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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यूपी के प्राथमिक शिक्षकों की BLO ड्यूटी के खिलाफ याचिका खारिज की, कहा शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 27 लागू है

8 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 35 / 39

प्रिलिम्स के लिए: भारत के संविधान का अनुच्छेद 324, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), न्यायालय, याचिकाकर्ता, उद्धृत मुख्य कानूनी प्रावधान, अन्य कानूनी प्रावधान, वर्तमान संदर्भ

मेन्स के लिए: न्यायिक व्याख्या, RTE अधिनियम के अपवाद, निर्वाचन आयोग की शक्तियां, अनुच्छेद 324

स्रोत:HindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यूपी के प्राथमिक स्कूल शिक्षकों की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) ड्यूटी से छूट मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 शिक्षकों को चुनाव संबंधी काम में लगाने की अनुमति देती है। कोर्ट के अनुसार, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावी ड्यूटी गैर-शैक्षणिक काम पर आपत्तियों से ऊपर है।

सारांश

  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सहारनपुर, उत्तर प्रदेश के बेसिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के सहायक अध्यापकों की उस याचिका को खारिज किया जिसमें उनकी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के रूप में तैनाती को चुनौती दी गई थी।
  • कोर्ट ने कहा कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धारा 27 शिक्षकों को चुनाव संबंधी ड्यूटी में लगाने की स्पष्ट अनुमति देती है।
  • न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत मतदाता सूची तैयार करना संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत एक वैधानिक काम है, और ऐसी ड्यूटी पर लगे शिक्षक निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्त माने जाएंगे।

मुख्य बातें

  • न्यायालय का फैसला

    इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शिक्षकों की BLO ड्यूटी के खिलाफ याचिका खारिज की और कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत चुनाव संबंधी काम वैध है।

  • कानूनी आधार

    शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी में लगाने की अनुमति देती है, और अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग को चुनावों की देखरेख का अधिकार देता है।

  • प्रभाव

    यूपी के प्राथमिक शिक्षक गैर-शैक्षणिक काम से पढ़ाई में बाधा का तर्क देकर BLO ड्यूटी से छूट का दावा नहीं कर सकते।

पृष्ठभूमि

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों (प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल) को मतदाता सूची तैयार करने और संशोधन सहित चुनाव संबंधी काम के लिए BLO के रूप में ड्यूटी सौंपी गई थी। सहारनपुर जिले के पांच शिक्षकों ने, जिनकी अगुवाई आज़रा परवीन कर रही थीं, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उनका तर्क था कि ऐसी गैर-शैक्षणिक ड्यूटी उनकी सेवा शर्तों, अनुच्छेद 21-A (शिक्षा का अधिकार) और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के खिलाफ है।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 चुनाव संबंधी ड्यूटी के लिए साफ़ अपवाद बनाती है। फैसले से यह पुष्टि होती है कि मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार शिक्षकों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत वैधानिक चुनावी काम करने से नहीं रोकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान का अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग को चुनाव कार्य के लिए शिक्षकों सहित सरकारी कर्मचारियों की तैनाती का अधिकार देता है। इस फैसले से मिसाल बनी है कि यूपी और संभवतः अन्य राज्यों के शिक्षक केवल शिक्षण के आधार पर BLO ड्यूटी से इनकार नहीं कर सकते।

आगे की राह

यह फैसला यूपी के हज़ारों शिक्षकों के लिए कानूनी स्थिति स्पष्ट करता है, जो अभी सेवा में हैं या भविष्य के चुनावों में BLO ड्यूटी के लिए बुलाए जा सकते हैं। राज्य सरकारें मतदाता सूची और मतदान संबंधी काम के लिए शिक्षकों की तैनाती जारी रख सकती हैं। याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय में अपील पर विचार कर सकते हैं, लेकिन कानूनी ढांचा मौजूदा फैसले का मज़बूत समर्थन करता है।

उत्तर प्रदेश से जुड़ाव

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पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

भारत के संविधान का अनुच्छेद 324
संसद, राज्य विधानमंडलों तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति भारत निर्वाचन आयोग में निहित करता है।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950
वह अधिनियम जो सीटों के आवंटन, निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन और मतदाता सूचियों की तैयारी का प्रावधान करता है। धारा 13CC मतदाता सूची के काम में सरकारी कर्मचारियों की तैनाती से संबंधित है।
बूथ लेवल ऑफिसर (BLO)
निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त सरकारी अधिकारी, जो मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करता है और मतदान केंद्र क्षेत्र में मतदाताओं की सहायता करता है। BLO आम तौर पर राज्य सरकार के विभागों से लिए जाते हैं।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस डेटा पर ध्यान दें: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 8 नवंबर 2026 को याचिका खारिज की
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: धारा 27, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009

यह गलती न करें!

परीक्षक शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 27 (जो चुनाव ड्यूटी की अनुमति देती है) को अधिनियम के तहत गैर-शैक्षणिक काम की सामान्य मनाही से भ्रमित कर सकते हैं। वे 'RTE अधिनियम की धारा 27' को 'लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC' से बदल सकते हैं या यह दावा कर सकते हैं कि कोर्ट ने शिक्षकों को छूट दी थी।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • न्यायिक व्याख्या, RTE अधिनियम के अपवाद, निर्वाचन आयोग की शक्तियां, अनुच्छेद 324

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1मध्यम

    बच्चों के मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की कौन-सी धारा शिक्षकों को चुनाव संबंधी ड्यूटी में लगाने की अनुमति देती है?

  2. Q2कठिन

    BLO ड्यूटी पर शिक्षकों से संबंधित इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.कोर्ट ने प्राथमिक शिक्षकों की उस याचिका को खारिज किया जिसमें BLO ड्यूटी से छूट मांगी गई थी।
    2. 2.कोर्ट ने माना कि BLO ड्यूटी संविधान के अनुच्छेद 21-A का उल्लंघन करती है।
    3. 3.कोर्ट ने शिक्षकों के लिए चुनाव संबंधी काम की अनुमति देने वाली धारा के रूप में RTE अधिनियम, 2009 की धारा 27 का हवाला दिया।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3आसान

    यूपी के प्राथमिक शिक्षकों की BLO ड्यूटी के खिलाफ याचिका किस न्यायालय ने खारिज की?

  4. Q4मध्यम

    यूपी के प्राथमिक शिक्षकों के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले का मुख्य प्रभाव क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. यूपी के शिक्षकों की BLO ड्यूटी पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने क्या फैसला दिया?

कोर्ट ने प्राथमिक शिक्षकों की BLO ड्यूटी से छूट की याचिका खारिज की और कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 शिक्षकों को चुनाव संबंधी काम में लगाने की अनुमति देती है।

2. इस मामले में याचिकाकर्ता कौन थे?

याचिका सहारनपुर जिले, उत्तर प्रदेश के जूनियर/सीनियर बेसिक स्कूलों की सहायक अध्यापक आज़रा परवीन और चार अन्य ने दायर की थी।

3. कोर्ट ने अपने फैसले में और कौन-से कानून उद्धृत किए?

कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 324, अनुच्छेद 21-A और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13CC का हवाला दिया।

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