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प्रिलिम्स के लिए: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, केंद्रीय सूचना आयोग (CIC), सूचना आयुक्त, नोडल निकाय, संबंधित अधिनियम, मौजूदा संदर्भ
मेन्स के लिए: पारदर्शिता, जवाबदेही, RTI अधिनियम 2005, लोक सूचना अधिकारी (PIO), प्रशासनिक समन्वय
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- CIC ने 5 नवंबर 2026 को RTI जवाबों में देरी पर रेलवे को चेताया।
- RTI आवेदन नवंबर 2019 में दायर हुआ था।
- सूचना आयुक्त स्वागता दास ने चेतावनी जारी की।
- RTI अधिनियम, 2005 पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देता है।
- RTI अधिनियम के तहत CIC सर्वोच्च अपीलीय निकाय है।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने भारतीय रेलवे को RTI आवेदनों का जवाब देने में देरी और विभागों के बीच प्रशासनिक जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति पर चेतावनी दी है।
सारांश
- CIC ने RTI जवाबों में देरी और विभागों के बीच प्रशासनिक जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति पर रेलवे को चेताया।
- यह चेतावनी सहकारी समितियों द्वारा रेलवे की ज़मीन पर कथित अनधिकृत कब्ज़े और दुरुपयोग की शिकायत पर दी गई।
- सूचना आयुक्त स्वागता दास ने कहा कि आवेदन को बार-बार अलग-अलग विभागों में भेजा गया और यह सुनिश्चित नहीं किया गया कि जानकारी अपीलकर्ता को मिले।
मुख्य बातें
रेलवे को CIC की चेतावनी
CIC ने RTI जवाबों में देरी और विभागों के बीच जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति पर रेलवे को चेतावनी दी।
RTI आवेदन का ब्योरा
नवंबर 2019 में दायर RTI आवेदन में सहकारी समितियों द्वारा रेलवे की ज़मीन पर अनधिकृत कब्ज़े की शिकायत पर की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा गया था।
विभागीय समन्वय की समस्या
यह आवेदन रेलवे बोर्ड, उत्तर रेलवे, लेखा विभाग, इंजीनियरिंग डिवीजन और कार्मिक शाखा के बीच कई बार भेजा गया।
पृष्ठभूमि
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकरणों से जानकारी मांगने का अधिकार देता है। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) इस अधिनियम के तहत सर्वोच्च अपीलीय निकाय है। RTI जवाबों में देरी और जिम्मेदारी टालना पारदर्शिता और जवाबदेही के उद्देश्य को कमज़ोर करता है।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
CIC की चेतावनी रेलवे में सार्वजनिक सूचना संभालने की एक व्यवस्थागत समस्या को सामने लाती है। नवंबर 2019 में दायर इस RTI आवेदन को सात साल में कम से कम पांच विभागों के बीच घुमाया गया, पर उचित जवाब नहीं मिला। इससे रेलवे अधिकारियों के बीच खराब समन्वय और जवाबदेही की कमी दिखती है। आयोग का सख़्त रुख भविष्य की देरी पर रोक लगा सकता है और पारदर्शिता बढ़ा सकता है।
आगे की राह
रेलवे को RTI समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करना चाहिए और एक ट्रैकिंग व्यवस्था लागू करनी चाहिए, ताकि आवेदन अनिश्चित काल तक इधर-उधर न घूमें। CIC बार-बार होने वाली देरी पर RTI अधिनियम की धारा 20 के तहत दंड लगाने पर भी विचार कर सकता है। यह मामला सभी सार्वजनिक प्राधिकरणों के लिए याद दिलाता है कि RTI जवाब 30 दिन की समयसीमा में दें।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
- एक ऐतिहासिक कानून, जो भारतीय नागरिकों को किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण से जानकारी मांगने का अधिकार देता है और शासन में पारदर्शिता व जवाबदेही को बढ़ावा देता है।
- केंद्रीय सूचना आयोग (CIC)
- RTI अधिनियम, 2005 के तहत सर्वोच्च अपीलीय निकाय, जो सूचना अनुरोधों से जुड़ी शिकायतों पर अनुपालन सुनिश्चित करने और फैसले देने के लिए ज़िम्मेदार है।
- सूचना आयुक्त
- भारत के राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की सिफारिश पर नियुक्त CIC का सदस्य, जो RTI अधिनियम के तहत अपीलों और शिकायतों की सुनवाई करता है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस तथ्य पर ध्यान दें: CIC ने 5 नवंबर 2026 को रेलवे को चेताया।
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC)
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
यह गलती न करें!
परीक्षार्थी केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को राज्य सूचना आयोग (SIC) से भ्रमित कर सकते हैं। याद रखें: CIC केंद्रीय सरकार के विभागों (जैसे रेलवे) के लिए है, जबकि SIC राज्य सरकार के विभागों को देखते हैं। साथ ही, सूचना आयुक्त (स्वागता दास) को मुख्य सूचना आयुक्त के साथ न मिलाएँ।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- पारदर्शिता, जवाबदेही, RTI अधिनियम 2005, लोक सूचना अधिकारी (PIO), प्रशासनिक समन्वय
कहीं अटके? एक टैप में समझें
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम से जुड़ी शिकायतों को देखने वाला सर्वोच्च निकाय है। उसने भारतीय रेलवे को चेताया, क्योंकि उसने एक RTI प्रश्न का जवाब देने में बहुत देर की और उसे एक विभाग से दूसरे विभाग में भेजता रहा। CIC ने कहा कि यह बंद होना चाहिए और सभी विभागों को मिलकर समय पर जानकारी देनी चाहिए।
- CIC ने 5 नवंबर 2026 को RTI जवाबों में देरी पर रेलवे को चेताया।
- RTI आवेदन नवंबर 2019 में दायर हुआ था।
- सूचना आयुक्त स्वागता दास ने चेतावनी जारी की।
- RTI अधिनियम, 2005 पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देता है।
- RTI अधिनियम के तहत CIC सर्वोच्च अपीलीय निकाय है।
- राजव्यवस्था: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
- शासन: पारदर्शिता और जवाबदेही
जुड़ी अवधारणाएँ: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005, केंद्रीय सूचना आयोग (CIC), सूचना आयुक्त
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत कौन-सा निकाय सर्वोच्च अपीलीय प्राधिकरण है?
व्याख्या: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) केंद्रीय सरकारी विभागों के लिए RTI अधिनियम, 2005 के तहत सर्वोच्च अपीलीय निकाय है। CBI अपराधों की जाँच करती है, निर्वाचन आयोग चुनाव कराता है और UPSC भर्ती परीक्षा कराता है। अतः विकल्प B सही है।
- Q2कठिन
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने RTI आवेदनों का जवाब देने में देरी के लिए भारतीय रेलवे को चेतावनी दी है।
- 2.समाचार में उल्लिखित RTI आवेदन वर्ष 2020 में दायर किया गया था।
- 3.CIC ने निर्देश दिया कि RTI आवेदनों का निपटारा अंतर-विभागीय समन्वय से तय समयसीमा में होना चाहिए।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: CIC ने RTI में देरी पर रेलवे को चेताया। कथन 2 गलत है: RTI आवेदन नवंबर 2019 में दायर हुआ था, 2020 में नहीं। कथन 3 सही है: CIC ने समन्वय से समयसीमा में निपटारे का निर्देश दिया। अतः विकल्प C सही है।
- Q3मध्यम
समाचार में उल्लिखित RTI आवेदन किस वर्ष दायर किया गया था?
व्याख्या: RTI आवेदन नवंबर 2019 में दायर हुआ था। इसमें सहकारी समितियों द्वारा रेलवे की ज़मीन पर अनधिकृत कब्ज़े की शिकायत पर की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा गया था। 2018, 2020 और 2021 गलत वर्ष हैं।
- Q4मध्यम
रेलवे को CIC की चेतावनी से उभरकर आने वाला RTI अधिनियम, 2005 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: RTI अधिनियम नागरिकों को सार्वजनिक प्राधिकरणों से जानकारी मांगने का अधिकार देता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ती है। देरी और जिम्मेदारी टालने पर CIC की चेतावनी इसी उद्देश्य का सीधा समर्थन करती है। कागज़ी काम घटाना, तेज़ भर्ती और विकेंद्रीकरण RTI अधिनियम के मुख्य उद्देश्य नहीं हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. केंद्रीय सूचना आयोग ने रेलवे को किस बात पर चेताया?
CIC ने रेलवे को RTI आवेदनों का जवाब देने में देरी और विभागों के बीच जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति पर चेताया।
2. मामले की सुनवाई करने वाले सूचना आयुक्त कौन हैं?
सूचना आयुक्त स्वागता दास ने मामले की सुनवाई की और रेलवे को चेतावनी जारी की।
3. RTI आवेदन किस विषय पर था?
नवंबर 2019 में दायर RTI आवेदन में सहकारी समितियों द्वारा रेलवे की ज़मीन पर अनधिकृत कब्ज़े की शिकायत पर की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा गया था।
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मूल खबर5 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
