प्रिलिम्स के लिए: सब स्टेशन, पारेषण लाइन, अधिकतम भार, नोडल निकाय, लक्ष्य वर्ष, वर्तमान सब स्टेशन, प्रस्तावित नए सब स्टेशन, 2030 तक कुल सब स्टेशन
मेन्स के लिए: चरम भार प्रबंधन, बुनियादी ढांचा (पारेषण), राज्य स्तरीय बिजली सेक्टर सुधार
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- पिटकुल 2030 तक उत्तराखंड में 21 नए सब स्टेशन बनाएगी।
- उत्तराखंड में वर्तमान सब स्टेशनों की संख्या 51 है।
- विस्तार के बाद कुल सब स्टेशन 72 होंगे।
- उत्तराखंड में गर्मियों का बिजली भार 2,800 MW है।
- उत्तराखंड में पारेषण लाइन की लंबाई 3,536 सर्किट किमी है।
चर्चा में क्यों?
उत्तराखंड की बिजली पारेषण कंपनी पिटकुल गर्मियों में 2,800 MW के चरम भार को संभालने के लिए 2030 तक 21 नए सब स्टेशन बनाएगी। इससे सब स्टेशनों की संख्या 51 से बढ़कर 72 और पारेषण लाइनों की लंबाई 3,536 सर्किट किमी हो जाएगी।
सारांश
- उत्तराखंड की बिजली पारेषण कंपनी पिटकुल 2030 तक 21 नए सब स्टेशन बनाने की योजना बना रही है, जिससे कुल संख्या 51 से बढ़कर 72 हो जाएगी।
- राज्य में गर्मियों में बिजली की अधिकतम मांग 2,800 MW तक पहुंचती है, जिससे ट्रांसफार्मर ओवरलोड होते हैं और बिजली गुल होती है।
- पारेषण लाइनों की लंबाई 2004 के 1,589 सर्किट किमी से बढ़कर अब 3,536 सर्किट किमी हो गई है।
मुख्य बातें
बिजली ढांचे का विस्तार
उत्तराखंड 2030 तक बिजली पारेषण मज़बूत करने और गर्मियों की बिजली कटौती घटाने के लिए 21 नए सब स्टेशन बनाएगा।
बढ़ती मांग
राज्य में बढ़ते निवेश और आर्थिक गतिविधि के कारण गर्मियों में बिजली का भार 2,800 MW तक पहुंच जाता है।
नेटवर्क में सुधार
पारेषण लाइनों का विस्तार होगा; मुख्य परियोजनाओं में बनबसा और टनकपुर में 220 kV GIS सब स्टेशन, तथा खटीमा और लोहाघाट तक 132 kV लाइनें शामिल हैं।
पृष्ठभूमि
मई-जून में जब बिजली का भार लगभग 2,800 MW तक पहुंचता है, तब उत्तराखंड में गंभीर बिजली कटौती होती है। ट्रांसफार्मर ओवरलोड होते हैं, उनमें आग लगती है और लाइनें ट्रिप होती हैं, जिससे कनेक्शन काटने पड़ते हैं। राज्य की पारेषण कंपनी (जिसे 'पिटकुल' कहा जाता है) 2004 में बनी थी और तब उसके पास 17 सब स्टेशन थे।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
2030 तक 21 सब स्टेशन जोड़ने की योजना से कुल संख्या 72 हो जाएगी, जो वर्तमान 51 से 41% की बढ़ोतरी है। पारेषण लाइनें 2004 के 1,589 सर्किट किमी से बढ़कर 3,536 सर्किट किमी हो चुकी हैं। मुख्य परियोजनाओं में बनबसा और टनकपुर में 220 kV GIS सब स्टेशन तथा खटीमा, लोहाघाट और अन्य कस्बों को जोड़ने वाली 132 kV लाइनें शामिल हैं। राज्य में निवेश बढ़ने के साथ औद्योगिक और घरेलू मांग भी बढ़ रही है, इसलिए यह विस्तार ज़रूरी है।
आगे की राह
राज्य को गर्मियों के चरम महीनों से पहले इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करना होगा। सब स्टेशनों के लिए GIS (गैस इंसुलेटेड स्विचगियर) तकनीक में लगातार निवेश होना चाहिए, जो अधिक सुरक्षित है और कम जगह घेरती है। दीर्घकालिक विश्वसनीयता के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को इस नेटवर्क से जोड़ना भी ज़रूरी होगा।
उत्तराखंड बिजली पारेषण नेटवर्क का विस्तार
| मानदंड | 2004 | वर्तमान | लक्ष्य (2030) |
|---|---|---|---|
| सब स्टेशन | 17 | 51 | 72 |
| पारेषण लाइनें (सर्किट किमी) | 1,589 | 3,536 | विस्तार किया जाना है |
उत्तराखंड से जुड़ाव
उत्तराखंड की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:UKPSC 7/10
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- सब स्टेशन
- विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण प्रणाली का वह हिस्सा जहां ट्रांसफार्मर की मदद से वोल्टेज ऊंचे से नीचे या नीचे से ऊंचे किया जाता है। यह दोष को अलग करने और बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करने का काम भी करता है।
- पारेषण लाइन
- ऊंची वोल्टेज की केबलें (आमतौर पर 132 kV, 220 kV, 400 kV), जो बिजलीघरों से सब स्टेशनों तक लंबी दूरी तक बिजली ले जाती हैं, इसके बाद उपभोक्ताओं तक वितरण होता है।
- अधिकतम भार
- किसी निश्चित अवधि में बिजली की सबसे अधिक मांग (जैसे गर्मी की दोपहर)। इस चरम मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन और पारेषण क्षमता की योजना बनानी पड़ती है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस डेटा पर ध्यान दें: 2030 तक 21 नए सब स्टेशन, कुल 72 सब स्टेशन
- इस डेटा पर ध्यान दें: गर्मियों का चरम भार 2,800 MW
- इस डेटा पर ध्यान दें: पारेषण लाइनें 3,536 सर्किट किमी (2004 के 1,589 से बढ़कर)
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL, पिटकुल)
यह गलती न करें!
परीक्षक नए सब स्टेशनों की संख्या (21) को विस्तार के बाद की कुल संख्या (72) से बदल सकते हैं, या वर्तमान संख्या (51) को 2004 की संख्या (17) से भ्रमित कर सकते हैं। वे पारेषण लाइनों की लंबाई (1,589 बनाम 3,536 सर्किट किमी) में भी गड़बड़ी कर सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- चरम भार प्रबंधन, बुनियादी ढांचा (पारेषण), राज्य स्तरीय बिजली सेक्टर सुधार
कहीं अटके? एक टैप में समझें
उत्तराखंड में गर्मियों में बिजली कटौती होती है क्योंकि बिजली नेटवर्क पुराना और ओवरलोड है। राज्य की बिजली कंपनी पिटकुल 2030 तक 21 नए सब स्टेशन बनाएगी और पारेषण लाइनों को मज़बूत करेगी। नए सब स्टेशन और लाइनें जुड़ने से ग्रिड की क्षमता बढ़ेगी, जिससे गर्मियों में ज़्यादा मांग होने पर भी ओवरलोड और कटौती कम होगी।
- पिटकुल 2030 तक उत्तराखंड में 21 नए सब स्टेशन बनाएगी।
- उत्तराखंड में वर्तमान सब स्टेशनों की संख्या 51 है।
- विस्तार के बाद कुल सब स्टेशन 72 होंगे।
- उत्तराखंड में गर्मियों का बिजली भार 2,800 MW है।
- उत्तराखंड में पारेषण लाइन की लंबाई 3,536 सर्किट किमी है।
- भूगोल: ऊर्जा संसाधन और बुनियादी ढांचा
- शासन: राज्य स्तरीय बुनियादी ढांचा परियोजनाएं
जुड़ी अवधारणाएँ: सब स्टेशन, पारेषण लाइन, अधिकतम भार
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
उत्तराखंड में बिजली पारेषण के लिए कौन-सी सरकारी कंपनी ज़िम्मेदार है और नए सब स्टेशन योजना को लागू कर रही है?
व्याख्या: नई सब स्टेशन योजना को पिटकुल (राज्य की बिजली पारेषण कंपनी) लागू कर रही है। UPCL बिजली वितरण संभालती है, UJVNL जलविद्युत उत्पादन के लिए ज़िम्मेदार है और UREDA राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देती है।
- Q2कठिन
उत्तराखंड के बिजली बुनियादी ढांचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.पिटकुल 2030 तक 21 नए सब स्टेशन बनाने की योजना बना रही है, जिससे कुल संख्या 51 से बढ़कर 72 हो जाएगी।
- 2.उत्तराखंड में गर्मियों में बिजली का अधिकतम भार 2,800 MW तक पहुंचता है।
- 3.2004 से पारेषण लाइन की लंबाई 3,536 सर्किट किमी से घटकर 1,589 सर्किट किमी हो गई है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: 2030 तक 21 नए सब स्टेशन प्रस्तावित हैं, जिससे कुल संख्या 51 से बढ़कर 72 होगी। कथन 2 सही है: गर्मियों का चरम भार 2,800 MW है। कथन 3 गलत है: पारेषण लाइन की लंबाई 2004 के 1,589 सर्किट किमी से बढ़कर अब 3,536 सर्किट किमी हो गई है। अतः विकल्प C सही है।
- Q3मध्यम
पिटकुल 2030 तक उत्तराखंड में कितने नए सब स्टेशन बनाने की योजना बना रही है?
व्याख्या: 2030 तक 21 नए सब स्टेशन बनाने की योजना है। 2004 में सब स्टेशनों की संख्या 17 थी, वर्तमान संख्या 51 है और नए जुड़ने के बाद कुल लक्ष्य 72 है। अतः विकल्प C सही है।
- Q4मध्यम
उत्तराखंड में 21 नए सब स्टेशन बनाने और पारेषण लाइनों के विस्तार का मुख्य उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: घोषित उद्देश्य गर्मियों में 2,800 MW की अधिकतम मांग को संभालना और ट्रांसफार्मर ओवरलोड, खराबी और बिजली कटौती रोकना है। यहां उत्पादन क्षमता बढ़ाई नहीं जा रही है। अतः विकल्प B सही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. 2030 तक उत्तराखंड में कितने नए सब स्टेशन बनेंगे?
पिटकुल 2030 तक 21 नए सब स्टेशन बनाने की योजना बना रही है, जिससे कुल संख्या 51 से बढ़कर 72 हो जाएगी।
2. उत्तराखंड में गर्मियों की अधिकतम बिजली मांग कितनी है?
उत्तराखंड में गर्मियों का बिजली भार 2,800 MW तक पहुंचता है, जिससे ट्रांसफार्मर ओवरलोड होते हैं और बिजली गुल होती है।
3. उत्तराखंड में बिजली पारेषण के लिए कौन-सी एजेंसी ज़िम्मेदार है?
पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL) उत्तराखंड में बिजली पारेषण के लिए ज़िम्मेदार सरकारी कंपनी है, जिसे हिंदी में अक्सर 'पिटकुल' कहा जाता है।
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मूल खबर6 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
