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प्रिलिम्स के लिए: समझौता ज्ञापन (MOU), TRIFED, पीएम विश्वकर्मा योजना का नोडल मंत्रालय, बाज़ार पहुंच के लिए नोडल निकाय, TRIFED का मूल मंत्रालय, पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की तिथि, सहयोग से मिलने वाला परिणाम, वर्तमान संदर्भ
मेन्स के लिए: शिल्पकारों के लिए बाज़ार से जुड़ाव, आदिवासी उद्यमिता, अंतर-मंत्रालयी समन्वय, आजीविका में विविधता
स्रोत:PIB
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- एमएसएमई मंत्रालय ने 5 नवंबर 2026 को TRIFED के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
- TRIFED जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन है।
- समझौता ज्ञापन 'ट्राइब्स इंडिया-पीएम विश्वकर्मा संग्रह' बनाएगा।
- पीएम विश्वकर्मा योजना 17 सितंबर 2023 को शुरू की गई थी।
- TRIFED के खुदरा नेटवर्क को ट्राइब्स इंडिया कहा जाता है।
चर्चा में क्यों?
एमएसएमई मंत्रालय और TRIFED ने पीएम विश्वकर्मा योजना में पंजीकृत आदिवासी शिल्पकारों को ट्राइब्स इंडिया के खुदरा आउटलेट और उसके ऑनलाइन बाज़ार के ज़रिए बाज़ार उपलब्ध कराने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत 'ट्राइब्स इंडिया-पीएम विश्वकर्मा संग्रह' नाम का अलग संग्रह बनाया जाएगा। इसका मकसद पारंपरिक शिल्पकारों के उत्पादों की पहचान बढ़ाना, उनकी क्षमता का विकास करना और उनकी आय में सुधार लाना है।
सारांश
- एमएसएमई मंत्रालय और TRIFED (जनजातीय कार्य मंत्रालय) के बीच समझौता ज्ञापन, जिसका उद्देश्य पीएम विश्वकर्मा योजना के पात्र आदिवासी शिल्पकारों के लिए बाज़ार तक पहुंच मज़बूत करना है।
- TRIFED अपने ट्राइब्स इंडिया खुदरा नेटवर्क और ऑनलाइन बाज़ार (tribesindia.com) के ज़रिए शिल्पकारों को जोड़ेगा, उनकी क्षमता बढ़ाएगा और उन्हें बाज़ार उपलब्ध कराएगा।
- धातु शिल्प, वस्त्र, मिट्टी के बर्तन और बांस की वस्तुओं जैसे उत्पादों के लिए 'ट्राइब्स इंडिया-पीएम विश्वकर्मा संग्रह' नाम का अलग संग्रह बनाया जाएगा।
- पीएम विश्वकर्मा योजना 17 सितंबर 2023 को शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य गुरु-शिष्य प्रशिक्षण मॉडल के ज़रिए पारंपरिक शिल्पकारों की मदद करना है।
मुख्य बातें
अंतर-मंत्रालयी समझौता ज्ञापन
एमएसएमई मंत्रालय और TRIFED (जनजातीय कार्य मंत्रालय) ने पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत आदिवासी शिल्पकारों को बाज़ार तक पहुंच देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
ट्राइब्स इंडिया मंच
TRIFED अपने भौतिक खुदरा आउटलेट और tribesindia.com ई-बाज़ार के ज़रिए 'ट्राइब्स इंडिया-पीएम विश्वकर्मा संग्रह' के तहत उत्पाद प्रदर्शित और बेचेगा।
पारंपरिक शिल्पकार
इस सहयोग में बढ़ईगीरी, धातु कर्म, मूर्तिकला, मिट्टी के बर्तन, टोकरी बुनाई और खिलौना निर्माण जैसे उत्पाद-आधारित काम शामिल हैं, और इससे गुरु-शिष्य प्रशिक्षण मॉडल को सहारा मिलेगा।
पृष्ठभूमि
पीएम विश्वकर्मा योजना 17 सितंबर 2023 को एमएसएमई मंत्रालय ने शुरू की थी। इसका मकसद उन पारंपरिक शिल्पकारों और कारीगरों की मदद करना है, जो गुरु-शिष्य परंपरा से अपना कौशल आगे बढ़ाते हैं। जनजातीय कार्य मंत्रालय के तहत TRIFED ट्राइब्स इंडिया ब्रांड चलाता है, जिसके पास खुदरा आउटलेट और आदिवासी उत्पादों के लिए समर्पित ऑनलाइन बाज़ार है। यह समझौता योजना में पंजीकरण और वास्तविक बाज़ार पहुंच के बीच की दूरी कम करता है।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
यह समझौता पीएम विश्वकर्मा के लाभार्थियों की एक बड़ी रुकावट को दूर करने का प्रयास है, यानी बाज़ार से जुड़ाव की कमी। TRIFED के स्थापित खुदरा और डिजिटल ढांचे का उपयोग करके आदिवासी शिल्पकार बिचौलियों से बच सकते हैं और उपभोक्ताओं के बड़े वर्ग तक पहुंच सकते हैं। अलग 'ट्राइब्स इंडिया-पीएम विश्वकर्मा संग्रह' एक अलग पहचान बनाता है। क्षमता विकास, गुणवत्ता आश्वासन और उत्पाद सूचीकरण से सहायता मिलने पर उत्पादों का स्तर और प्रस्तुति बेहतर होगी, जिससे शिल्पकारों की आय बढ़ने की संभावना है।
आगे की राह
इस समझौते को सफल बनाने के लिए शिल्पकारों को बिना रुकावट जोड़ना, TRIFED की गुणवत्ता नीतियों का पालन करना और दोनों मंत्रालयों के बीच प्रभावी समन्वय ज़रूरी है। सरकारी ई-बाज़ार (GeM) के ज़रिए उत्पादों की श्रेणी बढ़ाने और संग्रह का प्रचार करने से इसका असर और बढ़ सकता है। समझौते की प्रभावशीलता आंकने के लिए बिक्री और शिल्पकारों की आय पर नियमित निगरानी ज़रूरी होगी।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- समझौता ज्ञापन (MOU)
- दो या अधिक पक्षों के बीच औपचारिक समझौता, जिसमें किसी समझ की शर्तें और ब्योरे तथा हर पक्ष की भूमिका और ज़िम्मेदारियां लिखी जाती हैं। जब तक साफ़ तौर पर न कहा जाए, यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होता।
- TRIFED
- ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया, जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन शीर्ष निकाय है। यह आदिवासी उत्पादों के विपणन और आदिवासी समुदायों की आजीविका के लिए सहायता देने का काम करता है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस तथ्य पर ध्यान दें: एमएसएमई मंत्रालय और TRIFED के बीच 5 नवंबर 2026 को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए।
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: पीएम विश्वकर्मा योजना के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME)।
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (TRIFED)।
यह गलती न करें!
छात्र TRIFED को एमएसएमई मंत्रालय के अधीन समझ सकते हैं, जबकि यह जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन है। साथ ही, पीएम विश्वकर्मा योजना केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, केंद्र प्रायोजित योजना नहीं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- शिल्पकारों के लिए बाज़ार से जुड़ाव, आदिवासी उद्यमिता, अंतर-मंत्रालयी समन्वय, आजीविका में विविधता
कहीं अटके? एक टैप में समझें
एमएसएमई मंत्रालय और TRIFED ने आदिवासी शिल्पकारों के लिए अपने उत्पाद बेचना आसान बनाने का हाथ मिलाया है। पीएम विश्वकर्मा योजना में पंजीकृत शिल्पकार अब TRIFED के ट्राइब्स इंडिया स्टोर और वेबसाइट के ज़रिए अपने सामान प्रदर्शित और बेच सकेंगे। इसके लिए 'ट्राइब्स इंडिया-पीएम विश्वकर्मा संग्रह' नाम का खास संग्रह बनाया जाएगा। यह ऐसा है जैसे शिल्प मेला ऑनलाइन और स्थायी दुकानों में बदल गया हो।
- एमएसएमई मंत्रालय ने 5 नवंबर 2026 को TRIFED के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
- TRIFED जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन है।
- समझौता ज्ञापन 'ट्राइब्स इंडिया-पीएम विश्वकर्मा संग्रह' बनाएगा।
- पीएम विश्वकर्मा योजना 17 सितंबर 2023 को शुरू की गई थी।
- TRIFED के खुदरा नेटवर्क को ट्राइब्स इंडिया कहा जाता है।
- शासन: कमज़ोर वर्गों के लिए योजनाएं
- अर्थव्यवस्था: आर्थिक विकास में एमएसएमई की भूमिका
जुड़ी अवधारणाएँ: समझौता ज्ञापन (MOU), TRIFED
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
पीएम विश्वकर्मा योजना का नोडल मंत्रालय कौन-सा है?
व्याख्या: पीएम विश्वकर्मा योजना को एमएसएमई मंत्रालय लागू करता है। जनजातीय कार्य मंत्रालय TRIFED की निगरानी करता है, जो इस समझौता ज्ञापन में सहयोगी है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय इस योजना में सीधे शामिल नहीं हैं।
- Q2कठिन
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.TRIFED, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के अधीन शीर्ष निकाय है।
- 2.पीएम विश्वकर्मा योजना 17 सितंबर 2023 को शुरू की गई थी।
- 3.इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य 'ट्राइब्स इंडिया-पीएम विश्वकर्मा संग्रह' बनाना है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 गलत है, क्योंकि TRIFED जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन है, एमएसएमई मंत्रालय के अधीन नहीं। कथन 2 सही है, क्योंकि योजना 17 सितंबर 2023 को शुरू हुई थी। कथन 3 सही है, क्योंकि समझौते से पीएम विश्वकर्मा ढांचे के तहत आदिवासी शिल्पकारों के लिए अलग संग्रह बनेगा।
- Q3मध्यम
पीएम विश्वकर्मा योजना कब शुरू की गई थी?
व्याख्या: पीएम विश्वकर्मा योजना की औपचारिक शुरुआत 17 सितंबर 2023 को हुई थी।
- Q4मध्यम
एमएसएमई मंत्रालय और TRIFED के बीच समझौता ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: समझौता ज्ञापन ट्राइब्स इंडिया के खुदरा आउटलेट और ऑनलाइन बाज़ार के ज़रिए बाज़ार तक पहुंच पर केंद्रित है। वित्तीय अनुदान इसका मुख्य उद्देश्य नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. एमएसएमई मंत्रालय और TRIFED के बीच समझौता ज्ञापन का उद्देश्य क्या है?
समझौता ज्ञापन का लक्ष्य TRIFED के ट्राइब्स इंडिया खुदरा आउटलेट और ऑनलाइन बाज़ार का उपयोग करके पीएम विश्वकर्मा योजना में पंजीकृत पात्र आदिवासी शिल्पकारों के लिए बाज़ार तक पहुंच मज़बूत करना है।
2. 'ट्राइब्स इंडिया-पीएम विश्वकर्मा संग्रह' क्या है?
यह समझौते के तहत बनाई गई अलग उत्पाद श्रृंखला है, जिसमें पीएम विश्वकर्मा योजना में पंजीकृत आदिवासी शिल्पकारों के बने उत्पाद ट्राइब्स इंडिया मंच पर प्रदर्शित और बेचे जाते हैं।
3. TRIFED की निगरानी कौन-सा मंत्रालय करता है?
TRIFED (ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया) जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन है।
4. पीएम विश्वकर्मा योजना कब शुरू की गई थी?
पीएम विश्वकर्मा योजना 17 सितंबर 2023 को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने शुरू की थी।
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मूल खबर5 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें

