प्रिलिम्स के लिए: हानि और क्षति कोष, COP (पक्षकारों का सम्मेलन), ग्लेशियर झील फटने से बाढ़ (GLOF), COP का पूरा नाम, COP31 की मेज़बानी, नेपाल की पुनर्निर्माण लागत, वर्तमान संदर्भ
मेन्स के लिए: जलवायु न्याय, हानि और क्षति कोष, हिमालयी संवेदनशीलता, GLOF, विकसित बनाम विकासशील देशों की ज़िम्मेदारी
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- COP31 UNFCCC का 31वां जलवायु सम्मेलन है, जो 9 नवंबर 2026 से अंतालिया, तुर्किये में होगा।
- नेपाल ग्लेशियर बाढ़ के पुनर्निर्माण के लिए हानि और क्षति कोष से 5 अरब डॉलर मांग रहा है।
- हानि और क्षति कोष की स्थापना 2023 में COP28 में दुबई में हुई थी।
- भारत नेपाल की मांग का समर्थन एक हिमालयी देश के रूप में कर रहा है।
- यूरोपीय संघ ने 2025 में 32.3 अरब यूरो का सार्वजनिक जलवायु वित्त दिया।
चर्चा में क्यों?
तुर्किये के अंतालिया में हो रहे COP31 में नेपाल ग्लेशियर फटने से हुई तबाही के लिए हानि और क्षति कोष से 5 अरब डॉलर मांग रहा है। एक हिमालयी देश होने के नाते भारत नेपाल की मुआवज़े की मांग का समर्थन करता है। इस समय कोष में पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, जिससे जलवायु प्रभाव और वित्तीय प्रतिबद्धताओं के बीच का अंतर साफ़ सामने आता है।
सारांश
- तुर्किये के अंतालिया में 9 नवंबर 2026 से शुरू हो रहे COP31 जलवायु सम्मेलन में नेपाल ग्लेशियर फटने की आपदाओं के लिए हानि और क्षति कोष से 5 अरब डॉलर के मुआवज़े की मांग उठाएगा।
- जलवायु परिवर्तन से प्रभावित एक हिमालयी पड़ोसी देश होने के नाते भारत नेपाल की मांग का समर्थन कर रहा है।
मुख्य बातें
नेपाल की 5 अरब डॉलर की मांग
ग्लेशियर बाढ़ में हज़ारों लोगों की मौत और नेपाल की GDP के 10% के बराबर नुकसान के बाद नेपाल पुनर्निर्माण के लिए हानि और क्षति कोष से 5 अरब डॉलर चाहता है।
हिमालयी पड़ोसियों के लिए भारत का समर्थन
एक हिमालयी देश होने के नाते भारत COP31 में नेपाल और भूटान की जलवायु मुआवज़े की मांग का समर्थन कर रहा है।
पृष्ठभूमि
हानि और क्षति कोष की स्थापना COP28 (2023) में हुई थी, ताकि जलवायु जनित आपदाओं से प्रभावित कमज़ोर देश उबर सकें। नेपाल में हाल में ग्लेशियर झील फटने से आई बाढ़ (GLOF) ने हज़ारों जानें लीं। पुनर्निर्माण की लागत 5 अरब डॉलर है, जो नेपाल की GDP का 10% है, इसलिए यह कोष की प्रभावशीलता की एक अहम परीक्षा है।
आगे की राह
COP31 को कोष की कमी दूर करने पर ध्यान देना होगा। यूरोपीय संघ सबसे बड़ा जलवायु वित्त प्रदाता है (2025 में 32.3 अरब यूरो सार्वजनिक और 9.3 अरब यूरो निजी वित्त), लेकिन उसने अंतालिया में नई वित्तीय घोषणाओं से इनकार किया है। मेज़बान देशों ने 2035 तक 35% इलेक्ट्रिफिकेशन का वैश्विक लक्ष्य प्रस्तावित किया है। नेपाल की मांग कितनी सफल होगी, यह राजनीतिक इच्छाशक्ति और हानि और क्षति कोष की पुनःपूर्ति व्यवस्था में बदलाव पर निर्भर करेगा।
नेपाल की मांग बनाम उपलब्ध कोष
| मद | राशि |
|---|---|
| आवश्यक पुनर्निर्माण लागत | 5 अरब डॉलर |
| नेपाल की GDP का प्रतिशत | 10% |
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- हानि और क्षति कोष
- COP28 (2023) में स्थापित एक कोष, जो जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से विशेष रूप से प्रभावित विकासशील देशों को जलवायु जनित घटनाओं से हुए नुकसान और क्षति के लिए वित्तीय सहायता देता है।
- COP (पक्षकारों का सम्मेलन)
- संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) की सर्वोच्च निर्णायक संस्था, जो जलवायु कार्रवाई की समीक्षा और उसे आगे बढ़ाने के लिए हर साल बैठक करती है।
- ग्लेशियर झील फटने से बाढ़ (GLOF)
- किसी ग्लेशियर झील से अचानक पानी का बहाव, जो अक्सर बर्फ़ के खिसकने या मोरेन बांध टूटने से होता है और नीचे की ओर भीषण बाढ़ लाता है। वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण हिमालयी क्षेत्र में यह आम है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: नेपाल की पुनर्निर्माण लागत 5 अरब डॉलर (उसकी GDP का 10%)
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (भारत)
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: हानि और क्षति कोष (COP28 में स्थापित)
यह गलती न करें!
परीक्षक 'हानि और क्षति कोष' को 'ग्रीन क्लाइमेट फंड' या 'अनुकूलन कोष' से भ्रमित कर सकते हैं। वे COP का क्रम (COP31 बनाम COP28) या मेज़बान देश (वार्ता के लिए ऑस्ट्रेलिया बनाम कार्रवाई के लिए तुर्किये) भी बदल सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- जलवायु न्याय, हानि और क्षति कोष, हिमालयी संवेदनशीलता, GLOF, विकसित बनाम विकासशील देशों की ज़िम्मेदारी
कहीं अटके? एक टैप में समझें
- COP31 UNFCCC का 31वां जलवायु सम्मेलन है, जो 9 नवंबर 2026 से अंतालिया, तुर्किये में होगा।
- नेपाल ग्लेशियर बाढ़ के पुनर्निर्माण के लिए हानि और क्षति कोष से 5 अरब डॉलर मांग रहा है।
- हानि और क्षति कोष की स्थापना 2023 में COP28 में दुबई में हुई थी।
- भारत नेपाल की मांग का समर्थन एक हिमालयी देश के रूप में कर रहा है।
- यूरोपीय संघ ने 2025 में 32.3 अरब यूरो का सार्वजनिक जलवायु वित्त दिया।
- पर्यावरण: जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय समझौते
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: भारत और उसके पड़ोसी
जुड़ी अवधारणाएँ: हानि और क्षति कोष, COP (पक्षकारों का सम्मेलन), ग्लेशियर झील फटने से बाढ़ (GLOF)
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
जलवायु परिवर्तन पर पक्षकारों का वार्षिक सम्मेलन (COP) किस अंतरराष्ट्रीय निकाय द्वारा आयोजित होता है?
व्याख्या: COP, UNFCCC की सर्वोच्च निर्णायक संस्था है, जो जलवायु कार्रवाई की समीक्षा के लिए हर साल बैठक करती है। UNEP पर्यावरणीय शासन में सहयोग देता है, पर COP की मेज़बानी नहीं करता। WMO मौसम और जलवायु विज्ञान से जुड़ा है, जबकि IPCC जलवायु विज्ञान का आकलन करता है, वह वार्ता करने वाली संस्था नहीं है।
- Q2कठिन
हानि और क्षति कोष के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.हानि और क्षति कोष की स्थापना COP28 में दुबई में हुई थी।
- 2.यह कोष मुख्य रूप से विकासशील देशों द्वारा वित्तपोषित है, ताकि विकसित देश जलवायु आपदाओं से उबर सकें।
- 3.नेपाल ग्लेशियर बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण के लिए इस कोष से 5 अरब डॉलर की मांग कर रहा है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: हानि और क्षति कोष को COP28 (2023) में परिचालन में लाया गया था। कथन 2 गलत है: यह कोष संवेदनशील विकासशील देशों के लिए है, विकसित देशों के लिए नहीं। कथन 3 सही है: नेपाल ग्लेशियर बाढ़ आपदाओं के पुनर्निर्माण के लिए 5 अरब डॉलर की मांग कर रहा है।
- Q3मध्यम
हाल की ग्लेशियर बाढ़ आपदाओं के बाद नेपाल की अनुमानित पुनर्निर्माण लागत उसकी GDP के कितने प्रतिशत के बराबर है?
व्याख्या: पुनर्निर्माण लागत 5 अरब डॉलर है, जो नेपाल की GDP के 10% के बराबर है।
- Q4मध्यम
हानि और क्षति कोष के संबंध में COP31 में नेपाल की मांग का मुख्य उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: नेपाल की विशिष्ट मांग ग्लेशियर बाढ़ के बाद 5 अरब डॉलर की पुनर्निर्माण लागत के लिए हानि और क्षति कोष से मुआवज़ा है। नवीकरणीय ऊर्जा और उत्सर्जन में कटौती अलग जलवायु मुद्दे हैं, और यहां तकनीकी सहायता मुख्य मांग नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. COP31 क्या है और इसका आयोजन कहां हो रहा है?
COP31 UNFCCC के तहत 31वां वार्षिक जलवायु सम्मेलन है, जो 9 नवंबर 2026 से तुर्किये के अंतालिया में शुरू होगा। वार्ता की अगुवाई ऑस्ट्रेलिया कर रहा है, जबकि कार्रवाई की अगुवाई तुर्किये कर रहा है।
2. नेपाल हानि और क्षति कोष से कितना मुआवज़ा मांग रहा है?
नेपाल हानि और क्षति कोष से पुनर्निर्माण के लिए 5 अरब डॉलर का मुआवज़ा मांग रहा है, जो ग्लेशियर झील फटने से हुई बाढ़ के बाद उसकी GDP के 10% के बराबर है।
3. भारत COP31 में नेपाल की मांग का समर्थन क्यों कर रहा है?
भारत नेपाल की मांग का समर्थन एक हिमालयी पड़ोसी देश के रूप में कर रहा है, क्योंकि वह ग्लेशियर बाढ़ जैसी जलवायु आपदाओं के प्रति हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को पहचानता है।
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मूल खबर6 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
