प्रिलिम्स के लिए: न्यायालय की अवमानना, शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009, अनुच्छेद 21-A, नोडल निकाय, न्यायालय, न्यायाधीश, भर्ती, मुख्य आदेश की तारीख
मेन्स के लिए: न्यायिक जवाबदेही, कार्यपालिका का अनुपालन, RTE अधिनियम की धारा 27, न्यायालय की अवमानना, अनुच्छेद 21-A
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 69,000 शिक्षक भर्ती मामले में अवमानना पर बेसिक शिक्षा सचिव को चेतावनी दी।
- कोर्ट ने अगस्त 2021 में 2,249 प्रभावित अभ्यर्थियों को एक अतिरिक्त अंक देने का आदेश दिया था।
- कोर्ट ने शिक्षकों को BLO ड्यूटी से छूट देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी की अनुमति देती है।
- इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पीयूष ने की।
चर्चा में क्यों?
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के 69,000 शिक्षक भर्ती मामले में अपने आदेशों की जानबूझकर की जा रही अवहेलना को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा सचिव को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में या तो अनुकूल आदेश पेश करें, या व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अवमानना की कार्यवाही का सामना करें।
सारांश
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय अरुण परमार की अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें 69,000 शिक्षक भर्ती में अगस्त 2021 के उसके आदेश का पालन न किए जाने का आरोप है।
- कोर्ट ने शैक्षिक परिभाषा वाले प्रश्न पर प्रभावित अभ्यर्थियों को एक अतिरिक्त अंक देकर मेरिट के आधार पर चयन करने का आदेश दिया था।
- बेसिक शिक्षा विभाग ने अंतिम सूची जारी न करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में लंबित विशेष अनुमति याचिका (रवि कुमार सक्सेना बनाम उप्र राज्य) का हवाला दिया।
मुख्य बातें
अवमानना की कार्यवाही शुरू
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बेसिक शिक्षा सचिव को 2021 के आदेश का पालन करने या अवमानना कार्रवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की चेतावनी दी।
शिक्षकों की BLO ड्यूटी की चुनौती खारिज
उच्च न्यायालय ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 का हवाला देते हुए शिक्षकों को BLO ड्यूटी से छूट देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
पृष्ठभूमि
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अगस्त 2021 में निर्देश दिया था कि 69,000 शिक्षक भर्ती में विवादित शैक्षिक परिभाषा वाले प्रश्न से प्रभावित अभ्यर्थियों को एक अतिरिक्त अंक दिया जाए और मेरिट के आधार पर चयन किया जाए। राज्य सरकार की इस आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। इसके बावजूद बेसिक शिक्षा परिषद ने आदेश लागू नहीं किया, जिसके बाद अवमानना याचिका दायर हुई।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
कोर्ट का सख्त रुख अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत अपने आदेशों को लागू कराने की न्यायपालिका की शक्ति को सामने लाता है। यह मामला कार्यपालिका की देरी (लंबित सर्वोच्च न्यायालय मामलों का हवाला) और न्यायिक निर्देशों के बीच के तनाव को भी दिखाता है। BLO ड्यूटी पर अलग आदेश से स्पष्ट होता है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 के तहत शिक्षकों को चुनाव संबंधी काम सौंपा जा सकता है, और अनुच्छेद 21-A के उल्लंघन का तर्क खारिज किया गया।
आगे की राह
बेसिक शिक्षा सचिव को अगली सुनवाई तक अनुपालन आदेश पेश करना होगा, नहीं तो व्यक्तिगत उपस्थिति और संभावित अवमानना कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। 18 नवंबर को सर्वोच्च न्यायालय में संबंधित विशेष अनुमति याचिका की सुनवाई से स्थिति कुछ साफ हो सकती है। BLO ड्यूटी पर फैसला इस मिसाल को मजबूत करता है कि शिक्षक संवैधानिक आधार पर चुनाव ड्यूटी से इनकार नहीं कर सकते।
उत्तर प्रदेश से जुड़ाव
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पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- न्यायालय की अवमानना
- न्यायालयों की वह शक्ति जिससे वे न्याय प्रशासन में बाधा डालने या अदालती आदेशों की अवहेलना करने वालों को दंडित कर सकते हैं। इसे अवमानना अधिनियम, 1971 नियंत्रित करता है।
- शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009
- 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रावधान करने वाला अधिनियम, जो शिक्षकों और प्राधिकारियों के कर्तव्य भी तय करता है।
- अनुच्छेद 21-A
- एक संवैधानिक प्रावधान जो 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आँकड़ों पर ध्यान दें: 69,000 शिक्षक भर्ती, 2,249 प्रभावित अभ्यर्थी, 25 अगस्त 2021 का आदेश
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद
- इन कानूनी बिंदुओं पर ध्यान दें: शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 (शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी की अनुमति), अवमानना अधिनियम, 1971
यह गलती न करें!
परीक्षक पूछ सकते हैं कि क्या कोर्ट ने शिक्षकों को BLO ड्यूटी से छूट दी (नहीं दी, बल्कि याचिका खारिज की)। वे एक अंक के विवाद को परीक्षा पैटर्न या पाठ्यक्रम में बदलाव से भी भ्रमित कर सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- न्यायिक जवाबदेही, कार्यपालिका का अनुपालन, RTE अधिनियम की धारा 27, न्यायालय की अवमानना, अनुच्छेद 21-A
कहीं अटके? एक टैप में समझें
इलाहाबाद उच्च न्यायालय इस बात से नाराज है कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद ने कुछ शिक्षक अभ्यर्थियों को अतिरिक्त अंक देने के 2021 के आदेश का पालन नहीं किया। कोर्ट ने शिक्षा सचिव से कहा है कि या तो आदेश का पालन करें या अवमानना कार्रवाई का सामना करने के लिए व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित हों। एक अलग मामले में कोर्ट ने यह भी कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम इसकी अनुमति देता है, इसलिए चुनाव के दौरान शिक्षकों को BLO के रूप में काम करने को कहा जा सकता है।
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 69,000 शिक्षक भर्ती मामले में अवमानना पर बेसिक शिक्षा सचिव को चेतावनी दी।
- कोर्ट ने अगस्त 2021 में 2,249 प्रभावित अभ्यर्थियों को एक अतिरिक्त अंक देने का आदेश दिया था।
- कोर्ट ने शिक्षकों को BLO ड्यूटी से छूट देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी की अनुमति देती है।
- इस मामले की सुनवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पीयूष ने की।
- राजव्यवस्था: न्यायपालिका और न्यायालय की अवमानना
- शासन: शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009
जुड़ी अवधारणाएँ: न्यायालय की अवमानना, शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009, अनुच्छेद 21-A
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
उत्तर प्रदेश में 69,000 शिक्षक भर्ती को लागू करने की मुख्य ज़िम्मेदारी किस निकाय की है?
व्याख्या: उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद राज्य में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक बेसिक शिक्षा का नोडल निकाय है और ऐसे पदों की भर्ती संभालती है। UPPSC उच्च स्तर की भर्ती देखता है, जबकि माध्यमिक शिक्षा परिषद हाई स्कूल और इंटरमीडिएट से जुड़ा है। शिक्षा मंत्रालय एक केंद्रीय निकाय है और राज्य की शिक्षक भर्ती में सीधे शामिल नहीं है।
- Q2कठिन
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हालिया आदेशों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.कोर्ट ने बेसिक स्कूलों के शिक्षकों को BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) ड्यूटी से छूट देने का आदेश दिया।
- 2.कोर्ट ने 69,000 शिक्षक भर्ती मामले में अपने 2021 के आदेश का पालन न करने पर बेसिक शिक्षा सचिव को चेतावनी दी।
- 3.कोर्ट ने शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी की अनुमति देने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 का हवाला दिया।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 गलत है क्योंकि कोर्ट ने BLO ड्यूटी से छूट की याचिका खारिज की। कथन 2 सही है क्योंकि कोर्ट ने सचिव को गैर-अनुपालन पर चेतावनी दी। कथन 3 सही है क्योंकि कोर्ट ने शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी सौंपने के समर्थन में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 का सहारा लिया। अतः विकल्प C सही है।
- Q3मध्यम
69,000 शिक्षक भर्ती मामले में एक अंक के विवाद से कितने अभ्यर्थी प्रभावित हुए?
व्याख्या: परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव ने एक अंक के विवाद से प्रभावित 2,249 अभ्यर्थियों की सूची तैयार की।
- Q4मध्यम
शिक्षकों की BLO ड्यूटी पर उच्च न्यायालय के आदेश का मुख्य कानूनी निहितार्थ क्या है?
व्याख्या: कोर्ट ने माना कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 शिक्षकों को BLO ड्यूटी सहित चुनाव संबंधी कार्यों में तैनात करने की अनुमति देती है। इसका अर्थ है कि ऐसी ड्यूटी कानूनन वैध है और न अधिनियम का, न अनुच्छेद 21-A का उल्लंघन है। विकल्प A, B और D कोर्ट के फैसले के उलट कथन हैं, इसलिए गलत हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. उत्तर प्रदेश के 69,000 शिक्षक भर्ती मामले में क्या विवाद है?
यह उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती को लेकर है, जहां शैक्षिक परिभाषा वाले प्रश्न पर एक अंक के विवाद से कोर्ट केस शुरू हुआ।
2. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बेसिक शिक्षा सचिव को चेतावनी क्यों दी?
कोर्ट ने सचिव को अगस्त 2021 के उस आदेश की जानबूझकर अवहेलना के लिए चेतावनी दी, जिसमें प्रभावित अभ्यर्थियों को एक अतिरिक्त अंक देकर मेरिट के आधार पर चयन करना था।
3. क्या उत्तर प्रदेश में शिक्षकों को BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) ड्यूटी सौंपी जा सकती है?
हां, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला दिया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 के तहत शिक्षकों को BLO ड्यूटी सौंपी जा सकती है।
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मूल खबर8 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
