प्रिलिम्स के लिए: विशेष मुक्त क्षेत्र लाइसेंसिंग नीति (OALP), हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH), विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ), योजना का नाम, कुल आवंटन, अपतटीय खोज आवंटन, गहरे समुद्र के खोजी कुओं की संख्या, प्रति कुआं लागत सहायता
मेन्स के लिए: ऊर्जा सुरक्षा, आयात निर्भरता में कमी, गहरे समुद्र की खोज, हाइड्रोकार्बन खोज, निवेश का जोखिम कम करना
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- समुद्र मंथन योजना का कुल आवंटन ₹84,084 करोड़ है।
- सरकार प्रति कुआं ड्रिलिंग लागत का 50% तक वहन करेगी, अधिकतम ₹675 करोड़।
- विशेष OALP के तहत गहरे समुद्र के ब्लॉकों के लिए हर महीने बोली लगेगी।
- योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31 जुलाई 2026 को मंज़ूरी दी।
- नोडल एजेंसी हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH) है।
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने गहरे समुद्र और बहुत गहरे समुद्र में तेल व गैस की खोज बढ़ाने के लिए ₹84,084 करोड़ की 'समुद्र मंथन' योजना को मंज़ूरी दी है। विशेष मुक्त क्षेत्र लाइसेंसिंग नीति (OALP) के तहत कंपनियां हर महीने बोली लगा सकेंगी, और पात्र खोजी कुओं की खुदाई लागत का 50% तक सरकार वहन करेगी, जो प्रति कुआं ₹675 करोड़ तक सीमित है।
सारांश
- 31 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'समुद्र मंथन' योजना को मंज़ूरी दी। इसमें अपतटीय खोज गतिविधियों के लिए ₹43,200 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिनमें गहरे समुद्र में 60 खोजी कुओं की खुदाई शामिल है।
- विशेष OALP के तहत हर महीने की पहली तारीख से 21 दिन की रुचि पत्र (EOI) अवधि शुरू होगी, जिससे कंपनियां साल में 12 बार बोली लगा सकेंगी।
- पात्र कुओं पर खुदाई लागत का 50% तक वित्तीय सहयोग मिलेगा, जो प्रति कुआं अधिकतम ₹675 करोड़ होगा।
मुख्य बातें
समुद्र मंथन योजना
सरकार ₹84,084 करोड़ की एक योजना के तहत गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देगी। इसमें पात्र खोजी कुओं की खुदाई लागत का 50% तक वित्तीय सहयोग दिया जाएगा।
मासिक बोली चक्र
विशेष OALP के तहत कंपनियां हर महीने बोली लगा सकती हैं, जिसमें पहली तारीख से 21 दिन की EOI अवधि शुरू होती है और साल में 12 बोली दौर होते हैं।
अपतटीय खोज पर ज़ोर
योजना में अपतटीय गतिविधियों के लिए ₹43,200 करोड़ आवंटित हैं, जिनमें 60 गहरे समुद्र के खोजी कुओं की खुदाई शामिल है, ताकि भारत की तेल आयात पर निर्भरता घटे।
पृष्ठभूमि
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की ज़रूरत का 80% से अधिक आयात से पूरा करता है, इसलिए ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता है। भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के गहरे और बहुत गहरे समुद्री ब्लॉकों में काफी हाइड्रोकार्बन संभावना है, लेकिन ऊंची लागत और तकनीकी चुनौतियों के कारण ये ज़्यादातर अनदेखे पड़े हैं। समुद्र मंथन योजना वित्तीय प्रोत्साहन और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाकर इन निवेशों का जोखिम कम करना चाहती है।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
विशेष OALP ढांचे के तहत मासिक बोली चक्र प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण सुधार है। यह समय-समय पर होने वाले बड़े बोली दौरों की जगह लगातार और तेज़ प्रक्रिया लाता है, जिससे कंपनियां अपनी तैयारी के अनुसार बोली लगा सकती हैं। 50% लागत सहायता (प्रति कुआं ₹675 करोड़ तक) गहरे समुद्र की ड्रिलिंग के ऊंचे पूंजीगत खर्च को सीधे दूर करती है। 60 कुओं के लिए ₹43,200 करोड़ का आवंटन एक केंद्रित और समय-सीमा वाले दृष्टिकोण को दर्शाता है। सफलता से आयात बिल घट सकता है और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ सकती है।
आगे की राह
समुद्र मंथन की सफलता घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तेल कंपनियों की भागीदारी पर निर्भर करेगी। सरकार को पारदर्शी और तेज़ ब्लॉक आवंटन सुनिश्चित करना होगा। गहरे समुद्र की ड्रिलिंग के लिए तकनीकी साझेदारी और पर्यावरण सुरक्षा उपाय अहम होंगे। यह योजना 2047 तक ऊर्जा आयात पर निर्भरता घटाने और ऊर्जा सुरक्षा हासिल करने के सरकार के व्यापक लक्ष्य से मेल खाती है।
समुद्र मंथन योजना की मुख्य विशेषताएँ
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| कुल आवंटन | ₹84,084 करोड़ |
| अपतटीय खोज आवंटन | ₹43,200 करोड़ |
| गहरे समुद्र के कुओं की संख्या | 60 |
| ड्रिलिंग लागत सहायता | 50% तक |
| प्रति कुआं अधिकतम सहायता | ₹675 करोड़ |
| बोली की आवृत्ति | मासिक (साल में 12 बार) |
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- विशेष मुक्त क्षेत्र लाइसेंसिंग नीति (OALP)
- ऐसी नीति जिसके तहत कंपनियां सरकारी अधिसूचित बोली दौर का इंतज़ार किए बिना पूरे साल खोज ब्लॉकों के लिए बोली लगा सकती हैं। वे रुचि के क्षेत्र चुनकर किसी भी समय रुचि पत्र (EOI) जमा कर सकती हैं।
- हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH)
- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तकनीकी शाखा, जो भारत में तेल व गैस क्षेत्र के नियमन और संवर्धन की ज़िम्मेदार है।
- विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ)
- समुद्र का वह क्षेत्र जिस पर तट से 200 नॉटिकल मील तक राज्य को समुद्री संसाधनों की खोज और उपयोग के विशेष अधिकार होते हैं।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इन आंकड़ों पर ध्यान दें: समुद्र मंथन योजना का कुल आवंटन ₹84,084 करोड़; अपतटीय खोज आवंटन ₹43,200 करोड़; 60 गहरे समुद्र के कुएं; सहायता 50% तक या प्रति कुआं ₹675 करोड़
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH), पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन
- इस कानूनी बिंदु पर ध्यान दें: विशेष मुक्त क्षेत्र लाइसेंसिंग नीति (OALP)
यह गलती न करें!
परीक्षक कुल योजना राशि (₹84,084 करोड़) को अपतटीय खोज आवंटन (₹43,200 करोड़) से बदल सकते हैं या कुओं की संख्या को लेकर भ्रम पैदा कर सकते हैं। वे सहायता प्रतिशत (50%) और प्रति कुआं सीमा (₹675 करोड़) के बीच अंतर पर भी प्रश्न पूछ सकते हैं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- ऊर्जा सुरक्षा, आयात निर्भरता में कमी, गहरे समुद्र की खोज, हाइड्रोकार्बन खोज, निवेश का जोखिम कम करना
कहीं अटके? एक टैप में समझें
भारत आयात घटाने के लिए समुद्र के गहरे हिस्से में तेल और गैस खोजना चाहता है। सरकार ने ₹84,084 करोड़ की समुद्र मंथन योजना शुरू की है। यह पात्र खोजी कुओं की ड्रिलिंग लागत का आधा, प्रति कुआं ₹675 करोड़ तक, वहन करेगी। कंपनियां अब साल में एक बार की जगह हर महीने ब्लॉकों के लिए बोली लगा सकती हैं।
- समुद्र मंथन योजना का कुल आवंटन ₹84,084 करोड़ है।
- सरकार प्रति कुआं ड्रिलिंग लागत का 50% तक वहन करेगी, अधिकतम ₹675 करोड़।
- विशेष OALP के तहत गहरे समुद्र के ब्लॉकों के लिए हर महीने बोली लगेगी।
- योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31 जुलाई 2026 को मंज़ूरी दी।
- नोडल एजेंसी हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH) है।
- अर्थव्यवस्था: ऊर्जा सुरक्षा और तेल खोज
- भूगोल: समुद्री संसाधन और EEZ
जुड़ी अवधारणाएँ: विशेष मुक्त क्षेत्र लाइसेंसिंग नीति (OALP), हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH), विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ)
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1मध्यम
गहरे समुद्र में तेल व गैस की खोज के लिए समुद्र मंथन योजना को लागू करने वाली नोडल एजेंसी कौन-सी है?
व्याख्या: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन DGH नोडल एजेंसी है। ONGC एक खोज कंपनी है, नियामक नहीं। वित्त मंत्रालय धन को मंज़ूरी देता है, पर योजना लागू नहीं करता। नीति आयोग एक नीति थिंक टैंक है।
- Q2कठिन
समुद्र मंथन योजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.योजना में खोजी कुओं की खुदाई लागत पर 50% सहायता है, जिसकी सीमा प्रति कुआं ₹675 करोड़ है।
- 2.विशेष OALP के तहत ब्लॉकों के लिए बोली साल में एक बार होगी।
- 3.इस योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई 2026 में मंज़ूरी दी थी।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: सरकार ड्रिलिंग लागत का 50% तक वहन करेगी, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति कुआं ₹675 करोड़ है। कथन 2 गलत है: बोली हर महीने (साल में 12 बार) होगी, साल में एक बार नहीं। कथन 3 सही है: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना को 31 जुलाई 2026 को मंज़ूरी दी।
- Q3मध्यम
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंज़ूर समुद्र मंथन योजना का कुल आवंटन कितना है?
व्याख्या: समुद्र मंथन योजना का कुल आवंटन ₹84,084 करोड़ है। ₹43,200 करोड़ विशेष रूप से अपतटीय खोज गतिविधियों के लिए आवंटित है।
- Q4मध्यम
समुद्र मंथन योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: योजना का लक्ष्य गहरे समुद्री ब्लॉकों से घरेलू हाइड्रोकार्बन उत्पादन बढ़ाना और आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता घटाना है। यह स्थलीय रिफाइनरियों, आयात सब्सिडी या पर्यटन पर केंद्रित नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. समुद्र मंथन योजना क्या है?
समुद्र मंथन योजना ₹84,084 करोड़ की सरकारी पहल है, जिसका उद्देश्य भारत में गहरे और बहुत गहरे समुद्र में तेल व गैस की खोज बढ़ाना है।
2. समुद्र मंथन योजना खोज कंपनियों को कौन-से प्रोत्साहन देती है?
योजना पात्र खोजी कुओं की ड्रिलिंग लागत पर 50% सहायता देती है, जिसकी सीमा प्रति कुआं ₹675 करोड़ है, और विशेष OALP के तहत हर महीने बोली की अनुमति देती है।
3. समुद्र मंथन योजना को कब मंज़ूरी मिली?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने समुद्र मंथन योजना को 31 जुलाई 2026 को मंज़ूरी दी।
4. समुद्र मंथन योजना को लागू करने की नोडल एजेंसी कौन है?
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH) नोडल एजेंसी है।
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मूल खबर5 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
