पर्यावरण

मुजफ्फरपुर-समस्तीपुर में जलभृत संरक्षण बढ़ाने के लिए कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण संरचनाएँ

7 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 18 / 23

प्रिलिम्स के लिए: कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण, जलभृत, केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB), WAPCOS, शामिल जिले, क्रियान्वयन एजेंसियाँ, तकनीक, उद्देश्य

मेन्स के लिए: प्रबंधित जलभृत पुनर्भरण, इंजेक्शन वेल, जलवायु लचीलापन, जल सुरक्षा

स्रोत:Dainik BhaskarDainik Bhaskar

चर्चा में क्यों?

बिहार के मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जिलों में गहरे जलभृतों के संरक्षण और पेयजल उपलब्धता बढ़ाने के लिए पायलट आधार पर कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण संरचनाएँ बनाई जाएँगी। केंद्रीय भूमि जल बोर्ड, लघु जल संसाधन विभाग और WAPCOS के बीच त्रिपक्षीय MoU के तहत इंजेक्शन वेल के जरिए उपचारित सतही जल को भूमिगत गहराई तक पहुंचाया जाएगा।

सारांश

  • बिहार के मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर के जलोढ़ क्षेत्रों में प्रदर्शनात्मक और प्रायोगिक आधार पर कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण संरचनाएँ बनाई जाएँगी।
  • केंद्रीय भूमि जल बोर्ड, लघु जल संसाधन विभाग (बिहार) और WAPCOS के बीच त्रिपक्षीय MoU पर हस्ताक्षर हुए हैं।
  • उपचारित सतही जल को गहरे जलभृतों तक पहुंचाने के लिए इंजेक्शन वेल का इस्तेमाल होगा, ताकि पुनर्भरण, पेयजल उपलब्धता और जलवायु के प्रभावों से निपटने की क्षमता बढ़े।

मुख्य बातें

  • बिहार में कृत्रिम पुनर्भरण

    मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जिलों में इंजेक्शन वेल के जरिए पायलट कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण संरचनाएँ बनेंगी।

  • त्रिपक्षीय MoU पर हस्ताक्षर

    केंद्रीय भूमि जल बोर्ड, बिहार का लघु जल संसाधन विभाग और WAPCOS ने परियोजना लागू करने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए हैं।

  • जलवायु लचीलापन लक्ष्य

    परियोजना का उद्देश्य भू-जल उपलब्धता और जलभृत की सेहत सुधारकर जलवायु लचीलापन मज़बूत करना है।

पृष्ठभूमि

उत्तर बिहार के जलोढ़ जलभृत पेयजल और सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण स्रोत हैं। अत्यधिक दोहन और प्राकृतिक पुनर्भरण की कमी से, खासकर गहरे जलभृतों में, जलस्तर गिरा है। कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाएँ भू-जल भंडारण बढ़ाने का तकनीकी उपाय देती हैं।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

उपचारित सतही जल के लिए इंजेक्शन वेल का इस्तेमाल प्रबंधित जलभृत पुनर्भरण का सिद्ध तरीका है। मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर का यह पायलट गंगा के मैदानी इलाकों के अन्य जिलों के लिए मॉडल बन सकता है। यह पेयजल सुरक्षा से सीधे जुड़ता है और जलवायु-जनित सूखे के खिलाफ लचीलापन बढ़ाता है।

आगे की राह

सफल क्रियान्वयन के लिए पानी की गुणवत्ता और पुनर्भरण दर की लगातार निगरानी ज़रूरी होगी। अत्यधिक दोहन वाले बिहार के अन्य ब्लॉकों तक इसका विस्तार और जल जीवन मिशन व अटल भूजल योजना से इसे जोड़ना प्रभाव बढ़ा सकता है।

बिहार से जुड़ाव

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पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण
इंजेक्शन वेल, पुनर्भरण गड्ढों और चेक डैम जैसी मानव-निर्मित संरचनाओं के जरिए सतही जल को भूमिगत जलभृतों में प्राकृतिक रूप से पहुंचने की प्रक्रिया को बढ़ाना।
जलभृत
भूमिगत जल धारण करने वाली पारगम्य चट्टानों, चट्टानी दरारों या असंगठित पदार्थों (बजरी, रेत, गाद) की भूमिगत परत, जिससे भू-जल निकाला जा सकता है।
केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB)
जल शक्ति मंत्रालय के अधीन केंद्र सरकार की एजेंसी, जो भारत में भू-जल का आकलन, निगरानी और प्रबंधन करती है।
WAPCOS
जल शक्ति मंत्रालय के अधीन केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम, जो जल, बिजली और बुनियादी ढांचा सेक्टरों में परामर्श सेवाएँ देता है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस डेटा पर ध्यान दें: बिहार के मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जिले, कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण पायलट परियोजना के लिए।
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (जल शक्ति मंत्रालय के अधीन)।

यह गलती न करें!

छात्र कृत्रिम पुनर्भरण (इंजेक्शन वेल) को प्राकृतिक पुनर्भरण (वर्षा जल संचयन) के साथ भ्रमित कर सकते हैं। यहाँ की तकनीक विशेष रूप से 'उपचारित सतही जल के लिए इंजेक्शन वेल' है, न कि छत पर वर्षा जल संचयन या चेक डैम।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • प्रबंधित जलभृत पुनर्भरण, इंजेक्शन वेल, जलवायु लचीलापन, जल सुरक्षा

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    भारत में भू-जल के आकलन और प्रबंधन के लिए मुख्यतः कौन-सी केंद्र सरकारी एजेंसी ज़िम्मेदार है?

  2. Q2कठिन

    बिहार में कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण परियोजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.यह परियोजना मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जिलों के जलोढ़ क्षेत्रों में लागू होगी।
    2. 2.परियोजना में गहरे जलभृतों में उपचारित सतही जल पहुंचाने के लिए इंजेक्शन वेल का उपयोग शामिल है।
    3. 3.केंद्रीय भूमि जल बोर्ड, लघु जल संसाधन विभाग (बिहार) और WAPCOS के बीच त्रिपक्षीय MoU पर हस्ताक्षर हुए हैं।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    बिहार के कौन-से जिलों के युग्म में कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण पायलट परियोजना केंद्रित है?

  4. Q4मध्यम

    बिहार की कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण परियोजना में इंजेक्शन वेल के उपयोग का मुख्य उद्देश्य क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. बिहार के किन जिलों में कृत्रिम भू-जल पुनर्भरण संरचनाएँ बन रही हैं?

पायलट परियोजना मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जिलों के जलोढ़ क्षेत्रों में लागू होगी।

2. इस परियोजना के लिए किन एजेंसियों ने MoU पर हस्ताक्षर किए?

MoU केंद्रीय भूमि जल बोर्ड, लघु जल संसाधन विभाग (बिहार) और WAPCOS के बीच हुआ।

3. इस कृत्रिम पुनर्भरण परियोजना में कौन-सी तकनीक इस्तेमाल होती है?

पुनर्भरण बढ़ाने के लिए इंजेक्शन वेल के जरिए उपचारित सतही जल को गहरे जलभृतों तक पहुंचाया जाएगा।

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