प्रिलिम्स के लिए: बिहार विधान परिषद, एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करना, सतर्कता ब्यूरो, संस्था, शामिल एजेंसी, न्यायालय की कार्रवाई, विवादित नियुक्तियां, पुनः परीक्षा की तिथि
मेन्स के लिए: ब्लैकलिस्टिंग, भर्ती में अनियमितताएं, विधान परिषद की स्वायत्तता, राज्य सतर्कता जांच
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- बिहार विधान परिषद भर्ती घोटाले में 125 से अधिक नियुक्तियां शामिल हैं।
- परीक्षा सीएस डाटा मेशन रिसर्च सर्विस प्राइवेट लिमिटेड ने करवाई।
- पटना उच्च न्यायालय ने एजेंसी को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट किया था।
- नए नियुक्त अभ्यर्थी शॉर्टहैंड परीक्षा में नहीं पहुंचे; उनका प्रवेश रोक दिया गया है।
- 18 नवंबर 2026 को पुनः परीक्षा तय है।
चर्चा में क्यों?
बिहार विधान परिषद सचिवालय में 125 से अधिक नियुक्तियां विवादों में घिर गई हैं। यह भर्ती सीएस डाटा मेशन रिसर्च सर्विस प्राइवेट लिमिटेड नाम की उस एजेंसी के ज़रिए की गई, जिसे पटना उच्च न्यायालय ने पिछली भर्ती में गड़बड़ी के कारण तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया था। नए नियुक्त अभ्यर्थी शॉर्टहैंड परीक्षा में नहीं पहुंचे, और परिषद ने अब उनके प्रवेश पर रोक लगा दी है तथा आंतरिक जांच का आदेश दिया है।
सारांश
- बिहार विधान परिषद भर्ती घोटाले में पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल में हुई 125 से अधिक नियुक्तियां शामिल हैं।
- पटना उच्च न्यायालय द्वारा तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट की गई एजेंसी सीएस डाटा मेशन रिसर्च सर्विस प्राइवेट लिमिटेड ने परीक्षा करवाई।
- नए नियुक्त अभ्यर्थी शॉर्टहैंड परीक्षा में नहीं पहुंचे, जिसके बाद उनके प्रवेश पर रोक लगी; पुनः परीक्षा 18 नवंबर 2026 को तय है और उपस्थित न होने पर नियुक्तियां रद्द की जाएंगी।
मुख्य बातें
बिहार विधान परिषद भर्ती घोटाला
यह खुलासा होने के बाद कि परीक्षा उच्च न्यायालय द्वारा ब्लैकलिस्ट एजेंसी ने करवाई, परिषद सचिवालय की 125 से अधिक नियुक्तियां जांच के दायरे में हैं।
ब्लैकलिस्ट एजेंसी का इस्तेमाल
सीएस डाटा मेशन रिसर्च सर्विस प्राइवेट लिमिटेड को पटना उच्च न्यायालय ने पिछली उच्च न्यायालय भर्ती में गड़बड़ी के कारण तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया था।
जांच और पुनः परीक्षा का आदेश
नए नियुक्त अभ्यर्थी शॉर्टहैंड परीक्षा में नहीं पहुंचे; उनका प्रवेश रोक दिया गया है और 18 नवंबर 2026 को पुनः परीक्षा तय है।
पृष्ठभूमि
बिहार विधान परिषद, राज्य विधानमंडल का उच्च सदन, ने निजी सहायक, एलडीसी, डाटा एंट्री ऑपरेटर, आशुलिपिक और सुरक्षा प्रहरी सहित 125 से अधिक पदों पर भर्ती की। यह प्रक्रिया 2023 और 2025 के विज्ञापनों के तहत शुरू हुई और 2026 में पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल में पूरी की गई।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
मुख्य गड़बड़ी यह है कि सीएस डाटा मेशन रिसर्च सर्विस प्राइवेट लिमिटेड को काम सौंपा गया, जिसे पटना उच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय की भर्ती में घोटाले के कारण तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया था। राज्य विधानमंडल जैसी संवेदनशील भर्ती ऐसी एजेंसी को सौंपे जाने से उचित सावधानी और संभावित मिलीभगत पर गंभीर सवाल उठते हैं। सभी 7 नियुक्तियों के शॉर्टहैंड परीक्षा में न पहुंचने से यह संकेत मिलता है कि नियुक्तियां योग्यता पर आधारित नहीं रही होंगी।
बिहार से जुड़ाव
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- बिहार विधान परिषद
- बिहार राज्य विधानमंडल का उच्च सदन। यह एक स्थायी सदन है, जिसके सदस्य आंशिक रूप से स्थानीय निकायों, शिक्षकों और स्नातकों द्वारा निर्वाचित होते हैं और आंशिक रूप से राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते हैं।
- एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करना
- वह कानूनी कार्रवाई जिसमें कोई सरकारी निकाय या न्यायालय किसी निजी एजेंसी को निर्धारित अवधि के लिए भविष्य की सरकारी निविदाओं या अनुबंधों में भाग लेने से रोक देता है, आमतौर पर सिद्ध कदाचार या धोखाधड़ी के कारण।
- सतर्कता ब्यूरो
- राज्य स्तर की भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसी, जो सरकारी विभागों और सार्वजनिक कार्यालयों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की जांच करती है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस डेटा पर ध्यान दें: बिहार विधान परिषद सचिवालय में 125 से अधिक नियुक्तियां
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: बिहार विधान परिषद सचिवालय
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: पटना उच्च न्यायालय द्वारा ब्लैकलिस्टिंग
यह गलती न करें!
परीक्षक एजेंसी के नाम (सीएस डाटा मेशन रिसर्च सर्विस प्राइवेट लिमिटेड) के बारे में पूछ सकते हैं और उसे किसी अन्य एजेंसी से भ्रमित कर सकते हैं। वे यह भी पूछ सकते हैं कि ब्लैकलिस्टिंग उच्च न्यायालय ने की थी या राज्य सरकार ने।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- ब्लैकलिस्टिंग, भर्ती में अनियमितताएं, विधान परिषद की स्वायत्तता, राज्य सतर्कता जांच
कहीं अटके? एक टैप में समझें
बिहार विधान परिषद ने एक निजी एजेंसी के ज़रिए 125 से अधिक लोगों की भर्ती की। वह एजेंसी पिछली भर्ती में गड़बड़ी के कारण पटना उच्च न्यायालय द्वारा ब्लैकलिस्ट थी। नए कर्मचारियों से शॉर्टहैंड परीक्षा देने को कहा गया तो कोई नहीं पहुंचा। इसलिए परिषद ने उन्हें काम करने से रोक दिया है और जांच का आदेश दिया है।
- बिहार विधान परिषद भर्ती घोटाले में 125 से अधिक नियुक्तियां शामिल हैं।
- परीक्षा सीएस डाटा मेशन रिसर्च सर्विस प्राइवेट लिमिटेड ने करवाई।
- पटना उच्च न्यायालय ने एजेंसी को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट किया था।
- नए नियुक्त अभ्यर्थी शॉर्टहैंड परीक्षा में नहीं पहुंचे; उनका प्रवेश रोक दिया गया है।
- 18 नवंबर 2026 को पुनः परीक्षा तय है।
- राजव्यवस्था: राज्य विधानमंडल
- शासन: पारदर्शिता और जवाबदेही
जुड़ी अवधारणाएँ: बिहार विधान परिषद, एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करना, सतर्कता ब्यूरो
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
बिहार विधान परिषद सचिवालय की जिस भर्ती पर अब सवाल उठ रहे हैं, उसे किस संस्था ने करवाया?
व्याख्या: संपूर्ण भर्ती प्रक्रिया संचालित करने की जिम्मेदारी सीएस डाटा मेशन रिसर्च सर्विस प्राइवेट लिमिटेड को दी गई थी। बिहार लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग इसमें शामिल नहीं हैं। बिहार विधानसभा सचिवालय नियोक्ता है, भर्ती करने वाला नहीं।
- Q2कठिन
बिहार विधान परिषद भर्ती विवाद के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.बिहार विधान परिषद सचिवालय में 125 से अधिक पदों के लिए भर्ती हुई।
- 2.जिस एजेंसी का इस्तेमाल हुआ, उसे पटना उच्च न्यायालय ने पांच साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया था।
- 3.नए नियुक्त अभ्यर्थियों को शॉर्टहैंड परीक्षा के लिए बुलाया गया और कोई उपस्थित नहीं हुआ।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: समाचार में 125 से अधिक नियुक्तियों का उल्लेख है। कथन 2 गलत है: ब्लैकलिस्टिंग तीन साल की थी, पांच साल की नहीं। कथन 3 सही है: 7 में से किसी भी नियुक्त अभ्यर्थी ने शॉर्टहैंड परीक्षा में भाग नहीं लिया। अतः विकल्प C सही है।
- Q3मध्यम
पटना उच्च न्यायालय ने सीएस डाटा मेशन रिसर्च सर्विस प्राइवेट लिमिटेड को कितने वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट किया था?
व्याख्या: पटना उच्च न्यायालय ने एजेंसी को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट किया था।
- Q4मध्यम
इस मामले में बिहार विधान परिषद द्वारा गठित आंतरिक जांच समिति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: आंतरिक जांच समिति का गठन शिकायतों की जांच करने और नए नियुक्तों की दक्षता परखने के लिए हुआ। पुनः परीक्षा योग्यता सुनिश्चित करने का सीधा कदम है। विकल्प B बहुत सीमित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. बिहार विधान परिषद भर्ती घोटाला किस बारे में है?
बिहार विधान परिषद सचिवालय की 125 से अधिक नियुक्तियां जांच के दायरे में हैं, क्योंकि परीक्षा सीएस डाटा मेशन रिसर्च सर्विस प्राइवेट लिमिटेड नाम की उस एजेंसी ने करवाई, जिसे पटना उच्च न्यायालय ने ब्लैकलिस्ट किया था।
2. कौन-सी एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया गया था और कितने समय के लिए?
सीएस डाटा मेशन रिसर्च सर्विस प्राइवेट लिमिटेड को पिछली भर्ती में गड़बड़ी के कारण पटना उच्च न्यायालय ने तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट किया था।
3. परिषद ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
परिषद ने आंतरिक जांच समिति गठित की है, नए नियुक्तों का प्रवेश रोक दिया है और 18 नवंबर 2026 को पुनः परीक्षा तय की है।
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मूल खबर8 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
