राजव्यवस्था

महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम में संशोधन: बड़े सहकारी बोर्डों में सरकारी नामित सदस्यों को मतदान का अधिकार

6 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 72 / 77

प्रिलिम्स के लिए: सहकारी समिति, स्पष्ट मनमानेपन का सिद्धांत, अधिकारों का छद्म प्रयोग, नोडल निकाय, अधिनियम, संबंधित धाराएँ, मुख्य घटना की तिथि, वर्तमान संदर्भ

मेन्स के लिए: सहकारी स्वायत्तता, कार्यपालिका का हस्तक्षेप, स्पष्ट मनमानापन, न्यायिक प्रक्रिया

स्रोत:Indian ExpressIndian Express

चर्चा में क्यों?

महाराष्ट्र कैबिनेट ने महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम में संशोधन को मंज़ूरी दी है, जिससे सरकार द्वारा नामित निदेशक बड़े सहकारी महासंघों के बोर्डों में, पदाधिकारियों के चुनाव सहित, मतदान कर सकें। भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई ने इस कदम का विरोध किया है। यह कदम कोल्हापुर की गोकुल डेयरी में कोरम संकट के बाद उठाया गया है, जब महायुति समर्थित पैनल ने अध्यक्ष के चुनाव का बहिष्कार किया था। बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 10 नवंबर को नया चुनाव कराने का आदेश दिया है।

सारांश

  • यह संशोधन सरकारी सहायता प्राप्त करने वाले बड़े सहकारी महासंघों, जैसे गोकुल डेयरी, को ध्यान में रखकर किया गया है।
  • महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम की धारा 73AAA और 27(9) के मौजूदा कानून के तहत नामित निदेशकों को पदाधिकारियों के चुनाव में मतदान करने से रोका गया है।
  • भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई ने कहा कि ऐसे मतदान की अनुमति देना "स्पष्ट रूप से मनमाना" और अधिकारों का "छद्म प्रयोग" होगा।

मुख्य बातें

  • गोकुल डेयरी में कोरम संकट

    महायुति समर्थित पैनल ने अध्यक्ष की बैठक का बहिष्कार किया, जिससे कोरम नहीं बन पाया; विरोधी पैनल ने एकतरफा अध्यक्ष चुना, जिसे मान्यता नहीं मिली।

  • पूर्व मुख्य न्यायाधीश की कानूनी राय

    भूषण गवई ने कहा कि सरकार द्वारा नामित निदेशकों को पदाधिकारी चुनाव में मतदान की अनुमति देना स्पष्ट रूप से मनमाना होगा और उच्च न्यायालय की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करेगा।

  • कैबिनेट संशोधन

    4 नवंबर को राज्य कैबिनेट ने बड़े सहकारी महासंघों के बोर्डों में सरकार द्वारा नामित चार सदस्यों को मतदान का अधिकार देने के संशोधन को मंज़ूरी दी।

पृष्ठभूमि

महाराष्ट्र की सबसे बड़ी दूध सहकारी संस्था गोकुल डेयरी के 25 सदस्यीय बोर्ड के हाल के चुनाव में कांग्रेस समर्थित पैनल को 13 और महायुति समर्थित पैनल को 12 सीटें मिलीं। महायुति पैनल ने 29 अक्टूबर को अध्यक्ष चुनाव की बैठक का बहिष्कार किया, जिससे कोरम (14 निदेशक आवश्यक) नहीं बन सका। इसके बाद बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 10 नवंबर को नया चुनाव कराने का आदेश दिया।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम में यह संशोधन सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल उठाता है। धारा 73AAA और 27(9) अभी नामित निदेशकों को पदाधिकारी चुनाव में मतदान से रोकती हैं। सरकारी नामितों को मतदान की अनुमति देना, खासकर चुनावी हार के बाद, सहकारी संस्थाओं की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कार्यपालिका का हस्तक्षेप माना जा सकता है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश की राय से ऐसे कदम की कानूनी कमजोरी सामने आती है।

आगे की राह

अध्यक्ष चुनाव के लिए बॉम्बे उच्च न्यायालय की 10 नवंबर की समय-सीमा अहम है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश की राय और लंबित न्यायिक प्रक्रिया को देखते हुए राज्य के अध्यादेश को अदालत में चुनौती मिल सकती है। महायुति गठबंधन के भीतर, खासकर शिवसेना की कथित नाराज़गी, संशोधन के अंतिम स्वरूप को प्रभावित कर सकती है।

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

सहकारी समिति
व्यक्तियों का एक स्वैच्छिक संगठन, जो संयुक्त रूप से स्वामित्व वाले और लोकतांत्रिक रूप से नियंत्रित उद्यम के माध्यम से अपनी साझा आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक ज़रूरतें पूरी करने के लिए बनता है।
स्पष्ट मनमानेपन का सिद्धांत
कानूनी सिद्धांत कि कोई कानून या कार्यपालिका की कार्रवाई असंवैधानिक है, यदि वह देखने में ही मनमानी, अनुचित या सनकी है।
अधिकारों का छद्म प्रयोग
संवैधानिक सिद्धांत जिसमें विधायिका अपनी शक्ति के भीतर काम करती दिखती है, पर वास्तव में ऐसी शक्ति का अतिक्रमण करती है जो उसके पास नहीं है, जिससे कानून अवैध हो जाता है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस डेटा पर ध्यान दें: 4 नवंबर 2026 (कैबिनेट मंज़ूरी); 10 नवंबर (उच्च न्यायालय द्वारा आदेशित चुनाव)
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: महाराष्ट्र सरकार (सहकारिता विभाग)
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम की धारा 73AAA और 27(9)

यह गलती न करें!

प्रश्न में इस संशोधन को राष्ट्रीय स्तर के बहु-राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम में बदलाव से भ्रमित किया जा सकता है। साथ ही, "नामित निदेशक सभी सहकारी संस्थाओं में मतदान कर सकते हैं" कहकर भी जाल बिछाया जा सकता है, जबकि संशोधन केवल सरकारी सहायता प्राप्त बड़े महासंघों पर लागू होता है।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • सहकारी स्वायत्तता, कार्यपालिका का हस्तक्षेप, स्पष्ट मनमानापन, न्यायिक प्रक्रिया

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

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  1. Q1आसान

    महाराष्ट्र में सहकारी सोसायटियों को कौन-सा अधिनियम नियंत्रित करता है?

  2. Q2कठिन

    महाराष्ट्र कैबिनेट के संशोधन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.इस संशोधन से सरकार द्वारा नामित निदेशक महाराष्ट्र की सभी सहकारी सोसायटियों के बोर्डों में मतदान कर सकते हैं।
    2. 2.पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई ने कहा कि ऐसे मतदान की अनुमति देना स्पष्ट रूप से मनमाना होगा।
    3. 3.बॉम्बे उच्च न्यायालय ने गोकुल डेयरी के अध्यक्ष के लिए 10 नवंबर 2026 को नया चुनाव कराने का आदेश दिया।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    महाराष्ट्र कैबिनेट ने सहकारी सोसायटी अधिनियम में संशोधन को किस तिथि को मंज़ूरी दी?

  4. Q4मध्यम

    संशोधन को लेकर पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई की मुख्य चिंता क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. महाराष्ट्र कैबिनेट ने 4 नवंबर 2026 को क्या मंज़ूर किया?

कैबिनेट ने महाराष्ट्र सहकारी सोसायटी अधिनियम में संशोधन को मंज़ूरी दी, जिससे सरकार द्वारा नामित निदेशक सरकारी सहायता प्राप्त बड़े सहकारी महासंघों के बोर्डों में मतदान कर सकें।

2. गोकुल डेयरी के अध्यक्ष चुनाव में कोरम क्यों नहीं बन पाया?

बैठक इसलिए विफल हुई क्योंकि 25 निर्वाचित निदेशकों में से केवल 13 ही उपस्थित हुए, जबकि नियमों के अनुसार कोरम के लिए 14 चाहिए। महायुति समर्थित 12 निदेशक अनुपस्थित रहे।

3. पूर्व मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई ने संशोधन के बारे में क्या कहा?

गवई की राय थी कि नामित निदेशकों को पदाधिकारी चुनाव में मतदान की अनुमति देना स्पष्ट रूप से मनमाना होगा, और उच्च न्यायालय के आदेश वाले चुनाव से पहले अध्यादेश जारी करना न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करेगा।

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