राजव्यवस्था

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 1991 के उग्रवादी हमले में घायल BSF कांस्टेबल को दिव्यांग पेंशन देने का आदेश दिया

6 नवंबर 20262 मिनट1 स्रोत4 प्रश्नखबर 70 / 77

प्रिलिम्स के लिए: दिव्यांग पेंशन, सीमा सुरक्षा बल (BSF), कल्याणकारी राज्य, न्यायालय, न्यायाधीश, संगठन, आंकी गई दिव्यांगता, चोट का वर्ष

मेन्स के लिए: कल्याणकारी राज्य, दिव्यांग पेंशन, खतरनाक सार्वजनिक कर्तव्य, विशेष पेंशन प्रावधान

स्रोत:Indian ExpressIndian Express

चर्चा में क्यों?

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) को आदेश दिया है कि वह एक पूर्व कांस्टेबल को दिव्यांग पेंशन दे, जिसे 1991 के उग्रवादी हमले में बांह में गोली लगी थी और जिसने 21 साल सेवा की थी। न्यायालय ने कहा कि कल्याणकारी राज्य उस सैनिक को नहीं छोड़ सकता जिसने राष्ट्र के लिए खून बहाया है।

सारांश

  • पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने BSF को निर्देश दिया कि वह एक पूर्व कांस्टेबल को चिकित्सा आधार पर सेवानिवृत्त माने और उसे दिव्यांग पेंशन दे।
  • उत्तर प्रदेश के बिजनौर में 1991 के एक उग्रवादी हमले में लगी गोली से कांस्टेबल को 45% स्थायी दिव्यांगता हुई।
  • न्यायालय ने कहा कि एकमुश्त मुआवज़ा लेना या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेना, स्वतंत्र रूप से पात्र दिव्यांगता लाभ को समाप्त नहीं करता।

मुख्य बातें

  • दिव्यांग पेंशन पर न्यायालय का फैसला

    पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने BSF को 1991 के उग्रवादी हमले में घायल कांस्टेबल को दिव्यांग पेंशन देने का निर्देश दिया और कहा कि कल्याणकारी राज्य उस सैनिक को नहीं छोड़ सकता जिसने खून बहाया है।

  • मामले के तथ्य

    कांस्टेबल 1988 में BSF में भर्ती हुआ, 1991 के उग्रवादी हमले में दाहिनी बांह में गोली लगी, 21 वर्ष तक सेवा जारी रखी और 2009 में 45% स्थायी दिव्यांगता के साथ सेवानिवृत्त हुआ।

  • स्थापित विधिक सिद्धांत

    न्यायालय ने कहा कि सामान्य सेवानिवृत्ति लाभ या एकमुश्त मुआवज़ा, स्वतंत्र रूप से पात्र दिव्यांगता लाभ के अधिकार को समाप्त नहीं करते।

पृष्ठभूमि

इस मामले में एक BSF कांस्टेबल शामिल है, जो 1988 में भर्ती हुआ और दिसंबर 1991 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर में उसके वाहन पर हुए उग्रवादी हमले में दाहिनी बांह में गोली लगने से घायल हुआ। 1996 में 45% स्थायी दिव्यांगता आंके जाने के बावजूद वह निचली चिकित्सा श्रेणियों में सेवा करता रहा और 21 वर्ष से अधिक सेवा के बाद 2009 में स्वेच्छा से सेवानिवृत्त हुआ। BSF ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और ₹12,412 के पूर्व एकमुश्त मुआवज़े के आधार पर उसका दिव्यांग पेंशन का दावा खारिज कर दिया।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

न्यायालय के आदेश से यह सिद्धांत पुष्ट होता है कि सैन्य सेवा से उत्पन्न दिव्यांगता, खासकर उग्रवादी हमलों से हुई दिव्यांगता, के लिए विशेष पेंशन प्रावधानों के ज़रिए मुआवज़ा मिलना चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति से दिव्यांग पेंशन का अधिकार नहीं छूटता, और पहले दिया गया एकमुश्त मुआवज़ा राज्य की निरंतर ज़िम्मेदारी को समाप्त नहीं करता। यह फैसला ऐसे मामलों के लिए मिसाल बनेगा, जहां सेवा-संबंधी दिव्यांगता वाले कर्मियों को तकनीकी आधारों पर लाभ से वंचित किया गया हो।

आगे की राह

BSF और अन्य अर्धसैनिक बलों को इस फैसले के अनुपालन के लिए अपनी दिव्यांग पेंशन प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी पड़ सकती है। यह फैसला उन पूर्व सैनिकों के और दावों को जन्म दे सकता है, जिन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति या पूर्व मुआवज़े के कारण दिव्यांग पेंशन से वंचित किया गया था। इसके अलावा, स्थायी दिव्यांगता वाले कर्मियों के चिकित्सा आधार पर सेवा से बाहर किए जाने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों की ज़रूरत पर भी ध्यान दिलाया गया है।

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

दिव्यांग पेंशन
सरकारी सेवक को दी जाने वाली पेंशन, जो सरकारी सेवा से उत्पन्न या उससे बढ़ी दिव्यांगता के कारण चिकित्सा आधार पर सेवानिवृत्त किए जाने पर दी जाती है।
सीमा सुरक्षा बल (BSF)
गृह मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, जो शांतिकाल में भारत की भूमि सीमाओं की रक्षा करता है और सीमा-पार अपराधों को रोकता है।
कल्याणकारी राज्य
सरकार की वह अवधारणा जिसमें राज्य अपने नागरिकों, खासकर खतरनाक सेवा में लगे लोगों, के आर्थिक और सामाजिक कल्याण की रक्षा और संवर्धन में प्रमुख भूमिका निभाता है।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस आंकड़े पर ध्यान दें: 1996 में आंकी गई 45% स्थायी दिव्यांगता
  • इस आंकड़े पर ध्यान दें: 21 वर्ष, 7 माह, 29 दिन की सेवा
  • इस न्यायालय पर ध्यान दें: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय
  • इस न्यायाधीश पर ध्यान दें: न्यायमूर्ति प्रवींद्र सिंह चौहान

यह गलती न करें!

परीक्षक 'दिव्यांग पेंशन' को 'सामान्य पेंशन' या 'पारिवारिक पेंशन' से भ्रमित कर सकते हैं। वे 'पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय' को 'सर्वोच्च न्यायालय' या 'दिल्ली उच्च न्यायालय' से भी बदल सकते हैं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • कल्याणकारी राज्य, दिव्यांग पेंशन, खतरनाक सार्वजनिक कर्तव्य, विशेष पेंशन प्रावधान

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    सीमा सुरक्षा बल (BSF) किस मंत्रालय के अधीन कार्य करता है?

  2. Q2कठिन

    पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्णय के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.न्यायालय ने BSF को 1991 के उग्रवादी हमले में घायल कांस्टेबल को दिव्यांग पेंशन देने का निर्देश दिया।
    2. 2.न्यायालय ने कहा कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और पूर्व एकमुश्त मुआवज़ा दिव्यांग पेंशन के अधिकार को समाप्त नहीं करते।
    3. 3.चिकित्सा बोर्ड ने कांस्टेबल की दिव्यांगता को 60% स्थायी आंका था।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3मध्यम

    किस वर्ष BSF कांस्टेबल उग्रवादी हमले में घायल हुआ था?

  4. Q4मध्यम

    इस निर्णय में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा स्थापित प्रमुख विधिक सिद्धांत क्या है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. BSF कांस्टेबल के लिए दिव्यांग पेंशन के संबंध में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने क्या फैसला सुनाया?

न्यायालय ने BSF को निर्देश दिया कि वह पूर्व कांस्टेबल को चिकित्सा आधार पर सेवानिवृत्त माने और उसे दिव्यांग पेंशन दे, यह कहते हुए कि कल्याणकारी राज्य उस सैनिक को नहीं छोड़ सकता जिसने राष्ट्र के लिए खून बहाया है।

2. BSF कांस्टेबल की दिव्यांगता का स्तर कितना था?

कांस्टेबल की दिव्यांगता को 1996 में चिकित्सा बोर्ड ने 45% स्थायी दिव्यांगता आंका था।

3. BSF कांस्टेबल किस वर्ष घायल हुआ था?

दिसंबर 1991 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर में BSF वाहन पर उग्रवादी हमले के दौरान उसकी दाहिनी बांह में गोली लगी।

4. इस मामले में आदेश देने वाले न्यायाधीश कौन थे?

न्यायमूर्ति प्रवींद्र सिंह चौहान, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 28 अक्टूबर 2026 को यह आदेश दिया।

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