प्रिलिम्स के लिए: खाद्य सुरक्षा, कोल्ड चेन, पशुओं में गर्मी का तनाव, शुद्ध बोया गया क्षेत्र, सालाना खाद्य नुकसान का मूल्य, बर्बाद होने वाले फल और सब्ज़ियां, बर्बाद होने वाला अनाज, कोल्ड चेन में ताज़ा उपज
मेन्स के लिए: कटाई-उपरांत नुकसान, जलवायु सहनशीलता, कोल्ड चेन बुनियादी ढांचा, पशुओं पर गर्मी का तनाव, खाद्य सुरक्षा का संबंध
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- जलवायु जोखिमों के कारण भारत को हर साल 13 अरब डॉलर के खाद्य पदार्थों का नुकसान होता है।
- उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले 40% फल और सब्ज़ियां बर्बाद हो जाती हैं।
- भारत में केवल 4% ताज़ा उपज की कोल्ड चेन तक पहुंच है।
- गर्मी का तनाव हर साल दूध उत्पादन में ₹2,661 करोड़ का नुकसान करता है।
- 20 लाख हेक्टेयर से अधिक खेती की ज़मीन प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होती है।
चर्चा में क्यों?
क्लाईमेट ट्रेंड्स की एक रिपोर्ट बताती है कि जलवायु परिवर्तन से अत्यधिक मौसम, कमज़ोर कोल्ड चेन और पशुओं पर गर्मी के तनाव के कारण भारत में हर साल 13 अरब डॉलर का खाद्य नुकसान होता है। उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले लगभग 40% फल और सब्ज़ियां और 5-6% अनाज बर्बाद हो जाते हैं, जिससे भारत की खाद्य सुरक्षा को खतरा है।
सारांश
- जलवायु जोखिमों और अपर्याप्त कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे के कारण भारत को हर साल 13 अरब डॉलर का खाद्य नुकसान होता है।
- उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले लगभग 40% फल और सब्ज़ियां और 5-6% अनाज बर्बाद हो जाते हैं, और केवल 4% ताज़ा उपज कोल्ड चेन सुविधाओं के दायरे में आती है।
- गर्मी के तनाव से दूध उत्पादन में हर साल अनुमानित ₹2,661 करोड़ का नुकसान होता है (लगभग 18 लाख टन, कुल दूध उत्पादन का 2%)।
मुख्य बातें
कटाई के बाद भारी नुकसान
कमज़ोर कोल्ड चेन और अत्यधिक मौसम के कारण उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले भारत में 40% फल और सब्ज़ियां और 5-6% अनाज बर्बाद हो जाते हैं।
गर्मी का तनाव डेयरी क्षेत्र पर असर डालता है
गर्मी के तनाव से दूध उत्पादन में हर साल अनुमानित ₹2,661 करोड़ का नुकसान होता है, जो 18 लाख टन या भारत के कुल उत्पादन का 2% के बराबर है।
अत्यधिक मौसम से खेती की ज़मीन को नुकसान
हर साल 20 लाख हेक्टेयर से अधिक (शुद्ध बोए गए क्षेत्र का 14%) बाढ़, सूखे, चक्रवात, लू और शीतलहर से प्रभावित होता है।
पृष्ठभूमि
जलवायु परिवर्तन भारत में अत्यधिक मौसम की घटनाओं को तेज़ कर रहा है, जिनमें रिकॉर्ड गर्मी (2024 अब तक का सबसे गर्म वर्ष था), अनियमित बारिश, बाढ़ और सूखा शामिल हैं। इनका सीधा असर कृषि पर पड़ता है, जिसमें लगभग आधी कार्यबल लगी है। भारत का कटाई-उपरांत बुनियादी ढांचा कमज़ोर है: केवल 4% ताज़ा उपज की कोल्ड चेन तक पहुंच है, जिससे भारी बर्बादी होती है। क्लाईमेट ट्रेंड्स की रिपोर्ट इन संयुक्त नुकसानों को सालाना 13 अरब डॉलर आंकती है।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
13 अरब डॉलर के नुकसान के तीन हिस्से हैं: (क) शुद्ध बोए गए क्षेत्र के 14% पर अत्यधिक मौसम से फसल का नुकसान, (ख) अपर्याप्त कोल्ड स्टोरेज और परिवहन से कटाई-उपरांत नुकसान, और (ग) गर्मी के तनाव से पशुधन का नुकसान। फल और सब्ज़ियों की 40% बर्बादी पोषण सुरक्षा के लिए खास तौर पर चिंताजनक है। डेयरी क्षेत्र में ₹2,661 करोड़ (दूध उत्पादन का 2%) का नुकसान उन छोटे किसानों को सीधे प्रभावित करता है जिनके पास अधिकांश पशु हैं। इस साल छह राज्यों ने सूखा घोषित किया, जो संकट के पैमाने को दिखाता है।
आगे की राह
इससे निपटने के लिए कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे में निवेश, किसानों के लिए बेहतर मौसम सलाह और जलवायु-सहनशील फसल किस्मों की ज़रूरत है। कृषि अवसंरचना कोष और प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा लागू) जैसी मौजूदा सरकारी योजनाओं का विस्तार किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में जलवायु जोखिम को शामिल करना और राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन का विस्तार करना महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट रेखांकित करती है कि खाद्य नुकसान एक व्यवस्थागत समस्या है, जिसके लिए समन्वित नीतिगत प्रतिक्रिया चाहिए।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- खाद्य सुरक्षा
- वह स्थिति जिसमें पर्याप्त मात्रा में सस्ता और पौष्टिक भोजन विश्वसनीय रूप से मिल सके। इसके चार स्तंभ हैं: उपलब्धता, पहुंच, उपयोग और स्थिरता।
- कोल्ड चेन
- तापमान-नियंत्रित आपूर्ति श्रृंखला, जिसमें शीत भंडारण और परिवहन सुविधाएं शामिल हैं ताकि खेत से उपभोक्ता तक जल्दी खराब होने वाली चीज़ें सुरक्षित रहें।
- पशुओं में गर्मी का तनाव
- वह स्थिति जिसमें पशु शरीर की अतिरिक्त गर्मी बाहर नहीं निकाल पाते, जिससे चारे का सेवन घटता है, दूध उत्पादन कम होता है, प्रजनन समस्याएं आती हैं और मृत्यु दर बढ़ती है।
- शुद्ध बोया गया क्षेत्र
- किसी वर्ष में जिस भूमि पर फसलें बोई और काटी जाती हैं, उसका कुल क्षेत्र। इसमें परती भूमि या खेती के लिए उपयोग न होने वाली भूमि शामिल नहीं होती।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।
परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: सालाना 13 अरब डॉलर का खाद्य नुकसान; 40% फल और सब्ज़ियां बर्बाद; 4% कोल्ड चेन कवरेज; ₹2,661 करोड़ दूध उत्पादन नुकसान
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (कोल्ड चेन और खाद्य-नुकसान नीति के लिए)
यह गलती न करें!
परीक्षार्थी फल और सब्ज़ियों के 40% नुकसान को अनाज के 5-6% नुकसान के साथ भ्रमित कर सकते हैं, या 13 अरब डॉलर के आंकड़े को कुल कृषि उत्पादन से बदल सकते हैं। 4% कोल्ड चेन कवरेज को गलती से 40% लिखा जा सकता है।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- कटाई-उपरांत नुकसान, जलवायु सहनशीलता, कोल्ड चेन बुनियादी ढांचा, पशुओं पर गर्मी का तनाव, खाद्य सुरक्षा का संबंध
कहीं अटके? एक टैप में समझें
जलवायु परिवर्तन लू और बाढ़ जैसे अत्यधिक मौसम को बढ़ा रहा है, जिससे फसलों और पशुधन को नुकसान होता है। साथ ही भारत में कटाई के बाद उपज को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त शीत भंडारण और रेफ्रिजरेटेड परिवहन की कमी है। इन सबसे मिलकर हर साल 13 अरब डॉलर का खाद्य नुकसान होता है। उदाहरण के लिए, बिकने से पहले 40% फल और सब्ज़ियां सड़ जाती हैं, और गर्मी का तनाव दूध उत्पादन को 2% घटा देता है।
- जलवायु जोखिमों के कारण भारत को हर साल 13 अरब डॉलर के खाद्य पदार्थों का नुकसान होता है।
- उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले 40% फल और सब्ज़ियां बर्बाद हो जाती हैं।
- भारत में केवल 4% ताज़ा उपज की कोल्ड चेन तक पहुंच है।
- गर्मी का तनाव हर साल दूध उत्पादन में ₹2,661 करोड़ का नुकसान करता है।
- 20 लाख हेक्टेयर से अधिक खेती की ज़मीन प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित होती है।
- भूगोल: जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभाव
- कृषि: कटाई-उपरांत प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा
जुड़ी अवधारणाएँ: खाद्य सुरक्षा, कोल्ड चेन, पशुओं में गर्मी का तनाव, शुद्ध बोया गया क्षेत्र
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1मध्यम
भारत में कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे के विकास की मुख्य ज़िम्मेदारी किस मंत्रालय की है?
व्याख्या: खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से भारत में कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे के विकास का नोडल मंत्रालय है। कृषि मंत्रालय फसल उत्पादन संभालता है, जबकि पर्यावरण और वाणिज्य मंत्रालय मुख्य रूप से कोल्ड चेन के लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं।
- Q2कठिन
भारतीय कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.जलवायु जोखिमों और खराब कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे के कारण भारत को हर साल 13 अरब डॉलर का खाद्य नुकसान होता है।
- 2.भारत के कुल खाद्य उत्पादन का लगभग 40% उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले बर्बाद हो जाता है।
- 3.गर्मी के तनाव से दूध उत्पादन में हर साल अनुमानित ₹2,661 करोड़ का नुकसान होता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: क्लाईमेट ट्रेंड्स रिपोर्ट में सालाना 13 अरब डॉलर के खाद्य नुकसान का उल्लेख है। कथन 2 गलत है: 40% नुकसान फल और सब्ज़ियों का है, कुल खाद्यान्न का नहीं। अनाज में नुकसान 5-6% है। कथन 3 सही है: गर्मी के तनाव से हर साल दूध उत्पादन में ₹2,661 करोड़ का नुकसान होता है। अतः विकल्प B सही है।
- Q3मध्यम
क्लाईमेट ट्रेंड्स रिपोर्ट के अनुसार, भारत की ताज़ा उपज का कितना प्रतिशत कोल्ड चेन सुविधाओं के दायरे में है?
व्याख्या: भारत में केवल 4% ताज़ा उपज कोल्ड चेन सुविधाओं के दायरे में है। 14% शुद्ध बोए गए क्षेत्र का प्रतिशत है जो प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित है। 40% फल और सब्ज़ियों का प्रतिशत है जो बर्बाद हो जाती हैं।
- Q4मध्यम
क्लाईमेट ट्रेंड्स रिपोर्ट भारत के खाद्य नुकसान के संबंध में कौन-सी मुख्य व्यवस्थागत चुनौती रेखांकित करती है?
व्याख्या: रिपोर्ट बताती है कि केवल 4% ताज़ा उपज की कोल्ड चेन तक पहुंच है, जिससे फल और सब्ज़ियों की 40% बर्बादी होती है। इससे कमज़ोर शीत भंडारण और परिवहन मुख्य व्यवस्थागत समस्या के रूप में सामने आते हैं। उत्पादकता और नियमन मुख्य विषय नहीं हैं, और विदेशी निवेश पर चर्चा नहीं की गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. जलवायु परिवर्तन से भारत में सालाना कितना खाद्य नुकसान होता है?
क्लाईमेट ट्रेंड्स रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु जोखिमों और अपर्याप्त कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे के कारण भारत को हर साल 13 अरब डॉलर के खाद्य पदार्थों का नुकसान होता है।
2. भारत में कितने प्रतिशत फल और सब्ज़ियां बर्बाद होती हैं?
उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले लगभग 40% फल और सब्ज़ियां बर्बाद हो जाती हैं, जबकि 5-6% अनाज का नुकसान होता है।
3. गर्मी का तनाव भारत के दूध उत्पादन को कैसे प्रभावित करता है?
गर्मी के तनाव से दूध उत्पादन में हर साल अनुमानित ₹2,661 करोड़ का नुकसान होता है, जो लगभग 18 लाख टन या भारत के कुल दूध उत्पादन का 2% है।
4. भारत की ताज़ा उपज का कितना प्रतिशत कोल्ड चेन तक पहुंच रखता है?
भारत में केवल 4% ताज़ा उपज कोल्ड चेन सुविधाओं के दायरे में है।
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मूल खबर5 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
