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प्रिलिम्स के लिए: NCLAT (राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण), NCLT (राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण), दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016, नियुक्त व्यक्ति, पद, पदभार ग्रहण करने की तारीख, NCLAT का पूर्ण रूप, नोडल मंत्रालय
मेन्स के लिए: अर्ध-न्यायिक न्यायाधिकरण, अपीलीय तंत्र, कॉरपोरेट विवाद समाधान, दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता संहिता
स्रोत:Dainik Bhaskar
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- जस्टिस राजेश बिंदल 5 नवंबर 2026 को NCLAT के चेयरपर्सन नियुक्त हुए।
- NCLAT का पूर्ण रूप राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण है।
- NCLAT NCLT के आदेशों के खिलाफ अपीलें सुनता है।
- NCLAT की स्थापना कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत हुई।
- जस्टिस अशोक भूषण NCLAT के पूर्व चेयरपर्सन थे।
चर्चा में क्यों?
पूर्व सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश राजेश बिंदल को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। यह एक प्रमुख अर्ध-न्यायिक निकाय है, जो कंपनी विवादों, विलय, दिवाला और प्रतिस्पर्धा कानून से जुड़े मामलों में NCLT के आदेशों के खिलाफ अपीलें सुनता है। यह पद लगभग चार महीने से खाली था।
सारांश
- पूर्व सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश जस्टिस राजेश बिंदल NCLAT के चेयरपर्सन नियुक्त; 5 नवंबर 2026 को पदभार संभाला।
- NCLAT राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के आदेशों के खिलाफ कंपनी विलय, दिवाला समाधान और प्रतिस्पर्धा कानून से जुड़े मामलों में अपीलें सुनता है।
- नियमित चेयरपर्सन का पद लगभग चार महीने से खाली था; जस्टिस योगेश खन्ना कार्यवाहक चेयरपर्सन के रूप में काम कर रहे थे।
मुख्य बातें
नए NCLAT चेयरपर्सन
पूर्व सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश राजेश बिंदल को NCLAT का नियमित चेयरपर्सन नियुक्त किया गया, जिससे चार महीने की रिक्ति समाप्त हुई।
NCLAT का अधिकार क्षेत्र
NCLAT, NCLT के आदेशों की अपीलीय संस्था है और इसके दायरे में कंपनी विलय, दिवाला, परिसमापन और प्रतिस्पर्धा कानून की अपीलें आती हैं।
रिक्त पद भरा गया
पद चार महीने पहले खाली होने के बाद से जस्टिस योगेश खन्ना कार्यवाहक चेयरपर्सन के रूप में काम कर रहे थे।
पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत स्थापित एक प्रमुख अर्ध-न्यायिक निकाय है। यह राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के आदेशों के खिलाफ अपीलें सुनता है। NCLT कंपनी विवादों, विलय और अधिग्रहण, तथा दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 के तहत परिसमापन से जुड़े मामले देखता है। चेयरपर्सन का पद लगभग चार महीने से खाली था और जस्टिस योगेश खन्ना कार्यवाहक चेयरपर्सन के रूप में काम कर रहे थे।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
जस्टिस राजेश बिंदल की नियुक्ति से NCLAT को नियमित मुखिया मिला है, जिससे लंबित अपीलों के निपटारे और निर्णयों में स्थिरता की उम्मीद है। पूर्व सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश होने के नाते उनके पास उच्च न्यायिक अनुभव है। NCLAT प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत भी अपीलें सुनता है, इसलिए कॉरपोरेट शासन और बाज़ार नियमन में इसकी भूमिका अहम है। यह नियुक्ति उस नेतृत्व की कमी को भरती है, जो पूर्व चेयरपर्सन जस्टिस अशोक भूषण का कार्यकाल खत्म होने के बाद से बनी हुई थी।
आगे की राह
नियमित चेयरपर्सन होने से NCLAT अब पूरी क्षमता से काम कर सकता है और लंबित अपीलों पर तेज़ी से सुनवाई कर सकता है। कॉरपोरेट कानून के मामलों का कुल लंबित बोझ घटाने के लिए सरकार NCLT और NCLAT में बाकी रिक्तियां भी भर सकती है। यह नियुक्ति भारत में दिवाला समाधान और कॉरपोरेट विवाद निवारण के संस्थागत ढांचे को मज़बूत करती है।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- NCLAT (राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण)
- कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 410 के तहत स्थापित एक अर्ध-न्यायिक अपीलीय निकाय, जो NCLT के आदेशों के खिलाफ अपीलें सुनता है। यह प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 और दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016 के तहत भी अपीलें सुनता है।
- NCLT (राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण)
- कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत स्थापित एक अर्ध-न्यायिक निकाय, जो कंपनी कानून से जुड़े मामलों पर फैसला देता है, जिनमें विलय, समामेलन, उत्पीड़न और कुप्रबंधन, तथा दिवाला समाधान शामिल हैं।
- दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016
- एक व्यापक कानून, जो कॉरपोरेट व्यक्तियों, साझेदारी फर्मों और व्यक्तियों के दिवाला समाधान से जुड़े कानूनों को समेकित और संशोधित करता है, और यह समाधान समय-सीमा के भीतर करने पर ज़ोर देता है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस डेटा पर ध्यान दें: जस्टिस राजेश बिंदल 5 नवंबर 2026 को NCLAT के चेयरपर्सन नियुक्त हुए
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय
- इस विधिक बिंदु पर ध्यान दें: कंपनी अधिनियम, 2013 (धारा 410)
यह गलती न करें!
छात्र अक्सर NCLAT और NCLT को आपस में मिला देते हैं। NCLAT अपीलीय निकाय है, जो NCLT के आदेशों के खिलाफ अपीलें सुनता है, इसका उलटा नहीं। साथ ही NCLAT का अधिकार क्षेत्र केवल कंपनी कानून तक सीमित नहीं है, इसमें प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत प्रतिस्पर्धा कानून की अपीलें भी शामिल हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- अर्ध-न्यायिक न्यायाधिकरण, अपीलीय तंत्र, कॉरपोरेट विवाद समाधान, दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता संहिता
कहीं अटके? एक टैप में समझें
NCLAT एक न्यायालय जैसी संस्था है, जो तब अपीलें सुनती है जब कोई NCLT के फैसले से असहमत हो। NCLT कंपनी विवादों और दिवाला मामलों को देखता है। चार महीने से इसके चेयरपर्सन का पद खाली था। अब पूर्व सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश जस्टिस राजेश बिंदल को इसका नियमित चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है।
- जस्टिस राजेश बिंदल 5 नवंबर 2026 को NCLAT के चेयरपर्सन नियुक्त हुए।
- NCLAT का पूर्ण रूप राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण है।
- NCLAT NCLT के आदेशों के खिलाफ अपीलें सुनता है।
- NCLAT की स्थापना कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत हुई।
- जस्टिस अशोक भूषण NCLAT के पूर्व चेयरपर्सन थे।
- राजव्यवस्था: अधिकरण और अर्ध-न्यायिक निकाय
- शासन: कॉरपोरेट शासन और दिवाला ढांचा
जुड़ी अवधारणाएँ: NCLAT (राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण), NCLT (राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण), दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता संहिता (IBC), 2016
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
NCLAT के प्रशासनिक नियंत्रण के लिए मुख्य रूप से कौन-सा मंत्रालय ज़िम्मेदार है?
व्याख्या: NCLAT कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत स्थापित है, जिसका प्रशासन कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय करता है। विधि एवं न्याय मंत्रालय न्यायालयों और विधिक मामलों को देखता है, लेकिन कॉरपोरेट न्यायाधिकरणों को सीधे नहीं चलाता। वित्त मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय NCLAT के नोडल मंत्रालय नहीं हैं।
- Q2कठिन
NCLAT के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.NCLAT वह अपीलीय न्यायाधिकरण है, जो NCLT के आदेशों के खिलाफ अपीलें सुनता है।
- 2.NCLAT प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत भी अपीलें सुनता है।
- 3.NCLAT का चेयरपर्सन सर्वोच्च न्यायालय का कार्यरत न्यायाधीश होना अनिवार्य है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: NCLAT NCLT के आदेशों के खिलाफ अपीलें सुनता है। कथन 2 सही है: NCLAT प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत भी अपीलें सुनता है। कथन 3 गलत है: चेयरपर्सन का कार्यरत सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश होना ज़रूरी नहीं है; पूर्व सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश या उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भी पात्र हैं। अतः विकल्प C सही है।
- Q3मध्यम
जस्टिस राजेश बिंदल ने NCLAT के नए चेयरपर्सन के रूप में किस तारीख को पदभार संभाला?
व्याख्या: जस्टिस राजेश बिंदल ने 5 नवंबर 2026 को NCLAT चेयरपर्सन के रूप में पदभार संभाला। 1 नवंबर गलत है; 6 नवंबर वह दिन है जब समाचार प्रकाशित हुआ, पदभार ग्रहण की तारीख नहीं; और 15 नवंबर ऐसी तारीख है जिसका समाचार में कोई आधार नहीं है।
- Q4मध्यम
चार महीने की रिक्ति के बाद NCLAT में नियमित चेयरपर्सन नियुक्त करने का मुख्य महत्व क्या है?
व्याख्या: नियमित चेयरपर्सन से IBC, कंपनी अधिनियम और प्रतिस्पर्धा अधिनियम के तहत होने वाली अपीलों की सुनवाई में स्थिर नेतृत्व मिलता है। NCLAT आपराधिक मामले नहीं सुनता, धोखाधड़ी की जांच नहीं करता (यह भूमिका SFIO या जांच एजेंसियों की है), और सरकार दोनों न्यायाधिकरणों को मिला नहीं रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. NCLAT के नए चेयरपर्सन के रूप में किसे नियुक्त किया गया है?
पूर्व सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश राजेश बिंदल को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है।
2. जस्टिस राजेश बिंदल ने NCLAT चेयरपर्सन के रूप में कब पदभार संभाला?
उन्होंने 5 नवंबर 2026 को पदभार संभाला।
3. NCLAT का पूर्ण रूप क्या है और यह क्या करता है?
NCLAT का पूर्ण रूप राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण है। यह कंपनी विवादों, विलय और दिवाला से जुड़े NCLT के आदेशों के खिलाफ अपीलें सुनता है, और प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत भी अपीलें सुनता है।
4. इस नियुक्ति से पहले NCLAT के कार्यवाहक चेयरपर्सन कौन थे?
जस्टिस राजेश बिंदल की नियुक्ति से पहले जस्टिस योगेश खन्ना कार्यवाहक चेयरपर्सन के रूप में काम कर रहे थे।
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मूल खबर6 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें

