प्रिलिम्स के लिए: आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955, स्टॉक सीमा, नेफेड (भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ), नोडल मंत्रालय, कार्रवाई का कानूनी आधार, स्टॉक सीमा तय करने की अनुमति वाले राज्य, स्टॉक सीमा की वैधता, विवरण देने का पोर्टल
मेन्स के लिए: खाद्य मुद्रास्फीति, जमाखोरी, आवश्यक वस्तु अधिनियम, बाज़ार हस्तक्षेप, मूल्य स्थिरता
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने फूड स्टॉक पोर्टल पर साप्ताहिक चावल स्टॉक विवरण अनिवार्य किया है।
- धान और चावल पर स्टॉक सीमा पांच दक्षिणी राज्यों को तय करने की अनुमति दी गई है: आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना।
- स्टॉक सीमा 31 जनवरी 2027 तक वैध है।
- पालन न करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई होती है।
- नेफेड, एनसीएफ और केंद्रीय भंडार को 'भारत चावल' के रूप में बिक्री के लिए अतिरिक्त चावल आवंटित किया गया है।
चर्चा में क्यों?
कम और असमान मानसून के कारण चावल की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर के सभी व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं, थोक विक्रेताओं, प्रोसेसर्स और मिल मालिकों के लिए हर हफ्ते फूड स्टॉक पोर्टल पर स्टॉक का विवरण देना अनिवार्य कर दिया है। साथ ही उसने पांच दक्षिणी राज्यों (आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना) को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत धान और चावल पर स्टॉक सीमा तय करने की अनुमति दी है, जो 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेगी।
सारांश
- सभी व्यापारी, थोक विक्रेता, खुदरा विक्रेता, प्रोसेसर्स, मिल मालिक और बड़ी रिटेल चेन को हर शुक्रवार को फूड स्टॉक पोर्टल पर चावल और धान का स्टॉक (बासमती, गैर-बासमती प्रीमियम, अन्य चावल, धान) घोषित करना होगा।
- स्टॉक का विवरण न देने या स्टॉक सीमा का उल्लंघन करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।
- नेफेड, एनसीएफ और केंद्रीय भंडार को अतिरिक्त चावल आवंटित किया गया है, जिसे दक्षिणी राज्यों में 'भारत चावल' के नाम से बेचा जाएगा।
मुख्य बातें
साप्ताहिक स्टॉक विवरण अनिवार्य
चावल और धान के सभी धारकों (व्यापारी, खुदरा विक्रेता, थोक विक्रेता, प्रोसेसर्स, मिल मालिक, बड़ी रिटेल चेन) को हर शुक्रवार फूड स्टॉक पोर्टल पर स्टॉक घोषित करना होगा।
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई
पोर्टल पर पंजीकृत न होने या स्टॉक सीमा का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई होगी।
5 दक्षिणी राज्यों के लिए स्टॉक सीमा
केंद्र ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को नियंत्रण आदेश के ज़रिए धान और चावल पर स्टॉक सीमा तय करने की अनुमति दी है, जो 31 जनवरी 2027 तक वैध है।
पृष्ठभूमि
2026 में कम और असमान मानसूनी बारिश से चावल उत्पादन और खुदरा कीमतों की बढ़ती चिंता पैदा हुई है। चावल के बड़े उपभोक्ता दक्षिणी राज्यों में जमाखोरी रोकने और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार नियामक उपकरणों का सक्रियता से इस्तेमाल कर रही है।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
फूड स्टॉक पोर्टल पर अनिवार्य साप्ताहिक स्टॉक विवरण आपूर्ति श्रृंखला में चावल और धान की सूची का वास्तविक समय का डेटाबेस बनाता है। इससे लक्षित निगरानी और जमाखोरी की शुरुआती पहचान संभव होती है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत पांच दक्षिणी राज्यों को स्टॉक सीमा तय करने की छूट देने से वे स्थानीय कीमतों के दबाव से निपटने में लचीलापन पाते हैं। नेफेड, एनसीएफ और केंद्रीय भंडार को अतिरिक्त चावल आवंटित करने का उद्देश्य 'भारत चावल' की बिक्री से बाज़ार में आपूर्ति बढ़ाना और कीमतें नरम करना है।
आगे की राह
प्रभावी क्रियान्वयन राज्य स्तर के प्रवर्तन और पोर्टल पर नियमित अपडेट पर निर्भर करेगा। कीमतों का दबाव बना रहा तो सरकार 31 जनवरी 2027 के बाद भी स्टॉक सीमा बढ़ा सकती है। मानसून की स्थिति प्रतिकूल बनी रही तो गेहूं या दालों जैसी अन्य आवश्यक वस्तुओं पर भी ऐसी निगरानी लागू की जा सकती है।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955
- यह एक ऐसा अधिनियम है जो केंद्र सरकार को आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण, व्यापार और वाणिज्य को नियंत्रित करने का अधिकार देता है, ताकि उचित कीमतों पर उनकी उपलब्धता बनी रहे। इसके तहत स्टॉक सीमा और अन्य नियंत्रण लगाए जा सकते हैं।
- स्टॉक सीमा
- किसी भी समय व्यापारी, खुदरा विक्रेता या प्रोसेसर द्वारा रखी जा सकने वाली किसी वस्तु की अधिकतम मात्रा। इसे जमाखोरी और कृत्रिम कमी रोकने के लिए लगाया जाता है।
- नेफेड (भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ)
- कृषि मंत्रालय के अंतर्गत एक शीर्ष सहकारी विपणन संस्था, जो कृषि उपज की खरीद और वितरण का काम करती है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: फूड स्टॉक पोर्टल पर साप्ताहिक चावल स्टॉक विवरण; स्टॉक सीमा की वैधता 31 जनवरी 2027 तक
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955
यह गलती न करें!
परीक्षक पांच दक्षिणी राज्यों (आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना) की जगह पंजाब या पश्चिम बंगाल जैसे अन्य चावल उत्पादक राज्यों का नाम दे सकते हैं। साथ ही, स्टॉक सीमा चावल और धान के लिए है, गेहूं या दालों के लिए नहीं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- खाद्य मुद्रास्फीति, जमाखोरी, आवश्यक वस्तु अधिनियम, बाज़ार हस्तक्षेप, मूल्य स्थिरता
कहीं अटके? एक टैप में समझें
कमज़ोर मानसून के कारण चावल की कीमतें बढ़ने को लेकर सरकार चिंतित है। उसने चावल या धान रखने वाले सभी लोगों को हर शुक्रवार सरकारी वेबसाइट पर अपना स्टॉक बताने का आदेश दिया है। पांच दक्षिणी राज्यों को भी यह तय करने की छूट दी गई है कि कोई कितना स्टॉक रख सकता है। नियम तोड़ने वालों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।
- उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने फूड स्टॉक पोर्टल पर साप्ताहिक चावल स्टॉक विवरण अनिवार्य किया है।
- धान और चावल पर स्टॉक सीमा पांच दक्षिणी राज्यों को तय करने की अनुमति दी गई है: आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना।
- स्टॉक सीमा 31 जनवरी 2027 तक वैध है।
- पालन न करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई होती है।
- नेफेड, एनसीएफ और केंद्रीय भंडार को 'भारत चावल' के रूप में बिक्री के लिए अतिरिक्त चावल आवंटित किया गया है।
- अर्थव्यवस्था: खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण
- शासन: आवश्यक वस्तु अधिनियम और मूल्य नियंत्रण
जुड़ी अवधारणाएँ: आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955, स्टॉक सीमा, नेफेड (भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ)
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत खाद्य स्टॉक विवरण के नियमन की मुख्य ज़िम्मेदारी किस मंत्रालय की है?
व्याख्या: उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय आवश्यक वस्तु अधिनियम और फूड स्टॉक पोर्टल की देखरेख करता है। कृषि मंत्रालय का ध्यान उत्पादन पर है, स्टॉक नियमन पर नहीं। वित्त और वाणिज्य मंत्रालय इस खाद्य मूल्य नियंत्रण उपाय में सीधे शामिल नहीं हैं।
- Q2कठिन
जमाखोरी रोकने के लिए सरकार के हालिया उपायों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.सभी व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं, थोक विक्रेताओं, प्रोसेसर्स और मिल मालिकों को हर शुक्रवार फूड स्टॉक पोर्टल पर अपना चावल और धान का स्टॉक घोषित करना होगा।
- 2.केंद्र सरकार ने भारत के सभी राज्यों के लिए चावल पर स्टॉक सीमा तय की है।
- 3.स्टॉक विवरण आदेश का पालन न करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई होती है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 मंत्रालय के आदेश के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है, क्योंकि केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को नहीं, केवल पांच दक्षिणी राज्यों को स्टॉक सीमा तय करने की अनुमति दी है। कथन 3 सही है। अतः विकल्प C सही है।
- Q3मध्यम
पांच दक्षिणी राज्यों में धान और चावल पर स्टॉक सीमा किस तारीख तक वैध है?
व्याख्या: स्टॉक सीमा 31 जनवरी 2027 तक वैध है। 31 मार्च 2027 वित्तीय वर्ष का अंत है। 31 दिसंबर 2026 इससे पहले की तारीख है। 28 फरवरी 2027 बताई गई समय-सीमा नहीं है।
- Q4मध्यम
नेफेड, एनसीएफ और केंद्रीय भंडार को 'भारत चावल' के रूप में बिक्री के लिए अतिरिक्त चावल आवंटित करने के सरकारी निर्णय का मुख्य उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: यह अतिरिक्त आवंटन दक्षिणी राज्यों में आपूर्ति बढ़ाकर जमाखोरी और कीमतों की बढ़ोतरी का मुकाबला करने के लिए है। यह निर्यात, NFSA वितरण या बफर स्टॉक की खरीद के लिए नहीं, बल्कि कीमतें नरम करने के लिए खुले बाज़ार में बिक्री के लिए है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. फूड स्टॉक पोर्टल क्या है?
फूड स्टॉक पोर्टल वह ऑनलाइन मंच है, जहां चावल और धान के सभी धारकों को हर शुक्रवार अपना स्टॉक घोषित करना होता है।
2. किन राज्यों को चावल पर स्टॉक सीमा तय करने की अनुमति दी गई है?
आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को धान और चावल पर स्टॉक सीमा तय करने की अनुमति दी गई है।
3. स्टॉक विवरण आदेश का पालन न करने पर क्या कार्रवाई होती है?
नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई होगी।
4. स्टॉक सीमा कितने समय तक लागू रहेगी?
स्टॉक सीमा 31 जनवरी 2027 तक वैध है।
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मूल खबर6 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
