बुनियादी ढांचा

उत्तराखंड 2030 तक बिजली आपूर्ति नेटवर्क मज़बूत करने के लिए 21 नए सब स्टेशन बनाएगा

6 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 71 / 77

प्रिलिम्स के लिए: सब स्टेशन, पारेषण लाइन, अधिकतम भार, नोडल निकाय, लक्ष्य वर्ष, वर्तमान सब स्टेशन, प्रस्तावित नए सब स्टेशन, 2030 तक कुल सब स्टेशन

मेन्स के लिए: चरम भार प्रबंधन, बुनियादी ढांचा (पारेषण), राज्य स्तरीय बिजली सेक्टर सुधार

स्रोत:HindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

उत्तराखंड की बिजली पारेषण कंपनी पिटकुल गर्मियों में 2,800 MW के चरम भार को संभालने के लिए 2030 तक 21 नए सब स्टेशन बनाएगी। इससे सब स्टेशनों की संख्या 51 से बढ़कर 72 और पारेषण लाइनों की लंबाई 3,536 सर्किट किमी हो जाएगी।

सारांश

  • उत्तराखंड की बिजली पारेषण कंपनी पिटकुल 2030 तक 21 नए सब स्टेशन बनाने की योजना बना रही है, जिससे कुल संख्या 51 से बढ़कर 72 हो जाएगी।
  • राज्य में गर्मियों में बिजली की अधिकतम मांग 2,800 MW तक पहुंचती है, जिससे ट्रांसफार्मर ओवरलोड होते हैं और बिजली गुल होती है।
  • पारेषण लाइनों की लंबाई 2004 के 1,589 सर्किट किमी से बढ़कर अब 3,536 सर्किट किमी हो गई है।

मुख्य बातें

  • बिजली ढांचे का विस्तार

    उत्तराखंड 2030 तक बिजली पारेषण मज़बूत करने और गर्मियों की बिजली कटौती घटाने के लिए 21 नए सब स्टेशन बनाएगा।

  • बढ़ती मांग

    राज्य में बढ़ते निवेश और आर्थिक गतिविधि के कारण गर्मियों में बिजली का भार 2,800 MW तक पहुंच जाता है।

  • नेटवर्क में सुधार

    पारेषण लाइनों का विस्तार होगा; मुख्य परियोजनाओं में बनबसा और टनकपुर में 220 kV GIS सब स्टेशन, तथा खटीमा और लोहाघाट तक 132 kV लाइनें शामिल हैं।

पृष्ठभूमि

मई-जून में जब बिजली का भार लगभग 2,800 MW तक पहुंचता है, तब उत्तराखंड में गंभीर बिजली कटौती होती है। ट्रांसफार्मर ओवरलोड होते हैं, उनमें आग लगती है और लाइनें ट्रिप होती हैं, जिससे कनेक्शन काटने पड़ते हैं। राज्य की पारेषण कंपनी (जिसे 'पिटकुल' कहा जाता है) 2004 में बनी थी और तब उसके पास 17 सब स्टेशन थे।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

2030 तक 21 सब स्टेशन जोड़ने की योजना से कुल संख्या 72 हो जाएगी, जो वर्तमान 51 से 41% की बढ़ोतरी है। पारेषण लाइनें 2004 के 1,589 सर्किट किमी से बढ़कर 3,536 सर्किट किमी हो चुकी हैं। मुख्य परियोजनाओं में बनबसा और टनकपुर में 220 kV GIS सब स्टेशन तथा खटीमा, लोहाघाट और अन्य कस्बों को जोड़ने वाली 132 kV लाइनें शामिल हैं। राज्य में निवेश बढ़ने के साथ औद्योगिक और घरेलू मांग भी बढ़ रही है, इसलिए यह विस्तार ज़रूरी है।

आगे की राह

राज्य को गर्मियों के चरम महीनों से पहले इन परियोजनाओं को समय पर पूरा करना होगा। सब स्टेशनों के लिए GIS (गैस इंसुलेटेड स्विचगियर) तकनीक में लगातार निवेश होना चाहिए, जो अधिक सुरक्षित है और कम जगह घेरती है। दीर्घकालिक विश्वसनीयता के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को इस नेटवर्क से जोड़ना भी ज़रूरी होगा।

उत्तराखंड बिजली पारेषण नेटवर्क का विस्तार

मानदंड2004वर्तमानलक्ष्य (2030)
सब स्टेशन175172
पारेषण लाइनें (सर्किट किमी)1,5893,536विस्तार किया जाना है

उत्तराखंड से जुड़ाव

उत्तराखंड की इन परीक्षाओं के लिए ज़रूरी:UKPSC 7/10

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

सब स्टेशन
विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण प्रणाली का वह हिस्सा जहां ट्रांसफार्मर की मदद से वोल्टेज ऊंचे से नीचे या नीचे से ऊंचे किया जाता है। यह दोष को अलग करने और बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करने का काम भी करता है।
पारेषण लाइन
ऊंची वोल्टेज की केबलें (आमतौर पर 132 kV, 220 kV, 400 kV), जो बिजलीघरों से सब स्टेशनों तक लंबी दूरी तक बिजली ले जाती हैं, इसके बाद उपभोक्ताओं तक वितरण होता है।
अधिकतम भार
किसी निश्चित अवधि में बिजली की सबसे अधिक मांग (जैसे गर्मी की दोपहर)। इस चरम मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन और पारेषण क्षमता की योजना बनानी पड़ती है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस डेटा पर ध्यान दें: 2030 तक 21 नए सब स्टेशन, कुल 72 सब स्टेशन
  • इस डेटा पर ध्यान दें: गर्मियों का चरम भार 2,800 MW
  • इस डेटा पर ध्यान दें: पारेषण लाइनें 3,536 सर्किट किमी (2004 के 1,589 से बढ़कर)
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL, पिटकुल)

यह गलती न करें!

परीक्षक नए सब स्टेशनों की संख्या (21) को विस्तार के बाद की कुल संख्या (72) से बदल सकते हैं, या वर्तमान संख्या (51) को 2004 की संख्या (17) से भ्रमित कर सकते हैं। वे पारेषण लाइनों की लंबाई (1,589 बनाम 3,536 सर्किट किमी) में भी गड़बड़ी कर सकते हैं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • चरम भार प्रबंधन, बुनियादी ढांचा (पारेषण), राज्य स्तरीय बिजली सेक्टर सुधार

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    उत्तराखंड में बिजली पारेषण के लिए कौन-सी सरकारी कंपनी ज़िम्मेदार है और नए सब स्टेशन योजना को लागू कर रही है?

  2. Q2कठिन

    उत्तराखंड के बिजली बुनियादी ढांचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.पिटकुल 2030 तक 21 नए सब स्टेशन बनाने की योजना बना रही है, जिससे कुल संख्या 51 से बढ़कर 72 हो जाएगी।
    2. 2.उत्तराखंड में गर्मियों में बिजली का अधिकतम भार 2,800 MW तक पहुंचता है।
    3. 3.2004 से पारेषण लाइन की लंबाई 3,536 सर्किट किमी से घटकर 1,589 सर्किट किमी हो गई है।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    पिटकुल 2030 तक उत्तराखंड में कितने नए सब स्टेशन बनाने की योजना बना रही है?

  4. Q4मध्यम

    उत्तराखंड में 21 नए सब स्टेशन बनाने और पारेषण लाइनों के विस्तार का मुख्य उद्देश्य क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. 2030 तक उत्तराखंड में कितने नए सब स्टेशन बनेंगे?

पिटकुल 2030 तक 21 नए सब स्टेशन बनाने की योजना बना रही है, जिससे कुल संख्या 51 से बढ़कर 72 हो जाएगी।

2. उत्तराखंड में गर्मियों की अधिकतम बिजली मांग कितनी है?

उत्तराखंड में गर्मियों का बिजली भार 2,800 MW तक पहुंचता है, जिससे ट्रांसफार्मर ओवरलोड होते हैं और बिजली गुल होती है।

3. उत्तराखंड में बिजली पारेषण के लिए कौन-सी एजेंसी ज़िम्मेदार है?

पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (PTCUL) उत्तराखंड में बिजली पारेषण के लिए ज़िम्मेदार सरकारी कंपनी है, जिसे हिंदी में अक्सर 'पिटकुल' कहा जाता है।

सभी स्रोत

इसी विषय, राज्य या परीक्षा की पिछले 30 दिनों की खबरें

पर्यावरणउत्तराखंडUKPSC: अति महत्वपूर्ण

उत्तराखंड के पहाड़ी राजमार्गों पर 100 हेक्टेयर में हरित क्रैश बैरियर के लिए बांस रोपण

  • नोडल निकाय: उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद
  • सहयोगी एजेंसियां: NHAI, PWD, वन विभाग, FRI, IIT रुड़की
पृष्ठभूमि GK: मृदा अपरदननोडल: उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषदयह गलती न करें!
4 प्रश्न · 3 मिनटDainik Bhaskar
राजव्यवस्थाउत्तराखंडUKPSC: अति महत्वपूर्ण

सर्वोच्च न्यायालय ने दोबारा नियुक्त अधिकारियों के लिए 'पे माइनस पेंशन' नियम को सही ठहराया

  • मामला: उत्तराखंड सरकार बनाम लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एम. सी. भंडारी व अन्य
  • सही ठहराया गया मुख्य प्रावधान: दोबारा नियुक्त सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए 'पे माइनस पेंशन' नियम
पृष्ठभूमि GK: 'पे माइनस पेंशन' (वेतन में से पेंशन घटाना)विनियम 7(2), UKPSC नियमनोडल: भारत का सर्वोच्च न्यायालययह गलती न करें!
4 प्रश्न · 3 मिनटHindustan
राजव्यवस्थाउत्तर प्रदेशगोवापंजाबउत्तराखंडओडिशातमिलनाडुUPPSC: अति महत्वपूर्ण

14 राज्यों की मतदाता सूचियों से 9 करोड़ वयस्क गायब

  • UP में आधार वयस्क बनाम नामांकित मतदाता: 16.3 करोड़ बनाम 13.4 करोड़ (15-18% गायब)
  • सबसे अधिक गायब मतदाता प्रतिशत वाले राज्य: गोवा (21%), पंजाब और उत्तराखंड (19%)
पृष्ठभूमि GK: मतदाता सूची / निर्वाचक नामावलीविशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)नोडल: भारत निर्वाचन आयोगयह गलती न करें!
4 प्रश्न · 3 मिनटIndian Express
राजव्यवस्थाउत्तराखंडUKPSC: अति महत्वपूर्ण

उत्तराखंड ने 10 लाख लाभार्थियों को ₹148 करोड़ की सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी

  • कुल हस्तांतरित राशि: ₹148.18 करोड़
  • कुल लाभार्थी: 9,99,484
पृष्ठभूमि GK: प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT)प्रत्यक्ष लाभ अंतरणनोडल: समाज कल्याण विभाग, उत्तराखंडयह गलती न करें!
4 प्रश्न · 2 मिनटDainik Bhaskar
राजव्यवस्थाउत्तराखंडUKPSC: अति महत्वपूर्ण

उत्तराखंड पुलिस को प्रेसिडेंट कलर्स; 1,500 परियोजनाओं की शुरुआत

  • कार्यक्रम: उत्तराखंड के 26वें स्थापना दिवस पर अमित शाह का दौरा
  • परियोजनाओं की संख्या: 1,500 से अधिक विकास परियोजनाएं
पृष्ठभूमि GK: प्रेसिडेंट कलर्स अवार्डनोडल: गृह मंत्रालययह गलती न करें!
4 प्रश्न · 2 मिनटDainik Bhaskar
राजव्यवस्थाउत्तराखंडUKPSC: अति महत्वपूर्ण

उत्तराखंड में DA बढ़कर 63% हुआ, 1 जुलाई 2026 से लागू

  • नोडल निकाय: उत्तराखंड सरकार
पृष्ठभूमि GK: महंगाई भत्ता (DA)नोडल: उत्तराखंड सरकारयह गलती न करें!
4 प्रश्न · 2 मिनटHindustanDainik Bhaskar