प्रिलिम्स के लिए: पीएम कुसुम योजना, सौर मॉड्यूल, वितरण कंपनियों पर सब्सिडी का बोझ, रिपोर्ट का नाम, प्रकाशित करने वाली संस्था, कुल संभावित मांग, बिजली पंपों से मांग, डीजल पंपों से मांग
मेन्स के लिए: कृषि में ऊर्जा संक्रमण, विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा, पीएम कुसुम, सब्सिडी का युक्तिकरण, घरेलू विनिर्माण (आत्मनिर्भर भारत)
स्रोत:
Hindustan
वन-डे परीक्षा के 5 तथ्य
SSC, रेलवे, पुलिस और शिक्षक भर्ती में ऐसे ही सीधे सवाल आते हैं।
- ISMA रिपोर्ट कृषि से 116 GW अतिरिक्त सौर मॉड्यूल की मांग का अनुमान लगाती है।
- बिजली पंपों से 100 GW और डीजल पंपों से 16 GW की मांग।
- पीएम कुसुम ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 7.6 GW सौर क्षमता जोड़ी।
- पीएम कुसुम के तहत जुलाई 2026 तक 28 लाख से अधिक सिंचाई पंपों का सौरीकरण हुआ।
- भारत की कुल बिजली खपत में कृषि की हिस्सेदारी 17.88% है।
चर्चा में क्यों?
भारतीय सौर विनिर्माता संघ (ISMA) की रिपोर्ट के अनुसार भारत के कृषि क्षेत्र में 116 GW अतिरिक्त सौर मॉड्यूल की मांग होगी, जो मुख्य रूप से सिंचाई पंपों के विद्युतीकरण से आएगी। इससे घरेलू सौर विनिर्माण के लिए बड़ा अवसर बनता है, और इसमें पीएम कुसुम योजना की अहम भूमिका है।
सारांश
- ISMA की रिपोर्ट 'पावरिंग द फार्म्स, बिल्डिंग द फैक्ट्री' का अनुमान है कि कृषि से 116 GW अतिरिक्त सौर मॉड्यूल की मांग होगी: बिजली से चलने वाले पंपों से 100 GW और डीजल पंपों से 16 GW।
- पीएम कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) योजना ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 7.6 GW सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी।
- भारत की कुल बिजली खपत में कृषि की हिस्सेदारी 17.88% है। बिजली वितरण कंपनियों पर सब्सिडी का बोझ वित्त वर्ष 2019-20 के ₹1.21 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में ₹2.41 लाख करोड़ हो गया।
मुख्य बातें
खेतों से 116 GW की मांग
ISMA रिपोर्ट के अनुसार कृषि से 116 GW अतिरिक्त सौर मॉड्यूल की मांग होगी, जिसमें 100 GW बिजली पंपों से और 16 GW डीजल पंपों से होगी।
पीएम कुसुम से सौरीकरण को बढ़ावा
पीएम कुसुम ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 7.6 GW सौर क्षमता जोड़ी और जुलाई 2026 तक 28 लाख से अधिक सिंचाई पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा।
बढ़ता सब्सिडी का बोझ
कृषि बिजली पर सब्सिडी ₹1.21 लाख करोड़ (वित्त वर्ष 2019-20) से बढ़कर ₹2.41 लाख करोड़ (वित्त वर्ष 2024-25) हो गई, यानी लगभग दोगुनी।
पृष्ठभूमि
भारत के कृषि क्षेत्र में लगभग 2.3 करोड़ सिंचाई पंप हैं, जो ज़्यादातर ग्रिड बिजली या डीजल से चलते हैं। सरकार की पीएम कुसुम योजना का लक्ष्य इन पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ना है, ताकि पारंपरिक बिजली और डीजल पर निर्भरता घटे, सब्सिडी का बोझ कम हो और घरेलू सौर विनिर्माण को बढ़ावा मिले।
प्रमुख विश्लेषण एवं प्रभाव
116 GW की मांग घरेलू सौर मॉड्यूल निर्माताओं के लिए बड़ा अवसर है। अभी भारत की बिजली खपत का 17.88% कृषि में जाता है, और वितरण कंपनियों पर सब्सिडी का बोझ पांच वर्षों में दोगुना होकर ₹2.41 लाख करोड़ हो गया है। पंपों का सौरीकरण इस वित्तीय दबाव को कम कर सकता है और किसानों को दिन में भरोसेमंद बिजली भी दे सकता है। भूजल संकट वाले क्षेत्रों के डीजल पंपों को अनुमान से बाहर रखना एक अहम सावधानी है।
आगे की राह
इस संभावना को साकार करने के लिए नीतिगत समर्थन जारी रखना, घरेलू सौर उपकरणों का अनिवार्य उपयोग और परियोजनाओं की नियमित उपलब्धता ज़रूरी है। वित्त वर्ष 2025-26 में पीएम कुसुम के तहत रिकॉर्ड 7.6 GW जुड़ना गति दिखाता है, लेकिन सभी 2.3 करोड़ पंपों तक पहुंचने के लिए लगातार निवेश और ग्रिड से जोड़ना होगा।
पृष्ठभूमि GK
इस खबर को समझने के लिए आवश्यक मूल अवधारणाएं
- पीएम कुसुम योजना
- प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान, एक केंद्रीय सरकारी योजना है, जो सिंचाई पंपों का सौरीकरण करके और बंजर भूमि पर सौर बिजली संयंत्र लगाकर कृषि में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देती है।
- सौर मॉड्यूल
- सौर मॉड्यूल, यानी सोलर पैनल, फोटोवोल्टेइक सेलों का एक समूह है, जो सूरज की रोशनी को दिष्ट धारा बिजली में बदलता है। कई मॉड्यूल मिलकर सोलर ऐरे बनाते हैं।
- वितरण कंपनियों पर सब्सिडी का बोझ
- वह लागत, जो बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को किसानों को रियायती दर पर बिजली देने पर उठानी पड़ती है, जिसका अंतर सरकार चुकाती है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य
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परीक्षा में कैसे पूछा जाएगा
- इस आंकड़े पर ध्यान दें: कृषि से 116 GW अतिरिक्त सौर मॉड्यूल की मांग; 100 GW बिजली पंपों से, 16 GW डीजल पंपों से।
- इस आंकड़े पर ध्यान दें: पीएम कुसुम के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 7.6 GW सौर क्षमता जुड़ी।
- इस आंकड़े पर ध्यान दें: जुलाई 2026 तक 28 लाख से अधिक पंपों का सौरीकरण; कुल पंप लगभग 2.3 करोड़।
- इस आंकड़े पर ध्यान दें: कृषि बिजली की हिस्सेदारी 17.88%; सब्सिडी का बोझ ₹2.41 लाख करोड़ (वित्त वर्ष 2024-25)।
- इस नोडल निकाय पर ध्यान दें: पीएम कुसुम के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE)।
यह गलती न करें!
स्रोत की मांग में भ्रम: 116 GW संभावित मांग है, स्थापित क्षमता नहीं। साथ ही पीएम कुसुम को रूफटॉप सोलर या पीएम सूर्य घर जैसी दूसरी सौर योजनाओं से न मिलाएं।
मुख्य परीक्षा के उत्तर-लेखन के लिए उपयोगी बिंदु
- कृषि में ऊर्जा संक्रमण, विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा, पीएम कुसुम, सब्सिडी का युक्तिकरण, घरेलू विनिर्माण (आत्मनिर्भर भारत)
कहीं अटके? एक टैप में समझें
भारतीय सौर विनिर्माता संघ की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के खेतों को 116 GW अतिरिक्त सौर पैनल की ज़रूरत पड़ सकती है। यह मांग सिंचाई पंपों को सौर ऊर्जा से चलाने से आएगी। सरकार की पीएम कुसुम योजना ने पहले ही 28 लाख से अधिक पंपों का सौरीकरण किया है और पिछले साल रिकॉर्ड 7.6 GW सौर क्षमता जोड़ी है। इससे किसानों की बिजली और डीजल की लागत घटेगी और भारतीय सौर पैनल कारखानों को बढ़ावा मिलेगा।
- ISMA रिपोर्ट कृषि से 116 GW अतिरिक्त सौर मॉड्यूल की मांग का अनुमान लगाती है।
- बिजली पंपों से 100 GW और डीजल पंपों से 16 GW की मांग।
- पीएम कुसुम ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 7.6 GW सौर क्षमता जोड़ी।
- पीएम कुसुम के तहत जुलाई 2026 तक 28 लाख से अधिक सिंचाई पंपों का सौरीकरण हुआ।
- भारत की कुल बिजली खपत में कृषि की हिस्सेदारी 17.88% है।
- अर्थव्यवस्था: कृषि एवं खाद्य प्रबंधन
- पर्यावरण: नवीकरणीय ऊर्जा
जुड़ी अवधारणाएँ: पीएम कुसुम योजना, सौर मॉड्यूल, वितरण कंपनियों पर सब्सिडी का बोझ
अभ्यास प्रश्न
उत्तर चुनें, फिर व्याख्या देखें।
- Q1आसान
समाचार में बताई गई पीएम कुसुम योजना को लागू करने की मुख्य ज़िम्मेदारी किस मंत्रालय की है?
व्याख्या: पीएम कुसुम नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अंतर्गत एक योजना है। कृषि मंत्रालय फसलों और किसान कल्याण पर केंद्रित है, ऊर्जा पर नहीं। विद्युत मंत्रालय ग्रिड बिजली देखता है, और पर्यावरण मंत्रालय जलवायु नीति से जुड़ा है, इस योजना से नहीं।
- Q2कठिन
सौर मॉड्यूल मांग पर ISMA रिपोर्ट के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1.रिपोर्ट भारत के कृषि क्षेत्र से 116 GW अतिरिक्त सौर मॉड्यूल की मांग का अनुमान लगाती है।
- 2.बिजली पंपों से मांग 100 GW अनुमानित है, जबकि डीजल पंपों का योगदान 16 GW है।
- 3.रिपोर्ट 2 नवंबर 2026 को भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट में जारी की गई थी।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
व्याख्या: कथन 1 सही है: रिपोर्ट 116 GW अतिरिक्त मांग का अनुमान लगाती है। कथन 2 गलत है: बिजली पंपों से 100 GW और डीजल पंपों से 16 GW है (मान आपस में बदले गए हैं)। कथन 3 सही है: रिपोर्ट 2 नवंबर 2026 को भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट में जारी हुई थी। अतः विकल्प C सही है।
- Q3मध्यम
ISMA रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में कृषि बिजली आपूर्ति पर वितरण कंपनियों पर कुल सब्सिडी का बोझ कितना था?
व्याख्या: वित्त वर्ष 2024-25 में सब्सिडी का बोझ बढ़कर ₹2.41 लाख करोड़ हो गया। वित्त वर्ष 2019-20 का आंकड़ा ₹1.21 लाख करोड़ था, ₹1.85 लाख करोड़ एक संभावित लेकिन गलत मध्यवर्ती आंकड़ा है, और ₹2.90 लाख करोड़ अधिक अनुमान है।
- Q4मध्यम
पीएम कुसुम योजना के तहत सिंचाई पंपों के सौरीकरण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
व्याख्या: योजना का लक्ष्य किसानों को ऊर्जा सुरक्षा देना, पारंपरिक बिजली और डीजल पर निर्भरता घटाना और वितरण कंपनियों का सब्सिडी बोझ कम करना है। सौर पैनलों का निर्यात बढ़ाना और वितरण कंपनियों के लिए राजस्व पैदा करना इसके मुख्य उद्देश्य नहीं हैं, और यह योजना कृषि उपज के दाम सीधे नियंत्रित नहीं करती।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. भारत के कृषि क्षेत्र से सौर मॉड्यूल की अनुमानित मांग कितनी है?
भारतीय सौर विनिर्माता संघ (ISMA) की रिपोर्ट 116 GW अतिरिक्त सौर मॉड्यूल की मांग का अनुमान लगाती है: 100 GW बिजली पंपों से और 16 GW डीजल पंपों से।
2. भारत में सिंचाई पंपों के सौरीकरण को कौन-सी योजना बढ़ावा दे रही है?
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत पीएम कुसुम (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) योजना भारत में सिंचाई पंपों के सौरीकरण को आगे बढ़ा रही है।
3. वित्त वर्ष 2025-26 में पीएम कुसुम के तहत कितनी सौर क्षमता जोड़ी गई?
वित्त वर्ष 2025-26 में पीएम कुसुम के तहत रिकॉर्ड 7.6 GW सौर क्षमता जोड़ी गई।
4. कृषि बिजली के लिए वितरण कंपनियों पर सब्सिडी का बोझ कितना है?
कृषि बिजली आपूर्ति के लिए वितरण कंपनियों पर सब्सिडी का बोझ वित्त वर्ष 2019-20 के ₹1.21 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में ₹2.41 लाख करोड़ हो गया।
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मूल खबर5 नवंबर 2026 · खबर पढ़ें
