राजव्यवस्था

झारखंड उच्च न्यायालय: वैवाहिक घर में प्रवेश से रोकना और अपमान करना BNS की धारा 85 के तहत क्रूरता नहीं

6 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 42 / 77

प्रिलिम्स के लिए: भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023, आपराधिक कानून के तहत क्रूरता, न्यायालय, न्यायाधीश, कानूनी प्रावधान, अपराध, मुख्य फैसला, वर्तमान संदर्भ

मेन्स के लिए: क्रूरता की न्यायिक व्याख्या, धारा 85 BNS, वैवाहिक विवाद, कार्यवाही रद्द करना, प्रक्रिया का दुरुपयोग

स्रोत:Indian ExpressIndian Express

चर्चा में क्यों?

झारखंड उच्च न्यायालय ने कहा कि किसी महिला को उसके वैवाहिक घर में प्रवेश से रोकना और उसका अपमान करना भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 85 के तहत कानूनी रूप से 'क्रूरता' नहीं है। न्यायालय ने सास और ननद के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी और कहा कि ऐसे कृत्य क्रूरता, आपराधिक धमकी या चोट के कानूनी मानदंड पर खरे नहीं उतरते।

सारांश

  • झारखंड उच्च न्यायालय ने BNS, 2023 की धारा 85 (क्रूरता) के तहत सास और ननद के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की।
  • न्यायालय ने कहा कि किसी महिला को वैवाहिक घर में प्रवेश से रोकना और उसका अपमान करना BNS के तहत क्रूरता का अपराध नहीं बनता।
  • यह फैसला स्पष्ट करता है कि धारा 85 BNS के तहत आरोप टिकाने के लिए शारीरिक चोट, धमकी या दहेज की मांग जैसे विशिष्ट आरोप ज़रूरी हैं।

मुख्य बातें

  • क्रूरता की कानूनी व्याख्या

    झारखंड उच्च न्यायालय ने कहा कि वैवाहिक घर में प्रवेश से रोकना और महिला का अपमान करना धारा 85 BNS के तहत क्रूरता की कानूनी परिभाषा पर खरा नहीं उतरता।

  • धारा 85 BNS, 2023

    यह धारा पति या उसके रिश्तेदार द्वारा क्रूरता को दंडनीय बनाती है, और इसके लिए शारीरिक चोट, दहेज की मांग या जबरन दबाव के इरादे से उत्पीड़न जैसे विशिष्ट कृत्य ज़रूरी हैं।

  • रद्द की गई कार्यवाही

    कार्यवाही रद्द: न्यायालय ने सास और ननद के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही तथा निचली अदालत के संज्ञान लेने और आरोप तय करने के आदेश रद्द कर दिए, और इस मुकदमे को आगे चलाना प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।

पृष्ठभूमि

एक महिला ने 2024 में पति द्वारा दहेज मांगने और मारपीट करने की शिकायत की, और सास व ननद पर उसका अपमान करने तथा वैवाहिक घर में प्रवेश से रोकने के अतिरिक्त आरोप लगाए। पुलिस ने आरोप-पत्र दाखिल किया और निचली अदालत ने संज्ञान लिया। याचिकाकर्ता सास और ननद ने झारखंड उच्च न्यायालय में कार्यवाही रद्द करने की मांग की।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी ने माना कि याचिकाकर्ताओं पर लगे आरोप केवल अपमान और प्रवेश से रोकने तक सीमित हैं, जिनमें शारीरिक चोट, धमकी या दहेज की मांग का कोई दावा नहीं है। न्यायालय ने कहा कि धारा 85 BNS के लिए क्रूरता के विशिष्ट कृत्य ज़रूरी हैं और अपमान के सामान्य आरोप पर्याप्त नहीं हैं। यह फैसला वैवाहिक क्रूरता के मामलों में सटीक कानूनी दलीलों की ज़रूरत को सामने लाता है और निचली अदालतों को अस्पष्ट आरोपों की अधिक सख्ती से जांच के लिए प्रेरित कर सकता है।

आगे की राह

यह फैसला BNS के तहत 'क्रूरता' क्या है, इस पर विधायी या न्यायिक स्पष्टता को बढ़ावा दे सकता है। यह वैवाहिक कलह और आपराधिक अपराध के बीच अंतर करने के महत्व को भी सामने लाता है। भविष्य के मामलों में धारा 85 के अधिक कठोर प्रयोग की संभावना है, जिसमें सामान्य आरोपों के बजाय जबरन दबाव या चोट के विशिष्ट साक्ष्य मांगे जाएंगे।

झारखंड से जुड़ाव

झारखंड की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:JPSC 8/10JSSC 7/10

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023
BNS ने 1860 की भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह भारत की मुख्य आपराधिक संहिता का स्थान लिया है। BNS की धारा 85 IPC की धारा 498A से मेल खाती है, जो पति या पति के रिश्तेदार द्वारा क्रूरता से संबंधित है।
आपराधिक कानून के तहत क्रूरता
कानूनी रूप से क्रूरता में ऐसा जानबूझकर किया गया आचरण शामिल है जो किसी महिला को आत्महत्या के लिए प्रेरित कर सकता है, या उसके जीवन, अंग या स्वास्थ्य को गंभीर चोट या खतरा पहुंचा सकता है, या संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति की गैरकानूनी मांग पूरी करने के लिए उसे या उसके रिश्तेदारों को मजबूर करने हेतु उत्पीड़न करता है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: झारखंड उच्च न्यायालय, 4 नवंबर 2026 का आदेश
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: धारा 85, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: झारखंड उच्च न्यायालय

यह गलती न करें!

छात्र BNS की धारा 85 को IPC की पुरानी धारा 498A से भ्रमित कर सकते हैं, या यह मान सकते हैं कि हर अपमान या प्रवेश से रोकना अपने-आप क्रूरता बन जाता है। परीक्षक यह जांचेगा कि क्रूरता के लिए शारीरिक चोट, धमकी या दहेज की मांग जैसे विशिष्ट तत्व ज़रूरी हैं, केवल सामान्य दुर्व्यवहार नहीं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • क्रूरता की न्यायिक व्याख्या, धारा 85 BNS, वैवाहिक विवाद, कार्यवाही रद्द करना, प्रक्रिया का दुरुपयोग

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    किस उच्च न्यायालय ने फैसला दिया कि महिला को उसके वैवाहिक घर से रोकना BNS, 2023 की धारा 85 के तहत क्रूरता नहीं है?

  2. Q2कठिन

    झारखंड उच्च न्यायालय के BNS, 2023 की धारा 85 के तहत क्रूरता संबंधी फैसले के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.न्यायालय ने माना कि किसी महिला को वैवाहिक घर में प्रवेश से रोकना और उसका अपमान करना धारा 85 BNS के तहत क्रूरता है।
    2. 2.न्यायालय ने सास और ननद के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की।
    3. 3.न्यायालय ने देखा कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ शारीरिक चोट या धमकी का कोई आरोप नहीं था।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    इस मामले में क्रूरता के अपराध की जांच भारतीय न्याय संहिता, 2023 की किस धारा के तहत की गई?

  4. Q4मध्यम

    BNS की धारा 85 के तहत क्रूरता के आरोपों पर झारखंड उच्च न्यायालय के फैसले का मुख्य कानूनी निहितार्थ क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. झारखंड उच्च न्यायालय ने धारा 85 BNS के तहत क्रूरता के बारे में क्या फैसला सुनाया?

न्यायालय ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 के तहत किसी महिला को उसके वैवाहिक घर में प्रवेश से रोकना और उसका अपमान करना कानूनी रूप से क्रूरता नहीं है।

2. झारखंड उच्च न्यायालय के 4 नवंबर 2026 के आदेश के न्यायाधीश कौन थे?

यह आदेश झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी ने सुनाया।

3. BNS, 2023 की धारा 85 क्या है?

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 किसी महिला के प्रति पति या पति के रिश्तेदार की क्रूरता को दंडनीय बनाती है, और यह भारतीय दंड संहिता की पुरानी धारा 498A का स्थान लेती है।

4. झारखंड उच्च न्यायालय ने सास और ननद के खिलाफ कार्यवाही क्यों रद्द की?

न्यायालय ने उनके खिलाफ कार्यवाही इसलिए रद्द की क्योंकि उन पर लगे आरोप केवल अपमान और प्रवेश से रोकने तक सीमित थे, जिनमें शारीरिक चोट, धमकी या दहेज की मांग का कोई दावा नहीं था, और ये धारा 85 BNS के तहत क्रूरता बनाने के लिए अपर्याप्त हैं।

सभी स्रोत

इसी विषय, राज्य या परीक्षा की पिछले 30 दिनों की खबरें

राजव्यवस्थाझारखंडJPSC: अति महत्वपूर्ण

झारखंड उच्च न्यायालय ने 3 लाख से अधिक एकड़ जमीन को प्रतिबंधित सूची से मुक्त किया

  • मुक्त हुई जमीन: 3 लाख+ एकड़
  • पोर्टल: राष्ट्रीय जेनेरिक दस्तावेज़ निबंधन प्रणाली (NGDRS)
पृष्ठभूमि GK: निबंधन अधिनियम, 1908निबंधन अधिनियम, 1908नोडल: झारखंड उच्च न्यायालययह गलती न करें!
4 प्रश्न · 2 मिनटDainik BhaskarHindustan
राजव्यवस्थाझारखंडJPSC: अति महत्वपूर्ण

झारखंड HC: मानसिक बीमारी तलाक का अपने-आप आधार नहीं; कस्टडी में बच्चे की भलाई सर्वोपरि

  • पीठ (तलाक मामला): न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव
  • पीठ (कस्टडी मामला): न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अखिल कुमार
पृष्ठभूमि GK: हिंदू विवाह अधिनियम, 1955धारा 13(1)(iii), हिंदू विवाह अधिनियम, 1955नोडल: झारखंड उच्च न्यायालययह गलती न करें!
4 प्रश्न · 2 मिनटHindustan
राजव्यवस्थाझारखंडउत्तर प्रदेशपंजाबJPSC: अति महत्वपूर्ण

सर्वोच्च न्यायालय ने झारखंड, यूपी, पंजाब के DGP नियमों पर रिपोर्ट मांगी

  • न्यायालय: भारत का सर्वोच्च न्यायालय
  • पीठ: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची, जस्टिस वी. मोहना
पृष्ठभूमि GK: पुलिस महानिदेशक (DGP)प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (2006)नोडल: भारत का सर्वोच्च न्यायालययह गलती न करें!
4 प्रश्न · 2 मिनटDainik Bhaskar
राजव्यवस्थाझारखंडJPSC: अति महत्वपूर्ण

झारखंड उच्च न्यायालय ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला निरस्त किया, 2,000 से अधिक उम्मीदवारों की नियुक्तियां बरकरार

  • सरकारी फैसले की तिथि: 17 अगस्त 2026 (18 अगस्त को अधिसूचित)
  • रद्दीकरण पर उच्च न्यायालय की रोक: 21 अगस्त 2026
पृष्ठभूमि GK: उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता (अनुच्छेद 226)अनुच्छेद 226नोडल: झारखंड उच्च न्यायालययह गलती न करें!
4 प्रश्न · 2 मिनटThe HinduHindustan
राजव्यवस्थाझारखंडJPSC: अति महत्वपूर्ण

JSSC CGL परीक्षा रद्द करने पर झारखंड उच्च न्यायालय का फैसला

  • नोडल निकाय: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC)
  • रद्द की गई परीक्षा: JSSC संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा
पृष्ठभूमि GK: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC)अनुच्छेद 226नोडल: झारखंड उच्च न्यायालययह गलती न करें!
4 प्रश्न · 2 मिनटDainik Bhaskar
राजव्यवस्थाझारखंडJPSC: अति महत्वपूर्ण

झारखंड HC: विधवा बहू का भरण-पोषण ससुर की ज़िम्मेदारी है

  • पीठ: मुख्य न्यायाधीश एम एस सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद
  • भरण-पोषण की राशि: ₹17,000 प्रति माह
पृष्ठभूमि GK: हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956नोडल: झारखंड उच्च न्यायालययह गलती न करें!
4 प्रश्न · 2 मिनटIndian Express