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- डेटा: वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़; निजी सेक्टर की हिस्सेदारी 45.2%।
- डेटा: निजी सेक्टर के रक्षा निर्यात में पांच साल में 138.7% की वृद्धि।
- डेटा: DRDO ने निजी उद्योग को 2,372 प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित कीं।
यह गलती न करें!
रक्षा निर्यात (₹38,424 करोड़) को विदेशी पूंजीगत रक्षा खरीद (₹37,047 करोड़) के साथ भ्रमित करना या निजी सेक्टर की निर्यात हिस्सेदारी (45.2%) को कुल उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी (24%) के साथ बदलना।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- रक्षा में आत्मनिर्भर भारत
- DRDO से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
- निजी सेक्टर की भागीदारी
- निर्यात-आयात के रुझान में बदलाव
कहीं अटके? एक टैप में समझें
भारत पहले अपने अधिकांश हथियार आयात करता था, लेकिन अब वह विदेशी हथियारों पर होने वाले खर्च से अधिक निर्यात करता है। निजी कंपनियां DRDO की दी हुई प्रौद्योगिकी से इन निर्यातों में बढ़ती हिस्सेदारी बना रही हैं। इससे युद्ध के दौरान सरकारी कारखानों पर भारत की निर्भरता कम होती है।
- वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ था।
- रक्षा निर्यात में निजी सेक्टर की हिस्सेदारी 45.2% थी।
- निजी सेक्टर का रक्षा निर्यात पांच साल में 138.7% बढ़कर ₹17,353 करोड़ हो गया।
- DRDO ने निजी उद्योग को 2,372 प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित कीं।
- रक्षा उत्पादन का लक्ष्य पांच साल में ₹3 लाख करोड़ है।
- अर्थव्यवस्था: रक्षा और रणनीतिक उद्योग
- सुरक्षा: रक्षा उत्पादन का स्वदेशीकरण
जुड़ी अवधारणाएँ: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, रक्षा निर्यात
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
भारत में निजी उद्योग को रक्षा प्रौद्योगिकी हस्तांतरित करने के लिए मुख्य रूप से कौन सा संगठन जिम्मेदार है?
व्याख्या: DRDO रक्षा मंत्रालय के अधीन प्रमुख रक्षा अनुसंधान एवं विकास एजेंसी है, जो प्रौद्योगिकियां विकसित करके निजी उद्योग को हस्तांतरित करती है। HAL, BEL और OFB उत्पादन इकाइयां हैं, प्राथमिक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एजेंसी नहीं।
- Q2कठिन
भारत के रक्षा निर्यात के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात देश की विदेशी पूंजीगत रक्षा खरीद से अधिक था।
- 2.वित्त वर्ष 2025-26 में निजी सेक्टर ने कुल रक्षा निर्यात में 50% से अधिक का योगदान दिया।
- 3.DRDO को अपनी प्रौद्योगिकी का उपयोग करने वाली निजी कंपनियों द्वारा दिए गए निर्यात ऑर्डर पर 2% से 5% तक रॉयल्टी मिलती है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: निर्यात (₹38,424 करोड़) विदेशी पूंजीगत खरीद (₹37,047 करोड़) से अधिक था। कथन 2 गलत है: निजी सेक्टर की हिस्सेदारी 45.2% थी, 50% से अधिक नहीं। कथन 3 सही है: DRDO को निर्यात ऑर्डर पर 2% से 5% रॉयल्टी मिलती है।
- Q3मध्यम
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से निजी सेक्टर के रक्षा निर्यात का मूल्य क्या था?
व्याख्या: 2025-26 में निजी सेक्टर का रक्षा निर्यात ₹17,353 करोड़ था। पांच साल पहले इसका मूल्य ₹7,271 करोड़ था। ₹38,424 करोड़ कुल रक्षा निर्यात है, और ₹42,000 करोड़ भारतीय सेनाओं को निजी फर्मों द्वारा की गई घरेलू बिक्री है।
- Q4मध्यम
भारत के बढ़ते रक्षा निर्यात और निजी सेक्टर की भागीदारी का प्राथमिक रणनीतिक लाभ क्या है?
व्याख्या: निजी सेक्टर की क्षमता के साथ, भारत को सैन्य संकट के दौरान हथियारों की आपूर्ति के लिए केवल सरकारी कारखानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। निर्यात शुल्क और DRDO रॉयल्टी द्वितीयक हैं। नागरिक उद्योगों में विदेशी निवेश इस रक्षा पहल से संबंधित नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात कितना था?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया, जो ₹37,047 करोड़ की विदेशी पूंजीगत रक्षा खरीद से अधिक है।
2. भारत के रक्षा निर्यात में निजी सेक्टर की हिस्सेदारी कितनी है?
वित्त वर्ष 2025-26 में निजी सेक्टर ने भारत के कुल रक्षा निर्यात में 45.2% का योगदान दिया, जिसमें उसका निर्यात पांच साल में 138.7% बढ़कर ₹17,353 करोड़ हो गया।
3. DRDO ने निजी उद्योग को कितनी प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित की हैं?
DRDO ने निजी उद्योग को मिसाइल, रडार, ड्रोन और युद्ध उपकरण सहित 2,372 प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित की हैं।
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मूल खबर8 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें

