प्रिलिम्स के लिए: सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021, अनुच्छेद 21, परोपकारी सरोगेसी, इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF), न्यायालय, पीठ, अधिनियम, उद्धृत धारा
मेन्स के लिए: प्रगतिशील व्याख्या, प्रजनन स्वायत्तता, अनुच्छेद 21, सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021, दंपत्ति एक इकाई के रूप में
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि पत्नी की 50 से अधिक उम्र अकेले किसी दंपत्ति को सरोगेसी से वंचित नहीं कर सकती।
- मामले में नासिक की 54 वर्षीय महिला और उनके 53 वर्षीय पति शामिल थे।
- अदालत ने सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की धारा 4(3)(c)(i) का हवाला दिया।
- पीठ में न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति आशीष चव्हाण शामिल थे।
- अदालत ने कहा कि प्रजनन संबंधी विकल्प अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत गरिमा का हिस्सा हैं।
चर्चा में क्यों?
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि यदि पति निर्धारित उम्र सीमा के भीतर है, तो केवल पत्नी की उम्र 50 से अधिक होने के आधार पर किसी विवाहित जोड़े को सरोगेसी से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत 54 वर्षीय महिला और उनके 53 वर्षीय पति के आवेदन को खारिज करने वाले नगर निगम के आदेश को रद्द कर दिया और पात्रता प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया।
सारांश
- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि पति सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत निर्धारित 26-55 वर्ष की उम्र सीमा के भीतर है, तो पत्नी की 50 वर्ष से अधिक उम्र किसी जोड़े को सरोगेसी से इनकार करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती।
- अदालत ने नासिक नगर निगम का वह आदेश रद्द किया, जिसमें 54 वर्षीय महिला और उनके 53 वर्षीय पति के पात्रता प्रमाण पत्र के आवेदन को खारिज किया गया था।
- अदालत ने कहा कि प्रजनन संबंधी विकल्प संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत गरिमा का हिस्सा हैं और इन्हें अंतरराष्ट्रीय मानदंडों और बदलती सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रगतिशील रूप से समझा जाना चाहिए।
मुख्य बातें
बॉम्बे HC की प्रगतिशील व्याख्या
अदालत ने कहा कि जोड़े की उम्र को एक इकाई के रूप में देखा जाना चाहिए; किसी एक साथी की उम्र सीमा से अधिक होने पर दूसरे को सरोगेसी से नहीं रोका जा सकता।
धारा 4(3)(c)(i) की जांच
नासिक नगर निगम ने इसी धारा का हवाला देकर आवेदन खारिज किया था, जिसमें पत्नी के लिए 23-50 वर्ष और पति के लिए 26-55 वर्ष की उम्र सीमा तय है।
अनुच्छेद 21 और प्रजनन अधिकार
अदालत ने पुष्टि की कि प्रजनन संबंधी विकल्प अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत गरिमा का हिस्सा हैं, इसलिए कानूनों की प्रगतिशील व्याख्या ज़रूरी है।
पृष्ठभूमि
सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 भारत में सरोगेसी को विनियमित करने के लिए बनाया गया था। यह व्यावसायिक सरोगेसी पर रोक लगाता है और पात्र दंपत्तियों के लिए केवल परोपकारी सरोगेसी की अनुमति देता है, तथा राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सरोगेसी बोर्ड की स्थापना का प्रावधान करता है। सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 सहायक प्रजनन तकनीकों को अलग से विनियमित करता है और इनके लिए नियामक बोर्ड का प्रावधान करता है। सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम की धारा 4(3)(c)(i) उम्र सीमा तय करती है: इच्छुक पत्नी की उम्र 23 से 50 वर्ष और इच्छुक पति की उम्र 26 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए। नासिक की 54 वर्षीय महिला और उनके 53 वर्षीय पति, जिन्होंने आईवीएफ के कई चक्र पूरे किए थे, को नासिक नगर निगम ने पत्नी की उम्र का हवाला देकर पात्रता प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया था।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
बॉम्बे उच्च न्यायालय का फैसला उम्र की पात्रता के लिए दंपत्ति को दो अलग व्यक्तियों के बजाय एक इकाई मानने का महत्वपूर्ण व्याख्यात्मक बदलाव लाता है। इसका अर्थ है कि यदि एक साथी उम्र सीमा के भीतर है, तो केवल दूसरे की उम्र अधिक होने के आधार पर जोड़े को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने जोर दिया कि अनुच्छेद 21 के तहत प्रजनन अधिकारों की प्रगतिशील व्याख्या अंतरराष्ट्रीय मानदंडों और बदलती सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए। यह फैसला अन्य उच्च न्यायालयों के लिए मिसाल बन सकता है और अधिनियम में भविष्य के संशोधनों को प्रभावित कर सकता है। केंद्र सरकार ने अधिक उम्र में माता-पिता बनने की क्षमता पर एक समिति की रिपोर्ट का हवाला देकर उम्र सीमा का बचाव किया था।
आगे की राह
अदालत ने नासिक नगर निगम को पात्रता प्रमाण पत्र जारी करने और जिला चिकित्सा बोर्ड को दंपत्ति की जांच करने का निर्देश दिया। यह फैसला विशेष रूप से इसी मामले पर लागू होता है, लेकिन देश भर में समान मामलों में इसका हवाला दिया जा सकता है। केंद्र सरकार दंपत्तियों के लिए उम्र की पात्रता स्पष्ट करने हेतु अधिनियम में संशोधन पर विचार कर सकती है, या निश्चित व्याख्या के लिए मामला सर्वोच्च न्यायालय तक जा सकता है। यह निर्णय सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकियों के नियमन में अधिक लचीले और अधिकार-आधारित दृष्टिकोण की ज़रूरत को भी रेखांकित करता है।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021
- भारत में सरोगेसी को विनियमित करने, व्यावसायिक सरोगेसी पर रोक लगाने और पात्र दंपत्तियों के लिए परोपकारी सरोगेसी की अनुमति देने वाला संसद का अधिनियम। इसमें राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सरोगेसी बोर्ड के गठन का प्रावधान है।
- अनुच्छेद 21
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 कहता है: 'किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से केवल विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा।' सर्वोच्च न्यायालय ने इसकी व्याख्या निजता, गरिमा और प्रजनन स्वायत्तता के अधिकार को शामिल करने के लिए व्यापक रूप से की है।
- परोपकारी सरोगेसी
- सरोगेसी का वह रूप जिसमें सरोगेट माता को चिकित्सा खर्च और बीमा कवरेज से अधिक कोई आर्थिक मुआवज़ा नहीं मिलता, जबकि व्यावसायिक सरोगेसी में भुगतान किया जाता है।
- इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF)
- एक चिकित्सा प्रक्रिया जिसमें प्रयोगशाला में शरीर के बाहर अंडाणु को शुक्राणु से निषेचित किया जाता है और बनने वाले भ्रूण को फिर गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस डेटा पर ध्यान दें: सरोगेसी अधिनियम की धारा 4(3)(c)(i) के तहत पत्नी की उम्र सीमा 23-50 वर्ष; पति की 26-55 वर्ष।
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (सरोगेसी अधिनियम के लिए)।
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की धारा 4(3)(c)(i) और संविधान का अनुच्छेद 21।
यह गलती न करें!
भ्रम यह पूछकर पैदा किया जाएगा कि क्या बॉम्बे HC ने उम्र सीमा को पूरी तरह रद्द कर दिया। सही उत्तर यह है कि अदालत ने कहा कि केवल पत्नी की उम्र एकमात्र आधार नहीं हो सकती, और दंपत्ति को एक इकाई माना जाना चाहिए। एक और भ्रम सरोगेसी अधिनियम, 2021 को सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (ART) अधिनियम, 2021 के साथ मिलाना है।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- प्रगतिशील व्याख्या, प्रजनन स्वायत्तता, अनुच्छेद 21, सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम 2021, दंपत्ति एक इकाई के रूप में
कहीं अटके? एक टैप में समझें
सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 दंपत्तियों के लिए उम्र सीमा तय करता है: पत्नी 23-50 और पति 26-55 वर्ष का होना चाहिए। 54 वर्षीय महिला और उनके 53 वर्षीय पति को पत्नी की उम्र 50 से अधिक होने के कारण पात्रता प्रमाण पत्र से इनकार कर दिया गया था। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कहा कि दंपत्ति को एक इकाई माना जाना चाहिए, इसलिए यदि पति सीमा के भीतर है तो केवल पत्नी की उम्र उन्हें नहीं रोक सकती। अदालत ने नगर निगम को प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया।
- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि पत्नी की 50 से अधिक उम्र अकेले किसी दंपत्ति को सरोगेसी से वंचित नहीं कर सकती।
- मामले में नासिक की 54 वर्षीय महिला और उनके 53 वर्षीय पति शामिल थे।
- अदालत ने सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की धारा 4(3)(c)(i) का हवाला दिया।
- पीठ में न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति आशीष चव्हाण शामिल थे।
- अदालत ने कहा कि प्रजनन संबंधी विकल्प अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत गरिमा का हिस्सा हैं।
- राजव्यवस्था: न्यायिक पुनरावलोकन और मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21)
- समाज: सामाजिक विधान और महिला मुद्दे
जुड़ी अवधारणाएँ: सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021, अनुच्छेद 21, परोपकारी सरोगेसी, इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF)
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
कौन-सा संसदीय अधिनियम भारत में सरोगेसी को विनियमित करता है और बॉम्बे उच्च न्यायालय के हालिया फैसले में उद्धृत किया गया?
व्याख्या: बॉम्बे उच्च न्यायालय का फैसला सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021, विशेष रूप से धारा 4(3)(c)(i) से संबंधित था। ART अधिनियम सहायक प्रजनन तकनीकों को विनियमित करने वाला एक अलग कानून है। MTP अधिनियम और PCPNDT अधिनियम प्रजनन स्वास्थ्य के अलग-अलग पहलुओं से जुड़े हैं।
- Q2कठिन
बॉम्बे उच्च न्यायालय के सरोगेसी उम्र सीमा संबंधी फैसले के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.अदालत ने कहा कि यदि पति उम्र सीमा के भीतर है, तो केवल पत्नी की 50 से अधिक उम्र के आधार पर किसी जोड़े को सरोगेसी से वंचित नहीं किया जा सकता।
- 2.अदालत ने सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की धारा 4(3)(c)(i) को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया।
- 3.अदालत ने कहा कि प्रजनन संबंधी विकल्प संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत गरिमा का हिस्सा हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: अदालत ने कहा कि पत्नी की 50 से अधिक उम्र अकेले सरोगेसी से इनकार का आधार नहीं हो सकती। कथन 2 गलत है: अदालत ने धारा को रद्द नहीं किया, बल्कि उसकी प्रगतिशील व्याख्या की। कथन 3 सही है: अदालत ने प्रजनन विकल्पों को स्पष्ट रूप से अनुच्छेद 21 से जोड़ा।
- Q3मध्यम
सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की धारा 4(3)(c)(i) के तहत इच्छुक पत्नी के लिए निर्धारित उम्र सीमा क्या है?
व्याख्या: सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की धारा 4(3)(c)(i) के अनुसार इच्छुक पत्नी की उम्र 23 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए। पति की उम्र 26 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए। अन्य विकल्प गलत उम्र सीमाएँ हैं।
- Q4मध्यम
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सरोगेसी उम्र सीमा पर अपने फैसले में कौन-सा प्रमुख विधिक सिद्धांत स्थापित किया?
व्याख्या: अदालत ने स्थापित किया कि दंपत्ति एक संयुक्त इकाई है; किसी एक साथी की उम्र की अयोग्यता अकेले दूसरे को नहीं रोक सकती। यह प्रगतिशील व्याख्या है, न कि पूर्ण उम्र सीमा में छूट या असंवैधानिकता की घोषणा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सरोगेसी उम्र सीमा के बारे में क्या फैसला सुनाया?
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि यदि पति सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत निर्धारित 26 से 55 वर्ष की उम्र सीमा के भीतर है, तो केवल पत्नी की 50 वर्ष से अधिक उम्र के आधार पर किसी विवाहित दंपत्ति को सरोगेसी से वंचित नहीं किया जा सकता।
2. दंपत्ति को वंचित करने के लिए सरोगेसी अधिनियम की कौन-सी धारा उद्धृत की गई थी?
नासिक नगर निगम ने सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की धारा 4(3)(c)(i) का हवाला दिया, जिसमें इच्छुक पत्नी के लिए 23 से 50 वर्ष और इच्छुक पति के लिए 26 से 55 वर्ष की उम्र सीमा तय है।
3. बॉम्बे HC ने इस फैसले में किस संवैधानिक अनुच्छेद का सहारा लिया?
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का सहारा लिया, जो जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करता है, और यह माना कि प्रजनन विकल्प व्यक्तिगत गरिमा का हिस्सा हैं।
4. बॉम्बे HC ने नासिक नगर निगम को क्या आदेश दिया?
अदालत ने नासिक नगर निगम को दंपत्ति के लिए सरोगेसी का पात्रता प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया और जिला चिकित्सा बोर्ड को उनकी जांच करने का आदेश दिया।
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मूल खबर6 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
