प्रिलिम्स के लिए: गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967, UAPA की धारा 43D(5), UAPA की धारा 15 (आतंकवादी कृत्य), ज़मानत बनाम अग्रिम ज़मानत, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), न्यायालय, पीठ, मुख्य कानूनी प्रावधान
मेन्स के लिए: प्रथम दृष्टया सच की कसौटी, UAPA ज़मानत व्यवस्था, न्यायिक अनुशासन, आतंकी कृत्य के तत्व, आर्थिक सुरक्षा
स्रोत:The Hindu
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एंटीलिया विस्फोटक मामले में सचिन वझे की ज़मानत रद्द की।
- फैसला 5 नवंबर 2026 को सुनाया गया।
- पीठ में न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले शामिल थे।
- अदालत ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 43D(5) लागू की।
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) जांच एजेंसी थी।
चर्चा में क्यों?
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वझे को एंटीलिया विस्फोटक मामले में दी गई ज़मानत रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि आरोप प्रथम दृष्टया UAPA की धारा 43D(5) की सीमा को पूरा करते हैं, जो आरोपों के सच प्रतीत होने पर ज़मानत पर रोक लगाती है। अदालत ने यह भी कहा कि कोई उद्योगपति या कोई भी नागरिक आतंकी खतरे का सामना दूर की संभावना के रूप में भी न करे, और ऐसी ज़मानत जनहित के खिलाफ होगी।
सारांश
- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एंटीलिया विस्फोटक मामले में सचिन वझे को निचली अदालत द्वारा दी गई ज़मानत रद्द कर दी।
- अदालत ने कहा कि सामग्री UAPA की धारा 43D(5) की सीमा को पूरा करती है, जो रिकॉर्ड पर पहली नज़र में आरोपों के सच प्रतीत होने पर ज़मानत पर रोक लगाती है।
- न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने कहा कि कोई उद्योगपति या कोई भी नागरिक आतंकी खतरे का सामना दूर की संभावना के रूप में भी न करे, और ज़मानत जनहित के खिलाफ होगी।
मुख्य बातें
UAPA के तहत ज़मानत रद्द
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सचिन वझे को निचली अदालत द्वारा दी गई ज़मानत रद्द की और कहा कि UAPA की धारा 43D(5) आरोपों के प्रथम दृष्टया सच प्रतीत होने पर ज़मानत पर रोक लगाती है।
आतंकी कृत्य के तत्व पूरे हुए
अदालत ने पाया कि वझे के कृत्य, जैसे जाली नंबर प्लेट का इस्तेमाल, जिलेटिन की छड़ें हासिल करना और एंटीलिया के पास विस्फोटक से भरी कार खड़ी करना, UAPA की धारा 15 से जुड़ते हैं।
निचली अदालत का आदेश निरस्त
पीठ ने निचली अदालत के तर्क को 'कानूनी विकृति' बताया और न्यायिक सिद्धांतों से हटना कहा, तथा उसका ज़मानत आदेश निरस्त कर दिया।
पृष्ठभूमि
एंटीलिया विस्फोटक मामले में फरवरी 2021 में मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास के पास जिलेटिन की छड़ों से लदी एक कार मिली थी। पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वझे को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत NIA ने गिरफ्तार किया था। निचली अदालत ने उन्हें ज़मानत दी थी, जिसे NIA ने बॉम्बे उच्च न्यायालय में चुनौती दी।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
उच्च न्यायालय का फैसला UAPA के सख्त ज़मानत ढांचे को मज़बूत करता है। धारा 43D(5) तब लगभग पूर्ण रोक लगा देती है, जब अदालत रिकॉर्ड को प्रथम दृष्टया देखकर आरोपों को सच मानती है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि नागरिकों की रक्षा के लिए बना पुलिस अधिकारी ऐसे कृत्यों की गुंजाइश नहीं रखता, और उसकी रिहाई से गवाहों से छेड़छाड़ और साक्ष्यों में हेरफेर का खतरा हो सकता है। फैसला यह भी बताता है कि उद्योगपतियों के योगदान से जुड़ी राष्ट्र की आर्थिक सुरक्षा UAPA की धारा 15 के तहत 'आतंकवादी कृत्य' तय करने में एक कारक हो सकती है।
आगे की राह
सचिन वझे मुकदमे की सुनवाई तक हिरासत में रहेंगे। यह फैसला निचली अदालतों के लिए मिसाल बनेगा कि UAPA ज़मानत याचिकाओं में गहन जांच की जाए, खासकर जब आरोपी कथित प्रभाव वाला पुलिस अधिकारी हो। अदालत की टिप्पणियों को देखते हुए NIA अब मुकदमे को आगे बढ़ाएगी, जिसकी सुनवाई में तेज़ी आने की संभावना है।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967
- एक ऐसा कानून जिसका उद्देश्य गैरकानूनी गतिविधियों की रोकथाम और आतंकी गतिविधियों से निपटना है। इसमें आतंकी कृत्यों के आरोपियों के लिए विशेष प्रक्रियाएं और सख्त ज़मानत शर्तें दी गई हैं।
- UAPA की धारा 43D(5)
- यह प्रावधान आरोपी को ज़मानत देने पर रोक लगाता है, यदि अदालत केस डायरी या रिपोर्ट को देखकर यह राय बनाए कि ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध आरोप प्रथम दृष्टया सच मानने के उचित आधार हैं।
- UAPA की धारा 15 (आतंकवादी कृत्य)
- आतंकवादी कृत्य को ऐसे कार्य के रूप में परिभाषित करता है जो भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा या आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डालने के इरादे से, या लोगों में आतंक फैलाने के लिए, विस्फोटक, आग्नेयास्त्र या अन्य घातक पदार्थों के उपयोग से किया गया हो।
- ज़मानत बनाम अग्रिम ज़मानत
- ज़मानत का अर्थ है मुकदमे के लंबित रहने के दौरान हिरासत से व्यक्ति की रिहाई, जबकि अग्रिम ज़मानत गिरफ्तारी से पहले अदालत द्वारा दी जाने वाली कानूनी सुरक्षा है। UAPA के तहत अग्रिम ज़मानत उपलब्ध नहीं है।
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)
- भारत की एक केंद्रीय आतंकवाद-रोधी कानून प्रवर्तन एजेंसी, जिसे NIA अधिनियम, 2008 के तहत भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता को प्रभावित करने वाले अपराधों की जांच और अभियोजन के लिए स्थापित किया गया।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस आंकड़े पर ध्यान दें: बॉम्बे उच्च न्यायालय ने 5 नवंबर 2026 को एंटीलिया विस्फोटक मामले में सचिन वझे की ज़मानत रद्द की।
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) जांच एजेंसी है।
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: UAPA, 1967 की धारा 43D(5) आरोपों के प्रथम दृष्टया सच होने पर ज़मानत पर रोक लगाती है।
यह गलती न करें!
परीक्षक धारा 43D(5) (ज़मानत पर रोक) को धारा 43D (सामान्य प्रक्रिया) से भ्रमित कर सकते हैं, या UAPA को TADA या POTA जैसे अन्य आतंकवाद-रोधी कानूनों से मिला सकते हैं। वे 'बॉम्बे उच्च न्यायालय' को 'सर्वोच्च न्यायालय' या 'निचली अदालत' से भी बदल सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- प्रथम दृष्टया सच की कसौटी, UAPA ज़मानत व्यवस्था, न्यायिक अनुशासन, आतंकी कृत्य के तत्व, आर्थिक सुरक्षा
कहीं अटके? एक टैप में समझें
सचिन वझे पर आरोप है कि उन्होंने मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटक से भरी कार खड़ी की थी। निचली अदालत ने उन्हें ज़मानत दी थी, लेकिन बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उसे रद्द कर दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि UAPA नाम के विशेष आतंक-रोधी कानून के तहत, यदि केस फाइल के आधार पर आरोप सच लगते हैं तो ज़मानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि कोई भी नागरिक, चाहे अमीर हो या गरीब, आतंकी खतरे का सामना दूर की संभावना के रूप में भी न करे।
- बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एंटीलिया विस्फोटक मामले में सचिन वझे की ज़मानत रद्द की।
- फैसला 5 नवंबर 2026 को सुनाया गया।
- पीठ में न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले शामिल थे।
- अदालत ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 43D(5) लागू की।
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) जांच एजेंसी थी।
- राजव्यवस्था: न्यायपालिका: उच्च न्यायालय और ज़मानत प्रावधान
- सुरक्षा: आतंक-रोधी कानून: UAPA, NIA
जुड़ी अवधारणाएँ: गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967, UAPA की धारा 43D(5), UAPA की धारा 15 (आतंकवादी कृत्य), ज़मानत बनाम अग्रिम ज़मानत
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
एंटीलिया विस्फोटक मामले में सचिन वझे की ज़मानत किस न्यायालय ने रद्द की?
व्याख्या: बॉम्बे उच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ के फैसले में निचली अदालत का ज़मानत आदेश निरस्त किया। सर्वोच्च न्यायालय इस चरण पर इस मामले की सुनवाई नहीं कर रहा था, और यह सर्वोच्च अपीलीय न्यायालय है। दिल्ली उच्च न्यायालय का मुंबई के इस मामले पर क्षेत्राधिकार नहीं है। NIA विशेष न्यायालय वह निचली अदालत है जिसका आदेश निरस्त किया गया।
- Q2कठिन
एंटीलिया विस्फोटक मामले के फैसले से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.बॉम्बे उच्च न्यायालय ने माना कि सचिन वझे के विरुद्ध आरोप UAPA की धारा 43D(5) की सीमा को पूरा करते हैं।
- 2.अदालत ने कहा कि कोई उद्योगपति या कोई भी नागरिक आतंकी खतरे का सामना दूर की संभावना के रूप में भी न करे।
- 3.अदालत ने निचली अदालत के ज़मानत आदेश को बरकरार रखा।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है, क्योंकि अदालत ने पाया कि सामग्री UAPA की धारा 43D(5) की सीमा को पूरा करती है। कथन 2 सही है, क्योंकि अदालत ने कहा कि कोई उद्योगपति या कोई भी नागरिक आतंकी खतरे का सामना दूर की संभावना के रूप में भी न करे। कथन 3 गलत है, क्योंकि अदालत ने निचली अदालत का ज़मानत आदेश बरकरार नहीं रखा, बल्कि उसे रद्द किया।
- Q3मध्यम
UAPA की किस धारा में 'आतंकवादी कृत्य' की परिभाषा दी गई है, जिसे अदालत ने सचिन वझे के आरोपों से जोड़ा?
व्याख्या: अदालत ने माना कि वझे के कृत्य सीधे UAPA की धारा 15 से जुड़ते हैं, जो आतंकी कृत्य को परिभाषित करती है। धारा 43D(5) ज़मानत पर रोक का प्रावधान है। धारा 17 और 20 UAPA के अन्य अपराधों से संबंधित हैं, जैसे आतंकी कृत्यों के लिए धन जुटाना और आतंकी गिरोह का सदस्य होना।
- Q4मध्यम
एंटीलिया मामले में बॉम्बे उच्च न्यायालय के फैसले का मुख्य कानूनी प्रभाव क्या है?
व्याख्या: इस फैसले से साफ़ होता है कि UAPA के तहत ज़मानत अधिकार का मामला नहीं है। अदालत को धारा 43D(5) के तहत 'प्रथम दृष्टया सच' की कसौटी लागू करनी होगी। न्यायालय ने न तो IPC का कोई नया अपराध बनाया और न ही NIA को असंवैधानिक घोषित किया। उसने केवल वाज़ की ज़मानत रद्द की, सभी आरोपियों की रिहाई का आदेश नहीं दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एंटीलिया मामले में क्या फैसला दिया?
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सचिन वझे को दी गई ज़मानत रद्द की और माना कि आरोप UAPA की धारा 43D(5) की सीमा को पूरा करते हैं, जो आरोपों के प्रथम दृष्टया सच प्रतीत होने पर ज़मानत पर रोक लगाती है।
2. फैसला सुनाने वाली न्यायाधीश पीठ कौन थी?
फैसला बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने सुनाया।
3. UAPA की धारा 43D(5) क्या है?
गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 43D(5) ज़मानत देने पर रोक लगाती है, यदि अदालत रिकॉर्ड को देखकर यह माने कि आरोप प्रथम दृष्टया सच हैं।
4. एंटीलिया विस्फोटक मामले की जांच किस एजेंसी ने की?
इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने की।
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मूल खबर7 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें

