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कर्नाटक उच्च न्यायालय: किसी महिला को गलत नजर से देखना BNS धारा 75 के तहत यौन संबंध की मांग नहीं

7 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत3 प्रश्नखबर 44 / 79

प्रिलिम्स के लिए: BNS की धारा 75 – यौन उत्पीड़न, आपराधिक धमकी (BNS की धारा 351), न्यायालय, न्यायाधीश, मुख्य BNS धारा, मामले का नाम, फैसले की तारीख, वर्तमान संदर्भ

मेन्स के लिए: न्यायिक व्याख्या, BNS बनाम IPC, यौन उत्पीड़न की सीमा, आरोप वापस लेना, आपराधिक कानून का दुरुपयोग

स्रोत:HindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा कि किसी महिला को केवल 'गलत नजर से देखना' भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75(1)(ii) के तहत 'यौन संबंध की मांग या अनुरोध' नहीं है। शिकायतकर्ता के अधिकांश आरोप वापस लेने और केवल गलत नजर से देखने का आरोप बचे रहने के बाद अदालत ने एक व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। यह फैसला BNS के यौन उत्पीड़न प्रावधानों के दायरे को स्पष्ट करता है।

सारांश

  • कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा कि 'गलत नजर से देखना' BNS की धारा 75(1)(ii) के तहत यौन संबंध की मांग नहीं है।
  • यह फैसला 2 नवंबर 2026 को न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज की पीठ ने हफीज खासीम बनाम कर्नाटक राज्य मामले में सुनाया।
  • शिकायतकर्ता के अधिकांश आरोप वापस लेने के बाद अदालत ने BNS की धारा 75(1)(ii), 75(1)(iv), 351(2) और 352 के तहत आरोप रद्द किए।

मुख्य बातें

  • BNS धारा 75 की स्पष्टता

    कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा कि BNS की धारा 75(1)(ii) के तहत 'गलत नजर से देखना' 'यौन संबंध की मांग' के बराबर नहीं है।

  • शिकायतकर्ता का आरोप वापस लेना

    महिला ने अपने शुरुआती आरोपों में से ज्यादातर वापस लेते हुए कहा कि आरोपी ने न यौन संबंध की मांग की थी, न धमकी दी थी, केवल गलत नजर से देखा था।

  • कार्यवाही रद्द

    अदालत ने चार BNS धाराओं के तहत आरोप रद्द किए, क्योंकि वापस लिए गए आरोपों को समर्थन देने वाला कोई और सबूत नहीं था।

पृष्ठभूमि

मामला एक महिला की शिकायत से शुरू हुआ, जिसमें उसने कहा कि पैसों के विवाद को सुलझाने के लिए वह आरोपी के घर गई थी, जहां आरोपी ने पैसे और फायदे के बदले यौन संबंध की मांग की और वापस न करने पर शारीरिक नुकसान की धमकी दी। पुलिस ने BNS की धारा 75(1)(ii) (यौन संबंध की मांग), 75(1)(iv) (यौन संकेत वाली टिप्पणी), 351(2) (आपराधिक धमकी) और 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) के तहत मामला दर्ज किया।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

जांच के दौरान महिला ने बाद के बयान में अपने ज्यादातर आरोप वापस ले लिए और माना कि आरोपी ने न यौन संबंध की मांग की, न पैसे का वादा किया, न धमकी दी। केवल 'गलत नजर से देखने' का आरोप बचा रहा। फिर भी पुलिस ने चार्जशीट में मूल धाराएं रखीं। उच्च न्यायालय ने कहा कि केवल 'गलत नजर से देखने' का आरोप BNS 75(1)(ii) के तहत यौन संबंध की मांग के आरोप को टिकाए नहीं रख सकता, खासकर जब शिकायतकर्ता ने ही मूल आरोपों से इनकार कर दिया हो। फैसला दोहराता है कि BNS में यौन उत्पीड़न के लिए यौन संबंध की स्पष्ट 'मांग या अनुरोध' जरूरी है, केवल संकेतात्मक व्यवहार पर्याप्त नहीं।

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

BNS की धारा 75 – यौन उत्पीड़न
BNS की धारा 75 यौन उत्पीड़न के अपराध को परिभाषित करती है, जिसमें यौन संबंध की मांग या अनुरोध (खंड ii), यौन संकेत वाली टिप्पणी (खंड iv) और यौन प्रकृति का अन्य अवांछित शारीरिक या मौखिक व्यवहार शामिल है।
आपराधिक धमकी (BNS की धारा 351)
BNS की धारा 351 आपराधिक धमकी को परिभाषित करती है, यानी किसी को उसके शरीर, प्रतिष्ठा या संपत्ति को चोट पहुंचाने की धमकी देना, इस इरादे से कि उसमें भय पैदा हो या उसे कोई कार्य करने के लिए बाध्य किया जाए।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इन आंकड़ों पर ध्यान दें: 2 नवंबर 2026 का कर्नाटक उच्च न्यायालय का फैसला, हफीज खासीम बनाम कर्नाटक राज्य
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 75(1)(ii) – यौन संबंध की मांग
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: कर्नाटक उच्च न्यायालय

यह गलती न करें!

परीक्षार्थी BNS धारा 75(1)(ii) को IPC धारा 354A (यौन उत्पीड़न) से भ्रमित कर सकते हैं या उसे BNS धारा 74 (बलात्कार) से बदल सकते हैं। वे यह भी जांच सकते हैं कि क्या फैसला कहता है कि 'गलत नजर से देखना' कभी यौन उत्पीड़न नहीं होता (यह गलत है, यह उस विशेष खंड के तहत 'यौन संबंध की मांग' नहीं है)।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • न्यायिक व्याख्या, BNS बनाम IPC, यौन उत्पीड़न की सीमा, आरोप वापस लेना, आपराधिक कानून का दुरुपयोग

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    किस उच्च न्यायालय ने फैसला दिया कि किसी महिला को गलत नजर से देखना BNS धारा 75(1)(ii) के तहत यौन संबंध की मांग नहीं है?

  2. Q2मध्यम

    कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हफीज खासीम बनाम कर्नाटक राज्य मामले में फैसला किस तारीख को सुनाया?

  3. Q3मध्यम

    हफीज खासीम बनाम कर्नाटक राज्य में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले का मुख्य कानूनी महत्व क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कर्नाटक उच्च न्यायालय ने किसी महिला को गलत नजर से देखने के बारे में क्या कहा?

न्यायालय ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75(1)(ii) के तहत किसी महिला को केवल गलत नजर से देखना 'यौन संबंध की मांग या अनुरोध' नहीं है।

2. यौन संबंध की मांग से कौन-सी BNS धारा संबंधित है?

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 75(1)(ii) यौन उत्पीड़न के हिस्से के रूप में यौन संबंध की मांग या अनुरोध करने के अपराध से संबंधित है।

3. हफीज खासीम बनाम कर्नाटक राज्य में फैसला किसने सुनाया?

फैसला कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज ने 2 नवंबर 2026 को सुनाया।

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