प्रिलिम्स के लिए: लिफ्ट सिंचाई, फसल-गहनता, चांडिल बांध, योजना का नाम, स्वीकृत लागत, सिंचित क्षेत्र, नोडल विभाग, जल स्रोत
मेन्स के लिए: लिफ्ट सिंचाई, वर्षा-आधारित कृषि, फसल-गहनता, बहुफसली खेती, ग्रामीण आजीविका, जल संसाधन प्रबंधन
स्रोत:Dainik Bhaskar
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना को ₹607.03 करोड़ पर स्वीकृत किया गया है।
- इस योजना से सरायकेला-खरसावां जिले के 9,336 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई होगी।
- योजना के लिए पानी चांडिल बांध से लिया जाएगा।
- योजना में नीमडीह और कुकड़ू प्रखंडों की 14 पंचायतें शामिल हैं।
- नोडल विभाग झारखंड जल संसाधन विभाग है।
चर्चा में क्यों?
झारखंड सरकार ने सरायकेला-खरसावां जिले में 9,336 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई के लिए ₹607 करोड़ की नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना को मंज़ूरी दी है। चांडिल बांध से पानी लिफ्ट करके खेतों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे किसान बारिश पर निर्भर एक-फसली खेती से निकलकर बहुफसली खेती की ओर बढ़ सकेंगे।
सारांश
- ₹607.03 करोड़ पर स्वीकृत नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना सरायकेला-खरसावां जिले की 14 पंचायतों के 9,336 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई करेगी।
- चांडिल बांध से पंपों के ज़रिए पानी लिफ्ट किया जाएगा और भूमिगत पाइपलाइनों से सीधे खेतों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे ज़मीन अधिग्रहण की ज़रूरत कम होगी।
- इस योजना का लक्ष्य साल भर सिंचाई उपलब्ध कराना है, ताकि किसान खरीफ के धान के साथ रबी की फसलें (गेहूं, दलहन, तिलहन) और सब्ज़ियां भी उगा सकें, जिससे उत्पादकता और ग्रामीण आय बढ़े।
मुख्य बातें
बारिश पर निर्भर खेतों के लिए लिफ्ट सिंचाई
यह योजना चांडिल बांध से पानी लिफ्ट करके सरायकेला-खरसावां के 9,336 हेक्टेयर में सिंचाई करेगी, जिससे दो प्रखंडों की मानसून पर निर्भरता खत्म होगी।
एक-फसली से बहुफसली खेती की ओर
निश्चित सिंचाई मिलने से किसान खरीफ के धान के साथ रबी की फसलें और सब्ज़ियां भी उगा सकेंगे, जिससे साल में दो से तीन फसलें संभव होंगी।
भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क
पानी भूमिगत पाइपलाइनों से बांटा जाएगा, जिससे बड़े पैमाने पर ज़मीन अधिग्रहण से बचा जाएगा और पानी सीधे खेतों तक पहुंचेगा।
पृष्ठभूमि
झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में सुबर्णरेखा नदी पर बने चांडिल बांध के पास होने के बावजूद बड़ा कृषि क्षेत्र बारिश पर निर्भर है। नीमडीह और कुकड़ू प्रखंडों के किसान खरीफ में केवल धान उगा पाते थे और अनियमित मानसून से फसल नुकसान का खतरा बना रहता था। सिंचाई ढांचे की कमी से फसल-गहनता कम रही और ग्रामीण आय स्थिर रही।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
₹607 करोड़ की लिफ्ट सिंचाई योजना पंपों से जलाशय का पानी लिफ्ट करके भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क से खेतों तक पहुंचाकर इस कमी को सीधे दूर करती है। यह तरीका नहर-आधारित परियोजनाओं में होने वाली ज़मीन अधिग्रहण की देरी से बचाता है। 9,336 हेक्टेयर में सिंचाई होने से किसान रबी की फसलों (गेहूं, दलहन, तिलहन) और सब्ज़ियों की ओर बढ़ सकेंगे, जिससे आय बढ़ेगी और फसल खराब होने का जोखिम घटेगा। यह परियोजना बड़े बांध-आधारित नहरों के विकल्प के रूप में लिफ्ट सिंचाई को प्राथमिकता देने की झारखंड सरकार की नीति के अनुरूप है।
आगे की राह
जल संसाधन विभाग जल्द टेंडर जारी करेगा। एजेंसी चुनी जाने के बाद निर्माण जनवरी-फरवरी 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है। चालू होने पर यह योजना ग्रामीण आजीविका को मज़बूत करेगी, स्थानीय कृषि बाज़ारों को गति देगी और सरायकेला-खरसावां में कृषि आधारित रोज़गार बढ़ाएगी। झारखंड के दूसरे जल-संकट वाले प्रखंडों में भी इस मॉडल को दोहराया जा सकता है।
झारखंड से जुड़ाव
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- लिफ्ट सिंचाई
- सिंचाई की वह विधि जिसमें पंपों की मदद से किसी स्रोत (नदी, बांध, जलाशय) से पानी उठाया जाता है और पाइपों या नालियों के ज़रिए खेतों तक ले जाया जाता है। यह तब अपनाई जाती है जब गुरुत्व से बहाव संभव न हो।
- फसल-गहनता
- सकल बोए गए क्षेत्र और शुद्ध बोए गए क्षेत्र का अनुपात, जिसे प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है। अधिक फसल-गहनता का अर्थ है कि एक वर्ष में उसी ज़मीन पर अधिक फसलें उगाई जाती हैं।
- चांडिल बांध
- झारखंड में सुबर्णरेखा नदी पर बना बांध, जो मुख्य रूप से सिंचाई और जल आपूर्ति के लिए है। यह सरायकेला-खरसावां जिले में स्थित है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: ₹607.03 करोड़ लागत, 9,336 हेक्टेयर क्षेत्र, 14 पंचायतें
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: झारखंड जल संसाधन विभाग
- इस योजना के नाम पर ध्यान दें: नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना
यह गलती न करें!
वे जल स्रोत के रूप में चांडिल बांध के बारे में पूछ सकते हैं, पर नदी का नाम बदल सकते हैं: यह बांध सुबर्णरेखा नदी पर है, दामोदर या कोयल पर नहीं। वे लिफ्ट सिंचाई को नहर सिंचाई या ड्रिप सिंचाई से भी भ्रमित कर सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- लिफ्ट सिंचाई, वर्षा-आधारित कृषि, फसल-गहनता, बहुफसली खेती, ग्रामीण आजीविका, जल संसाधन प्रबंधन
कहीं अटके? एक टैप में समझें
झारखंड सरकार ने सरायकेला-खरसावां जिले के लिए एक बड़ी सिंचाई परियोजना को मंज़ूरी दी है। इसमें पंपों से चांडिल बांध का पानी लिफ्ट करके भूमिगत पाइपों से 9,336 हेक्टेयर खेतों तक पहुंचाया जाएगा। इससे किसान केवल बरसात पर निर्भर रहने के बजाय साल भर फसल उगा सकेंगे।
- नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना को ₹607.03 करोड़ पर स्वीकृत किया गया है।
- इस योजना से सरायकेला-खरसावां जिले के 9,336 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई होगी।
- योजना के लिए पानी चांडिल बांध से लिया जाएगा।
- योजना में नीमडीह और कुकड़ू प्रखंडों की 14 पंचायतें शामिल हैं।
- नोडल विभाग झारखंड जल संसाधन विभाग है।
- भूगोल: भारत में सिंचाई
- शासन: राज्य की योजनाएं और नीतियां
जुड़ी अवधारणाएँ: लिफ्ट सिंचाई, फसल-गहनता, चांडिल बांध
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना के क्रियान्वयन के लिए झारखंड सरकार का कौन-सा विभाग नोडल एजेंसी है?
व्याख्या: जल संसाधन विभाग (जल संसाधन विभाग) टेंडर जारी करेगा और योजना की निगरानी करेगा। कृषि विभाग विस्तार और आदानों पर ध्यान देता है, बड़ी सिंचाई संरचना पर नहीं। ग्रामीण विकास विभाग मनरेगा और ग्रामीण सड़कें देखता है, लिफ्ट सिंचाई परियोजनाएं नहीं। योजना एवं वित्त विभाग बजट स्वीकृत करता है, पर परियोजना लागू नहीं करता।
- Q2कठिन
नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.इस योजना से सरायकेला-खरसावां जिले के 9,336 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई होगी।
- 2.पानी सुबर्णरेखा नदी से सीधी नहर-व्यवस्था के ज़रिए लिया जाएगा।
- 3.इस योजना से किसान खरीफ के धान के साथ रबी की फसलें और सब्ज़ियां भी उगा सकेंगे।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: योजना से 9,336 हेक्टेयर में सिंचाई होगी। कथन 2 गलत है: पानी चांडिल बांध (जलाशय) से लिफ्ट होगा, सुबर्णरेखा नदी से सीधे नहीं, और उसका वितरण भूमिगत पाइपलाइनों से होगा, नहर-नेटवर्क से नहीं। कथन 3 सही है: निश्चित सिंचाई से धान के साथ रबी और सब्ज़ी की खेती संभव होगी।
- Q3आसान
नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना के लिए कुल कितनी प्रशासनिक लागत स्वीकृत की गई है?
व्याख्या: झारखंड सरकार ने ₹607.0332 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी है।
- Q4मध्यम
इस क्षेत्र के लिए झारखंड सरकार का लिफ्ट सिंचाई योजनाओं पर ज़ोर देने का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: समाचार में सरकार का तर्क दिया गया है कि बड़ी नहर परियोजनाएं पूरी होने में लंबा समय लेती हैं, जबकि लिफ्ट सिंचाई योजनाएं अधिक कारगर हैं और कम समय में पूरी हो सकती हैं। ड्रिप सिंचाई एक अलग सूक्ष्म-सिंचाई पद्धति है; यह योजना पानी ले जाने के लिए भूमिगत पाइपलाइनों का उपयोग करती है, ड्रिप एमिटर का नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना क्या है?
यह ₹607.03 करोड़ की योजना है, जिसे झारखंड सरकार ने मंज़ूरी दी है। इसके तहत चांडिल बांध से पानी लिफ्ट करके सरायकेला-खरसावां जिले के 9,336 हेक्टेयर में सिंचाई होगी।
2. चांडिल बांध किस नदी पर बना है?
चांडिल बांध झारखंड में सुबर्णरेखा नदी पर बना है।
3. इस लिफ्ट सिंचाई योजना में पानी कैसे बांटा जाएगा?
पंपों की मदद से पानी लिफ्ट किया जाएगा और भूमिगत पाइपलाइन नेटवर्क के ज़रिए सीधे खेतों तक पहुंचाया जाएगा।
4. योजना का निर्माण कब शुरू होने की उम्मीद है?
टेंडर प्रक्रिया और क्रियान्वयन एजेंसी के चयन के बाद जनवरी-फरवरी 2027 में निर्माण शुरू होने की उम्मीद है।
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मूल खबर8 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें

