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जियो, वनवेब, स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट संचार लाइसेंस मिले

6 नवंबर 20262 मिनट2 स्रोत4 प्रश्नखबर 25 / 131

प्रिलिम्स के लिए: उपग्रह संचार (SATCOM), स्पेक्ट्रम आवंटन, दूरसंचार क्षेत्र में लाइसेंसिंग, SATCOM का पूरा नाम, नोडल मंत्रालय, लाइसेंस पाने वाली कंपनियां, व्यावसायिक शुरुआत के लिए बाकी चरण, वर्तमान संदर्भ

मेन्स के लिए: उपग्रह संचार, डिजिटल खाई, स्पेक्ट्रम आवंटन, सुरक्षा अनुपालन

स्रोत:HindustanHindustanDainik BhaskarDainik Bhaskar

नया अपडेट

Dainik BhaskarDainik Bhaskar की 8 नवंबर 2026 की खबर से जुड़े नए तथ्य

  • वनवेब और जियो सैटकॉम ने सुरक्षा अनुपालन दस्तावेज़ दाखिल किए हैं
  • स्टारलिंक ने अभी तक सुरक्षा दस्तावेज़ दाखिल नहीं किए हैं
  • तीनों कंपनियों के पास जीएमपीसीएस (सैटेलाइट द्वारा वैश्विक मोबाइल व्यक्तिगत संचार) लाइसेंस है
  • स्टारलिंक ने भारतीय यूज़र डेटा को भारत में रखने की प्रतिबद्धता जताई
  • एलन मस्क ने आरोप लगाया कि भारतीय उद्योगपति स्टारलिंक के प्रवेश को रोक रहे हैं; सरकार ने पक्षपात से इनकार किया

चर्चा में क्यों?

भारत सरकार ने तीन कंपनियों, जियो, वनवेब और स्टारलिंक, को उपग्रह संचार (सैटकॉम) लाइसेंस दिए हैं। सरकार का कहना है कि लाइसेंस देने की प्रक्रिया पारदर्शी और सभी कंपनियों के लिए एकसमान रही है, और उपभोक्ता कीमत, सेवा की गुणवत्ता और उपलब्धता के आधार पर अपना सेवा प्रदाता चुनेंगे। व्यावसायिक सेवाएं शुरू होने से पहले स्पेक्ट्रम आवंटन और उसकी कीमत तय करनी होगी, और सुरक्षा अनुपालन के दस्तावेज़ जमा करने होंगे।

सारांश

  • जियो, वनवेब और स्टारलिंक, इन तीन कंपनियों को भारत में उपग्रह संचार (सैटकॉम) लाइसेंस मिल गए हैं।
  • सरकार का कहना है कि सभी ऑपरेटरों के लिए लाइसेंस देने की प्रक्रिया पारदर्शी और एकसमान रही।
  • व्यावसायिक शुरुआत से पहले दो चरण बाकी हैं: स्पेक्ट्रम आवंटन और उसकी कीमत तय करना, तथा तीनों लाइसेंसधारी कंपनियों द्वारा सुरक्षा अनुपालन पूरा करना।

मुख्य बातें

  • तीन सैटकॉम लाइसेंसधारी

    जियो, वनवेब और स्टारलिंक को पारदर्शी और एकसमान प्रक्रिया के तहत भारत में उपग्रह संचार लाइसेंस मिल चुके हैं।

  • ज़रूरी सुरक्षा अनुपालन

    तीनों कंपनियों को व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले तकनीकी क्षमता दिखानी होगी और सुरक्षा मानकों पर खरा उतरना होगा।

  • स्पेक्ट्रम आवंटन अभी लंबित

    पूरे पैमाने पर सैटकॉम सेवाएं शुरू होने से पहले स्पेक्ट्रम आवंटन और उसकी कीमत तय करना उन दो मुख्य चरणों में से एक है, जो अभी बाकी हैं।

पृष्ठभूमि

भारत का उपग्रह संचार क्षेत्र बढ़ रहा है और कई विदेशी कंपनियां यहां प्रवेश चाहती हैं। सरकार का लाइसेंसिंग ढांचा सभी ऑपरेटरों पर एक जैसे नियम लागू करता है। सैटकॉम लाइसेंस दूरसंचार विभाग (DoT) जारी करता है। जियो (रिलायंस समर्थित), वनवेब (वैश्विक उपग्रह संचार कंपनी) और स्टारलिंक (स्पेसएक्स द्वारा संचालित) के आने से भारतीय बाज़ार में बड़ा दरवाज़ा खुला है।

प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव

तीन बड़ी कंपनियों को लाइसेंस मिलने से भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड का प्रतिस्पर्धी बाज़ार बनेगा, खासकर उन दूरदराज़ और ग्रामीण इलाकों में जहां ज़मीनी कनेक्टिविटी कमज़ोर है। उपभोक्ता को चुनाव की आज़ादी देने पर सरकार के ज़ोर से कीमत और सेवा की गुणवत्ता ही अपनाए जाने को तय करेगी। फिर भी सुरक्षा अनुपालन और स्पेक्ट्रम की कीमत अहम बाधाएं हैं। वनवेब ने सबसे पहले सुरक्षा दस्तावेज़ जमा किए, इसके बाद जियो ने और सबसे अंत में स्टारलिंक ने।

आगे की राह

बाकी दो चरण, यानी स्पेक्ट्रम आवंटन और उसकी कीमत तथा अंतिम सुरक्षा मंज़ूरी, व्यावसायिक शुरुआत की समय-सीमा तय करेंगे। माना जा रहा है कि सरकार जल्द स्पेक्ट्रम नीलामी या आवंटन के नियम घोषित करेगी। सेवाएं शुरू होने पर सैटकॉम भारत के उन इलाकों में डिजिटल खाई पाट सकता है, जो अब तक नेटवर्क से बाहर हैं।

पृष्ठभूमि GK

इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं

उपग्रह संचार (SATCOM)
पृथ्वी पर अलग-अलग बिंदुओं के बीच संचार संपर्क देने के लिए कृत्रिम उपग्रहों का उपयोग। इसका इस्तेमाल टेलीफोनी, टेलीविज़न, इंटरनेट और सैन्य कार्यों में होता है।
स्पेक्ट्रम आवंटन
अलग-अलग उपयोगकर्ताओं या सेवाओं को रेडियो फ्रीक्वेंसी सौंपने की प्रक्रिया। भारत में इसका प्रबंधन दूरसंचार विभाग करता है, और यह नीलामी या प्रशासनिक आवंटन के ज़रिए हो सकता है।
दूरसंचार क्षेत्र में लाइसेंसिंग
वह नियामक प्रक्रिया जिसमें सरकार कंपनियों को दूरसंचार सेवाएं देने की अनुमति देती है। लाइसेंस में तकनीक, सुरक्षा, कवरेज और शुल्क से जुड़ी शर्तें तय होती हैं।

परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर उत्तर देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें।

परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा

  • इस डेटा पर ध्यान दें: सैटकॉम के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस मिला: जियो, वनवेब, स्टारलिंक
  • इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: दूरसंचार विभाग, केंद्रीय संचार मंत्रालय
  • इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम के तहत सैटकॉम लाइसेंसिंग ढांचा

यह गलती न करें!

परीक्षक पूछ सकते हैं कि लाइसेंस पाने वाली आखिरी कंपनी कौन रही (स्टारलिंक) या सुरक्षा दस्तावेज़ सबसे पहले किसने जमा किए (वनवेब)। वे 'लाइसेंस मिलना' और 'व्यावसायिक सेवाएं शुरू होना' को उलझा भी सकते हैं, जबकि सेवाएं अभी शुरू नहीं हुई हैं।

मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु

  • उपग्रह संचार, डिजिटल खाई, स्पेक्ट्रम आवंटन, सुरक्षा अनुपालन

कहीं अटके? एक टैप में समझें

अभ्यास प्रश्न

उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।

  1. Q1आसान

    भारत में उपग्रह संचार लाइसेंस देने की मुख्य ज़िम्मेदारी किस मंत्रालय की है?

  2. Q2कठिन

    भारत में सैटेलाइट संचार (सैटकॉम) लाइसेंसिंग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

    1. 1.जियो, वनवेब और स्टारलिंक, इन तीन कंपनियों को सैटकॉम लाइसेंस दिए गए हैं।
    2. 2.तीनों कंपनियां भारत में व्यावसायिक सेवाएं पहले ही शुरू कर चुकी हैं।
    3. 3.व्यावसायिक शुरुआत से पहले सुरक्षा अनुपालन के दस्तावेज़ जमा करने होंगे।

    ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  3. Q3आसान

    भारत में कितनी कंपनियों को उपग्रह संचार लाइसेंस दिए गए हैं?

  4. Q4मध्यम

    भारत में कई सैटकॉम ऑपरेटरों के प्रवेश से मुख्य रूप से कौन-सा लाभ अपेक्षित है?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. भारत में किन कंपनियों को उपग्रह संचार लाइसेंस मिले हैं?

भारत सरकार ने जियो, वनवेब और स्टारलिंक, इन तीन कंपनियों को उपग्रह संचार लाइसेंस दिए हैं।

2. भारत में सैटकॉम सेवाएं शुरू होने से पहले कौन-से चरण बाकी हैं?

दो चरण बाकी हैं: स्पेक्ट्रम आवंटन और उसकी कीमत तय करना, तथा तीनों लाइसेंसधारी कंपनियों द्वारा सुरक्षा अनुपालन पूरा करना।

3. भारत में उपग्रह संचार लाइसेंस कौन जारी करता है?

केंद्रीय संचार मंत्रालय के अंतर्गत दूरसंचार विभाग (DoT) भारत में उपग्रह संचार लाइसेंस जारी करता है।

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