पर्यावरण

तुर्किये में COP31 जलवायु वार्ता में भारत जीवाश्म ईंधन हटाने के बाध्यकारी प्रस्ताव का विरोध करेगा

6 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 34 / 120

प्रिलिम्स के लिए: COP (पक्षकारों का सम्मेलन), साझा किंतु विभेदित ज़िम्मेदारियाँ (CBDR), जीवाश्म ईंधन, COP संख्या, मेज़बान देश, शुरू होने की तिथि, भारत में गैर-जीवाश्म बिजली का हिस्सा, भारत का इलेक्ट्रिक वाहन लक्ष्य

मेन्स के लिए: साझा किंतु विभेदित ज़िम्मेदारियाँ (CBDR), जलवायु न्याय, ऊर्जा संक्रमण, उत्तर-दक्षिण विभाजन, राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs)

स्रोत:HindustanHindustan

चर्चा में क्यों?

भारत ने घोषणा की है कि तुर्किये में COP31 जलवायु सम्मेलन में वह जीवाश्म ईंधन हटाने के किसी भी बाध्यकारी प्रस्ताव का विरोध करेगा। उसका तर्क है कि ऐसी अनिवार्यता पहले विकसित देशों पर लागू होनी चाहिए और विकासशील देशों के लिए वह स्वैच्छिक रहनी चाहिए। फ़िलहाल भारत अपनी बिजली का 54% गैर-जीवाश्म स्रोतों से बनाता है और 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक वाहनों का लक्ष्य रखे हुए है।

सारांश

  • 9 नवंबर 2026 से तुर्किये में शुरू हो रही COP31 जलवायु वार्ता में भारत जीवाश्म ईंधन चरणबद्ध तरीके से हटाने के किसी भी बाध्यकारी प्रस्ताव का विरोध करेगा।
  • भारत का तर्क है कि बाध्यकारी चरणबद्ध कटौती की ज़िम्मेदारी पहले विकसित देशों पर होनी चाहिए और विकासशील व गरीब देशों के लिए यह स्वैच्छिक होनी चाहिए।
  • भारत अपनी बिजली का 54% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से बनाता है और उसका लक्ष्य 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक वाहन है।

मुख्य बातें

  • COP31 जलवायु सम्मेलन

    संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का 31वां सत्र (COP31) 9 नवंबर 2026 को तुर्किये में शुरू होगा, जिसके एजेंडे में जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से हटाना प्रमुख विषय है।

  • भारत का रुख: अलग-अलग ज़िम्मेदारी

    भारत सभी देशों पर लागू होने वाली बाध्यकारी कटौती का विरोध करता है। उसका कहना है कि विकसित देश पहले कदम उठाएं और विकासशील देश स्वेच्छा से उनका अनुसरण करें।

  • भारत की स्वच्छ ऊर्जा प्रगति

    भारत पहले ही अपनी 54% बिजली गैर-जीवाश्म ईंधन से बनाता है और 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक वाहनों का लक्ष्य रखे हुए है।

पृष्ठभूमि

तुर्किये में होने वाली COP31 वार्ता वैश्विक समीक्षा और जीवाश्म ईंधन हटाने पर जारी बहस की अगली कड़ी है। दुबई में COP28 में देशों ने जीवाश्म ईंधन से 'दूर होने' पर सहमति जताई थी, लेकिन वह भाषा बाध्यकारी नहीं थी। अब विकसित देश बाध्यकारी समय-सीमा चाहते हैं, जबकि भारत जैसे विकासशील देश UNFCCC के तहत साझा किंतु विभेदित ज़िम्मेदारियों (CBDR) की बात करते हैं।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

भारत का विरोध विकास की ज़रूरतों से जुड़ा है। उसका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन विकसित देशों से काफी कम है और उसे विकास के लिए सस्ती ऊर्जा चाहिए। बाध्यकारी कटौती कोयले के उपयोग को सीमित कर सकती है, जो अब भी भारत के ऊर्जा मिश्रण में प्रमुख है। फिर भी 54% गैर-जीवाश्म बिजली और 30% इलेक्ट्रिक वाहन लक्ष्य भारत की स्वैच्छिक प्रतिबद्धता दिखाते हैं। यह टकराव जलवायु वार्ताओं में उत्तर-दक्षिण के मूल विभाजन को सामने लाता है।

आगे की राह

COP31 में गहन बातचीत होने की संभावना है। भारत ऐसा ढांचा चाहेगा जिसमें केवल विकसित देशों (अनुबंध I पक्षकार) के लिए बाध्यकारी लक्ष्य हों और दूसरों के लिए स्वैच्छिक लक्ष्य, जो जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से जुड़े हों। नतीजा पेरिस समझौते के विभेदन के सिद्धांत की परीक्षा लेगा।

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

COP (पक्षकारों का सम्मेलन)
UNFCCC का सर्वोच्च निर्णय-निकाय, जो जलवायु कार्रवाई की समीक्षा और उसे आगे बढ़ाने के लिए हर वर्ष बैठक करता है। COP31 इसका 31वां सत्र है।
साझा किंतु विभेदित ज़िम्मेदारियाँ (CBDR)
UNFCCC के तहत एक सिद्धांत, जिसके अनुसार जलवायु परिवर्तन के लिए सभी देश ज़िम्मेदार हैं, पर विकसित देशों की ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी अधिक है, इसलिए शमन में उन्हें नेतृत्व करना चाहिए।
जीवाश्म ईंधन
कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस जैसे अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोत, जो प्राचीन कार्बनिक पदार्थों से बने हैं। इनके दहन से CO₂ निकलती है, जो जलवायु परिवर्तन की प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस तथ्य पर ध्यान दें: COP31 9 नवंबर 2026 को तुर्किये में शुरू होगा
  • इस तथ्य पर ध्यान दें: भारत अपनी 54% बिजली गैर-जीवाश्म ईंधन से बनाता है
  • इस तथ्य पर ध्यान दें: भारत का लक्ष्य 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक वाहन है
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC)

यह गलती न करें!

प्रश्न पूछे जा सकते हैं कि 'भारत ने COP31 में जीवाश्म ईंधन की बाध्यकारी कटौती का विरोध किया', और फिर 'बाध्यकारी' की जगह 'स्वैच्छिक' रखकर सही-गलत बनाया जा सकता है, या यह दावा किया जा सकता है कि भारत किसी भी तरह की कटौती का विरोध करता है। भारत केवल विकासशील देशों पर बाध्यकारी अनिवार्यता का विरोध करता है, स्वैच्छिक कार्रवाई या अपने स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों का नहीं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • साझा किंतु विभेदित ज़िम्मेदारियाँ (CBDR), जलवायु न्याय, ऊर्जा संक्रमण, उत्तर-दक्षिण विभाजन, राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs)

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    भारत की जलवायु परिवर्तन वार्ता और COP सम्मेलनों में भागीदारी की मुख्य ज़िम्मेदारी किस मंत्रालय की है?

  2. Q2कठिन

    COP31 में भारत के रुख से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.भारत विकासशील देशों के लिए जीवाश्म ईंधन हटाने के किसी भी बाध्यकारी प्रस्ताव का विरोध करता है।
    2. 2.भारत ने अपनी 54% बिजली गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त की है।
    3. 3.भारत ने 2030 तक 50% इलेक्ट्रिक वाहनों का लक्ष्य रखा है।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    भारत की बिजली का कितना प्रतिशत वर्तमान में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से बनता है?

  4. Q4मध्यम

    COP31 में भारत जीवाश्म ईंधन की बाध्यकारी चरणबद्ध कटौती का विरोध क्यों कर रहा है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. COP31 क्या है और इसका आयोजन कब होगा?

COP31 UNFCCC के पक्षकारों के सम्मेलन का 31वां सत्र है, जो 9 नवंबर 2026 को तुर्किये में शुरू होगा।

2. भारत COP31 में जीवाश्म ईंधन की बाध्यकारी कटौती का विरोध क्यों कर रहा है?

भारत का तर्क है कि ऐतिहासिक उत्सर्जन के कारण बाध्यकारी चरणबद्ध कटौती की अनिवार्यता पहले विकसित देशों पर लागू होनी चाहिए, और साझा किंतु विभेदित ज़िम्मेदारी के सिद्धांत के तहत विकासशील देशों के लिए यह स्वैच्छिक होनी चाहिए।

3. स्वच्छ ऊर्जा में भारत की वर्तमान प्रगति क्या है?

भारत अपनी 54% बिजली गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से बनाता है और उसने 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक वाहनों का लक्ष्य रखा है।

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