राजव्यवस्था

सर्वोच्च न्यायालय ने तरुण तेजपाल को राहत देने से इनकार किया, 2013 गोवा दुष्कर्म मामले में 10 साल की सजा

6 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 15 / 52

प्रिलिम्स के लिए: दुष्कर्म (IPC की धारा 375), अपील और बरी फैसले का पलटना, दोषी, अपराध, अपराध का स्थान, सजा, दोषसिद्धि देने वाला न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय की पीठ

मेन्स के लिए: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न में शक्ति-संबंध, आपराधिक मुकदमों में डिजिटल साक्ष्य, न्यायिक पदानुक्रम और अपीलीय अधिकार क्षेत्र

स्रोत:HindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय ने तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल की 10 साल के सश्रम कारावास की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। 2013 में गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपनी जूनियर सहकर्मी से दुष्कर्म किया था। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था, जिसके बाद बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उन्हें दोषी ठहराया। राज्य सरकार ने भी उम्रकैद की मांग करते हुए अपील की है।

सारांश

  • तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 2013 में गोवा में अपनी जूनियर सहकर्मी से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया।
  • न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने 10 साल के सश्रम कारावास की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया।
  • राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के फैसले को भी चुनौती दी थी और दोषी के लिए उम्रकैद की मांग की थी।

मुख्य बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से किया इनकार

    सर्वोच्च न्यायालय ने तरुण तेजपाल की 10 साल की सजा को निलंबित करने से इनकार किया और बॉम्बे उच्च न्यायालय की दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

  • 2013 का गोवा दुष्कर्म मामला

    मामला 2013 में गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान तेजपाल द्वारा एक जूनियर महिला सहकर्मी से दुष्कर्म से जुड़ा है।

  • ट्रायल कोर्ट का बरी करना पलटा गया

    ट्रायल कोर्ट ने पहले तेजपाल को बरी किया था, लेकिन बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उस फैसले को पलटकर उन्हें दोषी ठहराया।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा पलटना और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सजा पर रोक से इनकार, दोनों ही यह दिखाते हैं कि यौन उत्पीड़न के मामलों, खासकर कार्यस्थल पर शक्ति-संबंधों वाले मामलों, में न्यायिक दृष्टिकोण बदल रहा है। रिकॉर्ड पर मौजूद ईमेल और संदेशों पर सर्वोच्च न्यायालय की निर्भरता ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्य के महत्व को सामने लाती है। राज्य की उम्रकैद की मांग अपराध की गंभीरता को भी सामने लाती है।

आगे की राह

सर्वोच्च न्यायालय के राहत देने से इनकार के बाद तेजपाल को 10 साल की सजा काटनी होगी। अब उनके कानूनी विकल्प सीमित हैं, जिनमें क्यूरेटिव याचिका या राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका शामिल है। यह मामला कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों के लिए एक मजबूत नज़ीर है और इस कानूनी सिद्धांत को भी पुष्ट करता है कि यदि निर्णय विकृत हो तो उच्च न्यायालय ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलट सकता है।

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

दुष्कर्म (IPC की धारा 375)
भारतीय दंड संहिता की धारा 375 दुष्कर्म को ऐसे यौन संबंध के रूप में परिभाषित करती है जो किसी महिला की सहमति के बिना, उसकी इच्छा के विरुद्ध, या भय, धोखे या नशे की हालत में ली गई सहमति से बनाया गया हो।
अपील और बरी फैसले का पलटना
यदि बरी करने का फैसला विकृत पाया जाए या साक्ष्यों को गलत पढ़ने पर आधारित हो, तो उच्च न्यायालय ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलट सकता है। सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 136 के तहत उच्च न्यायालय के फैसलों के खिलाफ अपील सुन सकता है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस डेटा पर ध्यान दें: 2013 के गोवा दुष्कर्म मामले में तरुण तेजपाल को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: बॉम्बे उच्च न्यायालय (दोषसिद्धि), सर्वोच्च न्यायालय (रोक से इनकार)
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: IPC की धारा 375 (दुष्कर्म)

यह गलती न करें!

प्रश्न में गलती से कहा जा सकता है कि सर्वोच्च न्यायालय ने तेजपाल को दोषी ठहराया, जबकि दोषसिद्धि बॉम्बे उच्च न्यायालय ने की थी और सर्वोच्च न्यायालय ने केवल सजा पर रोक से इनकार किया। साथ ही, ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी किया था, इस तथ्य को विकल्पों में बदला जा सकता है।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न में शक्ति-संबंध, आपराधिक मुकदमों में डिजिटल साक्ष्य, न्यायिक पदानुक्रम और अपीलीय अधिकार क्षेत्र

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    2013 के गोवा दुष्कर्म मामले में तरुण तेजपाल को किस न्यायालय ने दोषी ठहराया?

  2. Q2कठिन

    निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.तरुण तेजपाल को 2013 के दुष्कर्म मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने दोषी ठहराया।
    2. 2.सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी 10 साल के सश्रम कारावास की सजा को निलंबित करने से इनकार किया।
    3. 3.राज्य सरकार ने तेजपाल के लिए उम्रकैद की मांग की थी।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    2013 के गोवा दुष्कर्म मामले में तरुण तेजपाल को कौन-सी सजा दी गई है?

  4. Q4मध्यम

    इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का मुख्य महत्व क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. तरुण तेजपाल कौन हैं?

तरुण तेजपाल तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक हैं, जिन्हें 2013 में गोवा में एक जूनियर सहकर्मी से दुष्कर्म के लिए दोषी ठहराया गया।

2. तरुण तेजपाल को कौन-सी सजा मिली?

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उन्हें 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

3. सर्वोच्च न्यायालय ने तरुण तेजपाल को राहत देने से क्यों इनकार किया?

सर्वोच्च न्यायालय ने पाया कि मामला सजा निलंबित करने के योग्य नहीं है, और रिकॉर्ड पर मौजूद ईमेल और संदेशों को साक्ष्य के रूप में उद्धृत किया।

4. तरुण तेजपाल को मूल रूप से किस न्यायालय ने बरी किया था?

ट्रायल कोर्ट ने पहले उन्हें बरी किया था, लेकिन बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उस बरी फैसले को पलटकर उन्हें दोषी ठहराया।

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