पर्यावरण

MNRE ने 2035 तक सौर मॉड्यूल कचरा पुनर्चक्रण के लिए दिशानिर्देश बनाने की योजना बनाई, चक्रीय अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

5 नवंबर 20263 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 38 / 101

प्रिलिम्स के लिए: चक्रीय अर्थव्यवस्था, ई-कचरा (प्रबंधन) नियम, सौर फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्यूल, थर्मोसेटिंग पॉलीमर, नोडल मंत्रालय, वर्तमान नियमन, 2030 तक अनुमानित कचरा, 2047 तक आवश्यक प्रसंस्करण क्षमता

मेन्स के लिए: चक्रीय अर्थव्यवस्था, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR), ई-कचरा प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा की स्थिरता, महत्वपूर्ण खनिजों की पुनःप्राप्ति

स्रोत:Indian ExpressIndian Express

चर्चा में क्यों?

भारत का नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) सौर मॉड्यूल के पुनर्चक्रण को अनिवार्य करने वाले दिशानिर्देश तैयार कर रहा है। इसका मकसद 2033-35 से कचरे की मात्रा तेज़ी से बढ़ने से पहले चक्रीय अर्थव्यवस्था खड़ी करना है। अनुमान है कि 2030 तक संचित सौर कचरा लगभग 600 किलो-टन होगा। इस कदम के तहत निर्माताओं को ऐसे मॉड्यूल बनाने होंगे जिनका पुनर्चक्रण आसानी से हो सके।

सारांश

  • MNRE सौर मॉड्यूल कचरे के पुनर्चक्रण के लिए दिशानिर्देश तैयार कर रहा है, जिसमें निर्माताओं के लिए अधिक पुनर्चक्रण-योग्य मॉड्यूल बनाना अनिवार्य किया जाएगा।
  • भारत में 2030 तक संचित सौर कचरा लगभग 600 किलो-टन तक पहुंच सकता है; 2047 तक 3,600 टन वार्षिक प्रसंस्करण क्षमता की ज़रूरत होगी।
  • अभी सौर मॉड्यूल का पुनर्चक्रण ई-कचरा नियमों के तहत आता है, जिसमें 2035 तक कचरे वाले मॉड्यूल को पर्याप्त मात्रा जमा होने तक भंडारित रखना अनिवार्य है।

मुख्य बातें

  • चक्रीय अर्थव्यवस्था पर ज़ोर

    MNRE सौर मॉड्यूल के पुनर्चक्रण को अनिवार्य करने के दिशानिर्देश बना रहा है, ताकि 2033 से कचरे की मात्रा चरम पर पहुंचने से पहले सामग्री का दोबारा उपयोग हो सके।

  • कचरे के अनुमान

    भारत में संचित सौर कचरा 2030 तक 600 किलो-टन तक पहुंच सकता है, जिसके लिए 2047 तक 3,600 टन की वार्षिक पुनर्चक्रण क्षमता चाहिए।

  • तकनीक और लागत की चुनौतियाँ

    पुनर्चक्रण की लागत ₹883-1,079 प्रति मॉड्यूल है; निवेश का 45-50% मशीनरी पर जाता है और परिचालन लागत का 56-68% मॉड्यूल की खरीद पर।

पृष्ठभूमि

भारत की सौर क्षमता तेज़ी से बढ़ी है, लेकिन उपयोग-अवधि पूरी होने के बाद के कचरे के प्रबंधन को प्राथमिकता नहीं दी गई। अभी सौर मॉड्यूल ई-कचरा नियमों से चलते हैं, जिनके तहत 2035 तक कचरे वाले मॉड्यूल भंडारित रखने होते हैं, जब पुनर्चक्रण के लिए पर्याप्त मात्रा होने की उम्मीद है। अब MNRE पुनर्चक्रण-योग्य डिज़ाइन अनिवार्य करने और पुनर्चक्रण प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने के लिए अलग दिशानिर्देश बनाने की योजना बना रहा है।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

दिशानिर्देशों के तहत निर्माताओं को अधिक पुनर्चक्रण-योग्य मॉड्यूल बनाने होंगे, जिससे देश में चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। 2030 तक संचित कचरा 600 किलो-टन और 2047 तक वार्षिक प्रसंस्करण ज़रूरत 3,600 टन अनुमानित है, इसलिए जल्द कदम उठाना ज़रूरी है। ऊँची पुनर्चक्रण लागत (प्रति मॉड्यूल ₹883-1,079) और पवन टरबाइन ब्लेड व एपॉक्सी के लिए तकनीकी समाधानों की कमी अब भी चुनौती हैं। CEEW के अध्ययन के अनुसार निवेश में सबसे बड़ा हिस्सा मशीनरी का है (45-50%), जबकि परिचालन में सबसे बड़ा खर्च मॉड्यूल की खरीद का है (56-68%)।

आगे की राह

MNRE हितधारकों से परामर्श कर रहा है और दिशानिर्देशों को जल्द अंतिम रूप देना चाहता है। Suzlon और Aditya Birla की साझेदारी के बाद पवन टरबाइन ब्लेड के पुनर्चक्रण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की योजना भी है। ये दिशानिर्देश नया पुनर्चक्रण उद्योग खड़ा कर सकते हैं, कच्चे माल के आयात पर निर्भरता घटा सकते हैं और भारत के जलवायु लक्ष्यों से मेल खा सकते हैं। 2035 की भंडारण अनिवार्यता इस बीच के समय को संक्रमण काल के रूप में देखती है।

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

चक्रीय अर्थव्यवस्था
एक आर्थिक मॉडल, जिसका उद्देश्य सामग्री का दोबारा उपयोग, मरम्मत, नवीनीकरण और पुनर्चक्रण करके कचरा घटाना और संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना है। यह पारंपरिक 'लो-बनाओ-फेंको' रैखिक मॉडल से अलग है।
ई-कचरा (प्रबंधन) नियम
भारत के वे नियम, जो विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के संग्रह, भंडारण, परिवहन और पुनर्चक्रण को नियंत्रित करते हैं, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
सौर फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्यूल
ऐसा उपकरण जो अर्धचालक सामग्री की मदद से सूर्य के प्रकाश को बिजली में बदलता है। इसमें कई सौर सेल, फ्रेम, काँच और एनकैप्सुलेंट सामग्री होती है।
थर्मोसेटिंग पॉलीमर
एक प्रकार का पॉलीमर, जो गर्मी या रासायनिक अभिक्रिया से एक बार सख्त (क्योर) हो जाने पर दोबारा पिघलाया या नया आकार नहीं दिया जा सकता। एपॉक्सी पवन टरबाइन ब्लेड में इस्तेमाल होने वाला एक आम थर्मोसेटिंग पॉलीमर है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इन आँकड़ों पर ध्यान दें: 2030 तक संचित सौर कचरा 600 किलो-टन; 2047 तक 3,600 टन वार्षिक प्रसंस्करण क्षमता की ज़रूरत
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE)
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: ई-कचरा (प्रबंधन) नियम (समर्पित दिशानिर्देश बनने तक सौर मॉड्यूल का कचरा इन्हीं के तहत)

यह गलती न करें!

समय-सीमा में भ्रम से बचें: कचरे का भंडारण 2035 तक अनिवार्य है (2030 तक नहीं), और पुनर्चक्रण 2035 के बाद शुरू होगा। साथ ही '2030 तक संचित कचरा' को '2030 में वार्षिक कचरा' से न मिलाएँ।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • चक्रीय अर्थव्यवस्था, विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR), ई-कचरा प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा की स्थिरता, महत्वपूर्ण खनिजों की पुनःप्राप्ति

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    भारत में सौर मॉड्यूल कचरे के पुनर्चक्रण के लिए दिशानिर्देश बनाने की मुख्य ज़िम्मेदारी किस मंत्रालय की है?

  2. Q2कठिन

    भारत में सौर मॉड्यूल कचरे के प्रबंधन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.MNRE चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सौर मॉड्यूल के पुनर्चक्रण को अनिवार्य करने हेतु दिशानिर्देश तैयार कर रहा है।
    2. 2.अभी सौर मॉड्यूल का कचरा ई-कचरा (प्रबंधन) नियमों के तहत आता है।
    3. 3.भारत में संचित सौर कचरा 2030 तक लगभग 600 किलो-टन तक पहुंच सकता है।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    MNRE के अनुसार पुनर्चक्रण शुरू होने से पहले सौर मॉड्यूल के कचरे को किस वर्ष तक भंडारित करना अनिवार्य है?

  4. Q4मध्यम

    सौर मॉड्यूल के पुनर्चक्रण के लिए प्रस्तावित MNRE दिशानिर्देशों का मुख्य उद्देश्य क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. MNRE सौर मॉड्यूल के कचरे के लिए क्या योजना बना रहा है?

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सौर मॉड्यूल कचरे के पुनर्चक्रण को अनिवार्य करने के दिशानिर्देश तैयार कर रहा है।

2. भारत में 2030 तक कितना सौर कचरा उत्पन्न होने की उम्मीद है?

भारत में संचित सौर कचरा 2030 तक लगभग 600 किलो-टन तक पहुंच सकता है।

3. भारत में सौर मॉड्यूल का पुनर्चक्रण कब शुरू होगा?

पुनर्चक्रण 2035 से शुरू होने की उम्मीद है, क्योंकि तब तक कचरे को पर्याप्त मात्रा होने तक भंडारित रखना अनिवार्य है।

4. सौर मॉड्यूल के पुनर्चक्रण में मुख्य लागत कौन-सी हैं?

निवेश लागत में मशीनरी का हिस्सा 45-50% है, जबकि परिचालन लागत में मॉड्यूल की खरीद का हिस्सा 56-68% है।

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